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Bijnor News: बिजनौर- इलाज में लापरवाही! टीबी मरीजों पर बेअसर सामान्य दवा
Fri, 20 Jan 2023 11:56 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 20 Jan 2023 11:56 PM IST
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-सामान्य दवा बेअसर होने पर एमडीआर श्रेणी में रखे गए मरीज
-257 मरीजों का एमडीआर श्रेणी में हो रहा इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। इलाज में लापरवाही टीबी मरीजों पर भारी पड़ रही है। बीच में दवाई छोड़ने पर टीबी का वायरस घटने की बजाय बढ़ जाता है। जिले में इस समय ऐसे 257 मरीज हैं। जिन पर टीबी की सामान्य दवा बेअसर साबित हो रही है। इसी वजह से इन मरीजों को एमडीआर श्रेणी में रखा गया है।
सरकार 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने पर जोर दे रही है। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग लोगों को टीबी से बचाव के बारे में जागरूक कर रहा है। लोगों को दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रहने पर जांच कराने के लिए कह रहा है। जिले में इस समय सामान्य टीबी के 5658 मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। वहीं कुछ लोग टीबी का इलाज कराने में लापरवाही बरत रहे हैं। सरकार की ओर से टीबी का मुफ्त इलाज किया जा रहा है। मगर फिर भी मरीज कुछ आराम होने पर ही बीच में दवाई छोड़ देते हैं। जिसकी वजह से मरीज को एमडीआर की श्रेणी में रखा जाता है।
इसके अलावा कुछ मरीज शुरूआत में समय से इलाज शुरू नहीं करते हैं। एमडीआर श्रेणी में मरीजों पर टीबी की सामान्य दवा असर नहीं कर रही है। इन मरीजों के लिए अलग दवाई है। जिले में एमडीआर श्रेणी में 257 मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक एमडीआर श्रेणी के मरीजों का 11 माह से दो साल तक इलाज चलता है। वहीं सामान्य श्रेणी में टीबी का छह महीने का इलाज होता है।
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वर्जन::
स्वास्थ्य विभाग जांच और दवा मरीजों को उपलब्ध करा रहा है। लोगों को टीबी के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। समय से इलाज कराएं और इलाज शुरू होने के बाद बीच में इलाज न छोड़े। इससे मरीज की परेशानी बढ़ जाती है।.....डॉ. बीएस रावत, जिला क्षय रोग अधिकारी
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-257 मरीजों का एमडीआर श्रेणी में हो रहा इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। इलाज में लापरवाही टीबी मरीजों पर भारी पड़ रही है। बीच में दवाई छोड़ने पर टीबी का वायरस घटने की बजाय बढ़ जाता है। जिले में इस समय ऐसे 257 मरीज हैं। जिन पर टीबी की सामान्य दवा बेअसर साबित हो रही है। इसी वजह से इन मरीजों को एमडीआर श्रेणी में रखा गया है।
सरकार 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने पर जोर दे रही है। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग लोगों को टीबी से बचाव के बारे में जागरूक कर रहा है। लोगों को दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रहने पर जांच कराने के लिए कह रहा है। जिले में इस समय सामान्य टीबी के 5658 मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। वहीं कुछ लोग टीबी का इलाज कराने में लापरवाही बरत रहे हैं। सरकार की ओर से टीबी का मुफ्त इलाज किया जा रहा है। मगर फिर भी मरीज कुछ आराम होने पर ही बीच में दवाई छोड़ देते हैं। जिसकी वजह से मरीज को एमडीआर की श्रेणी में रखा जाता है।
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इसके अलावा कुछ मरीज शुरूआत में समय से इलाज शुरू नहीं करते हैं। एमडीआर श्रेणी में मरीजों पर टीबी की सामान्य दवा असर नहीं कर रही है। इन मरीजों के लिए अलग दवाई है। जिले में एमडीआर श्रेणी में 257 मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक एमडीआर श्रेणी के मरीजों का 11 माह से दो साल तक इलाज चलता है। वहीं सामान्य श्रेणी में टीबी का छह महीने का इलाज होता है।
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स्वास्थ्य विभाग जांच और दवा मरीजों को उपलब्ध करा रहा है। लोगों को टीबी के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। समय से इलाज कराएं और इलाज शुरू होने के बाद बीच में इलाज न छोड़े। इससे मरीज की परेशानी बढ़ जाती है।.....डॉ. बीएस रावत, जिला क्षय रोग अधिकारी