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20 हजार से अधिक पक्षियों को मिला आसरा

Sun, 02 Feb 2020 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Feb 2020 12:12 AM IST
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More than 20 thousand birds found shelter
बिजनौर में गंगा बैराज पर गंगा किनारे विदेशी पक्षी। - फोटो : BIJNOR
20 हजार से अधिक पक्षियों को मिला आसरा
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बिजनौर। गंगा बैराज पर पक्षियों के नजारे देखने के बारे में अब तक किसी ने सोचा नहीं था। अब सबको पता चला है कि बैराज पर प्रवासी पक्षियों का लंबा जमावड़ा है। गंगा बैराज पर तीन हजार एकड़ जमीन में हैदरपुर वैटलैंड बनाया गया है। इसे बनवाने में श्री श्री रविशंकर की आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े आशीष लोया की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
आशीष लोया को श्री श्री रविशंकर ने वेस्ट यूपी में संस्था का प्रचार करने की जिम्मेदारी दी। आशीष लोया जब बैराज से होकर आते जाते तो वहां पर पक्षियों के कलरव से आकर्षित होते। एक दिन गंगा किनारे पहुंचे तो देखा कि वहां बहुत रंग बिरंगे और सुंदर पक्षी हैं। किसी ने बताया कि बैराज पर सर्दियों में विदेशों से पक्षी आते हैं। उन्होंने पक्षियों के फोटो लेकर उसे गूगल पर सर्च किया तो पाया कि छोटी सी धारा में 20 से अधिक प्रजाति के प्रवासी पक्षी बैराज पर थे। उन्होंने 2016 में प्रवासी पक्षियों की प्रजाति की खोज की तो करीब 120 प्रजाति के प्रवासी पक्षी दिखे। वे देखकर हैरत में रह गए कि गंगा किनारे की जैव विविधता इतनी अलग है। गंगा किनारे करीब 120 प्रजाति भारतीय भी थीं। आशीष लोया ने पक्षियों के बारे में शासन व वन विभाग के अफसरों को बताया। उनसे कहा कि गंगा बैराज देश व प्रवासी पक्षियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। सहारनपुर मंडल के चीफ कंजरवेटर वीके जैन व सहारनपुर कमिश्नर संजय कुमार ने आशीष लोया की बात को गंभीरता से लिया। उनकी पहल पर गंगा बैराज के दूसरी ओर मुजफ्फरनगर सीमा में हैदरपुर वैटलैंड बनाई गई। यहां पर पक्षियों की सुंदरता से जनता को रूबरू बनाने की व्यवस्था की गई है। यहां पर वॉच टावर बनाए गए हैं। वैटलैंड से खरपतवार को कम किया जा रहा है। यहां पर दो और तीन फरवरी को बर्ड फेस्टिवल का आयोजन होगा।
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महत्वपूर्ण है हैदरपुर वैटलैंड
जैसे इंसानों के सफर के लिए हाईवे होता है वैसे ही पक्षियों के सफर के लिए हवाई क्षेत्र को फ्लाई वे कहा जाता है। विदेशों से भारत आने वाले पक्षियों के मार्ग को सेंट्रल एशियन फ्लाई वे कहा जाता है। हैदरपुर वैटलैंड में पक्षी आराम करते हैं। अगर यह नष्ट हो गया तो पक्षी या तो आ नहीं पाएंगे या जा नहीं पाएंगे। इससे हजारों पक्षी के जीवन के साथ साथ उनकी प्रजाति पर भी खतरा मंडरा सकता है।
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ये पक्षी आते हैं
हैदरपुर वैटलैंड में बार हैडेड गूज, पिंटेल, कूट्स, ग्रेलेग गूज, पोचर्डस, स्टोर्क, गल्स, इग्रेट, एबोसेट्स, सुर्खाब, स्पूनबिल, गॉडविट्स आदि सैकड़ों प्रजाति के सुंदर पक्षी दिखते हैं।
पक्षी हैं महत्वपूर्ण
पक्षी पर्यावरण के लिए हर तरीके से महत्वपूर्ण हैं। ये कीट पतंगों को खाते हैं। इससे खेती को बहुत फायदा मिलता है। पक्षी वृक्षों के फल खाकर मल से उनके बीज दूसरी जगहों पर बिखेरते हैं। यह कुदरती तौर पर पौधरोपण में सहयोग देते हैं।

पक्षियों की सुंदरता का लें आनंद
आशीष लोया के अनुसार देश में बहुत कम जगह ऐसी होंगी जहां हैदरपुर वैटलैंड के जैसे जैव विविधता देखने को मिले। इसका सभी को आनंद लेना चाहिए। पक्षियों की सुंदरता को देखने वाले इनके संरक्षण में खुद ही लग जाएंगे।

आशीष लोया।

आशीष लोया।- फोटो : BIJNOR

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