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Bijnor News: खिलेंद्र अपहरण कांड में कामिल को आजीवन कारावास
Tue, 21 Mar 2023 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 21 Mar 2023 12:41 AM IST
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मुजफ्फरनगर के ध्यानार्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमपी सिंह ने खिलेंद्र अपहरण कांड में दोषी पाते हुए कामिल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की धनराशि में से आधी धनराशि पीड़ित खिलेंद्र को दिए जाने के आदेश दिए हैं।
डीजीसी वरुण राजपूत के अनुसार धर्मवीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका छोटा भाई खिलेंद्र उर्फ सुरेंद्र 26 अक्तूबर 2010 की रात करीब साढ़े 10 बजे अपनी मोटरसाइकिल से पड़ोसी पीतम के साथ ट्यूबवेल चलाने गया था। एक घंटे बाद उसके पड़ोसी पीतम ने बताया कि तीन अज्ञात लोगों ने उसके भाई का अपहरण कर लिया है। 13 नवंबर 2010 को खिलेंद्र ने पुलिस को प्रार्थनापत्र दिया कि बदमाशों ने उसे नौ नवंबर को आंखों पर पट्टी बांधकर गांव गोपालपुर के पास छोड़ा था। उसने अपहरण के दौरान बदमाशों को पहचान लिया था।
जो दिलशाद, सहजाद निवासी मोहद्दीनपुर व कामिल गांव भोकरहेड़ी थाना भोपा, जिला मुजफ्फरनगर थे। कामिल के पिता ने उसके गांव में चार-पांच साल पहले कोल्हू चलाया था। इस मामले में दिलशाद, सहजाद को पहले ही अदालत सजा सुना चुकी है। कामिल फरार हो गया था। उसका विचारण होने के बाद सोमवार को उसे सजा सुनाई गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमपी सिंह ने खिलेंद्र अपहरण कांड में दोषी पाते हुए कामिल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की धनराशि में से आधी धनराशि पीड़ित खिलेंद्र को दिए जाने के आदेश दिए हैं।
डीजीसी वरुण राजपूत के अनुसार धर्मवीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका छोटा भाई खिलेंद्र उर्फ सुरेंद्र 26 अक्तूबर 2010 की रात करीब साढ़े 10 बजे अपनी मोटरसाइकिल से पड़ोसी पीतम के साथ ट्यूबवेल चलाने गया था। एक घंटे बाद उसके पड़ोसी पीतम ने बताया कि तीन अज्ञात लोगों ने उसके भाई का अपहरण कर लिया है। 13 नवंबर 2010 को खिलेंद्र ने पुलिस को प्रार्थनापत्र दिया कि बदमाशों ने उसे नौ नवंबर को आंखों पर पट्टी बांधकर गांव गोपालपुर के पास छोड़ा था। उसने अपहरण के दौरान बदमाशों को पहचान लिया था।
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जो दिलशाद, सहजाद निवासी मोहद्दीनपुर व कामिल गांव भोकरहेड़ी थाना भोपा, जिला मुजफ्फरनगर थे। कामिल के पिता ने उसके गांव में चार-पांच साल पहले कोल्हू चलाया था। इस मामले में दिलशाद, सहजाद को पहले ही अदालत सजा सुना चुकी है। कामिल फरार हो गया था। उसका विचारण होने के बाद सोमवार को उसे सजा सुनाई गई है।
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