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पीने लायक नहीं रहा हैंडपंपों का पानी
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पीने लायक नहीं रहा हैंडपंपों का पानी
बिजनौर। शुद्ध पानी का गिरता जलस्तर और प्रदूषित होता भूजल भविष्य की डरावनी तस्वीर बना रहा है। दरअसल भूजल का स्तर पिछले पंद्रह सालों में तीन गुना से ज्यादा घटा है। हैंडपंप फेल हो रहे हैं। जिन जगहों पर नल चल भी रहे हैं, उनका पानी पीने लायक नहीं बचा है। सौ फुट की गहराई तक भूजल प्रदूषित हो गया है।
शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसा बिजनौर पर्यावरण और पेयजल के लिहाज से अच्छा माना जाता है। धीरे-धीरे यह स्थिति बदल रही है। पिछले पंद्रह सालों में ही भूजल की तस्वीर बदल गई। हैंडपंपों से निकलने वाला पानी प्रदूषित हो गया है। वहीं लगातार नीचे भी खिसक रहा है। ऐसे में हैंडपंप फेल हो चले हैं। यूं तो जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जाना है। हालांकि इस योजना को धरातल पर आने में अभी सालों लग जाएंगे, तब तक लोगों को प्रदूषित पानी पीना होगा। करीब तीन सौ गांव में टंकी लगवाने की सिफारिश करते हुए प्रस्ताव भेजे गए हैं।
इन गांव में कैंसर से जूझ रहे लोग
छोइया किनारे बसे गांव हादरपुर, नवादा, सुंदरपुर, अगरी, अगरा, शाहपुर लाल, छोइया नंगली, मोमिनपुर, जलालपुर छोइया समेत दर्जनों गांव कैंसर से जूझ रहे हैं। पिछले आठ सालों से ग्रामीणों को कैंसर अपनी चपेट में ले रहा है, जिसका मुख्य कारण पानी बताया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक इन गांव में दो- चार साल में एक-दो मौतें हो ही रही हैं। वहीं दूसरी बीमारियों से भी इन गांव के लोग जूझ रहे हैं। स्कीन रोग, सांस, फेफड़ों की बीमारियां चपेट में ले रही हैं।
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छोइया किनारे बसे गांव की हालत सबसे बदतर
छोइन नदी के किनारे बसे गांव की हालत सबसे बदतर है। यूं तो इन गांव में 30 फुट की गहराई में ही पानी मिल जाता है, लेकिन पीने लायक नहीं है। लोगों ने पहले अपने हैंडपंप सौ फुट कराए, फिर 200 फुट बोरिंग कराए, बावजूद इसके पानी शुद्ध नहीं है। यह पानी कैंसर का कारण भी बन रहा है। पशुओं की प्रजनन क्षमता कम हो गई है।
पंचायतों में भेजी गई जांच किट
गांव का पानी प्रदूषित हो चुका है। हालांकि पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए सभी पंचायतों में जांच किट भेजी गई है, जिसका डाटा केंद्र सरकार की साइट पर अपलोड किया जाएगा। जिन गांव में सबसे ज्यादा पानी खराब है, वहां पर जल जीवन मिशन के तहत सबसे पहले टंकी का निर्माण कराए जाने की कवायद चल रही है।
पेयजल की शुद्धता की जांच के लिए गांव-गांव किट भेजी गई है। जिन गांव में प्रदूषित पानी होगा, वहां सबसे पहले जल जीवन मिशन के तहत टंकी बनाई जानी हैं। 159 परियोजनाओं के प्रस्ताव भेज भी दिए गए हैं।
- भारत सिंह, अधिशासी अभियंता, जलनिगम
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बिजनौर। शुद्ध पानी का गिरता जलस्तर और प्रदूषित होता भूजल भविष्य की डरावनी तस्वीर बना रहा है। दरअसल भूजल का स्तर पिछले पंद्रह सालों में तीन गुना से ज्यादा घटा है। हैंडपंप फेल हो रहे हैं। जिन जगहों पर नल चल भी रहे हैं, उनका पानी पीने लायक नहीं बचा है। सौ फुट की गहराई तक भूजल प्रदूषित हो गया है।
शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसा बिजनौर पर्यावरण और पेयजल के लिहाज से अच्छा माना जाता है। धीरे-धीरे यह स्थिति बदल रही है। पिछले पंद्रह सालों में ही भूजल की तस्वीर बदल गई। हैंडपंपों से निकलने वाला पानी प्रदूषित हो गया है। वहीं लगातार नीचे भी खिसक रहा है। ऐसे में हैंडपंप फेल हो चले हैं। यूं तो जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जाना है। हालांकि इस योजना को धरातल पर आने में अभी सालों लग जाएंगे, तब तक लोगों को प्रदूषित पानी पीना होगा। करीब तीन सौ गांव में टंकी लगवाने की सिफारिश करते हुए प्रस्ताव भेजे गए हैं।
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इन गांव में कैंसर से जूझ रहे लोग
छोइया किनारे बसे गांव हादरपुर, नवादा, सुंदरपुर, अगरी, अगरा, शाहपुर लाल, छोइया नंगली, मोमिनपुर, जलालपुर छोइया समेत दर्जनों गांव कैंसर से जूझ रहे हैं। पिछले आठ सालों से ग्रामीणों को कैंसर अपनी चपेट में ले रहा है, जिसका मुख्य कारण पानी बताया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक इन गांव में दो- चार साल में एक-दो मौतें हो ही रही हैं। वहीं दूसरी बीमारियों से भी इन गांव के लोग जूझ रहे हैं। स्कीन रोग, सांस, फेफड़ों की बीमारियां चपेट में ले रही हैं।
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छोइया किनारे बसे गांव की हालत सबसे बदतर
छोइन नदी के किनारे बसे गांव की हालत सबसे बदतर है। यूं तो इन गांव में 30 फुट की गहराई में ही पानी मिल जाता है, लेकिन पीने लायक नहीं है। लोगों ने पहले अपने हैंडपंप सौ फुट कराए, फिर 200 फुट बोरिंग कराए, बावजूद इसके पानी शुद्ध नहीं है। यह पानी कैंसर का कारण भी बन रहा है। पशुओं की प्रजनन क्षमता कम हो गई है।
पंचायतों में भेजी गई जांच किट
गांव का पानी प्रदूषित हो चुका है। हालांकि पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए सभी पंचायतों में जांच किट भेजी गई है, जिसका डाटा केंद्र सरकार की साइट पर अपलोड किया जाएगा। जिन गांव में सबसे ज्यादा पानी खराब है, वहां पर जल जीवन मिशन के तहत सबसे पहले टंकी का निर्माण कराए जाने की कवायद चल रही है।
पेयजल की शुद्धता की जांच के लिए गांव-गांव किट भेजी गई है। जिन गांव में प्रदूषित पानी होगा, वहां सबसे पहले जल जीवन मिशन के तहत टंकी बनाई जानी हैं। 159 परियोजनाओं के प्रस्ताव भेज भी दिए गए हैं।
- भारत सिंह, अधिशासी अभियंता, जलनिगम