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गांधी जी के आदेश पर शुरू की निशुल्क चिकित्सा

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 12:03 AM IST
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रिपुदमन राजवंशी।
रिपुदमन राजवंशी। - फोटो : BIJNOR

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गांधी जी के आदेश पर शुरू की निशुल्क चिकित्सा
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बरुकी। महात्मा गांधी के पद चिन्हों पर चलते हुए आज भी अनेकों लोग गांधीवाद की मशाल जलाए हुए हैं। गांव बेगमपुर शादी निवासी रिपुदमन राजवंशी ने गांधीवादी विचारधारा को अपने जीवन में उतारा और पूरा जीवन दूसरों की सेवा में बिता रहे हैं। उनके पिता काशीनाथ गुप्ता ने गांधी जी के कहने पर लोगाें की निशुल्क चिकित्सा शुरू की थी।
विकास क्षेत्र किरतपुर के ग्राम बेगमपुर शादी उर्फ रामपुर निवासी रिपुदमन राजवंशी गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित रहे। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर गांव में बसने का निर्णय लिया और एक विद्यालय की स्थापना की। इसके अतिरिक्त वे सामाजिक कार्य से जुड़े हुए हैं। रिपुदमन राजवंशी का जन्म ग्राम बेगमपुर शादी उर्फ रामपुर में हुआ था। उनके पिता काशीनाथ गुप्ता रामपुर के जमीदार परिवार से थे और दिल्ली स्थित दिव्या कॉलेज में पढ़ते थे। रिपुदमन राजवंशी बताते हैं कि उनके पिता वैद्यक की शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उस समय सन 1924 में महात्मा गांधी का दिल्ली आगमन हुआ। गांधी जी के रात्रि विश्राम की व्यवस्था दिव्या कॉलेज के हॉस्टल में की गई थी। काशीनाथ गुप्ता ने गांधीजी की सेवा की। गांधी जी ने काशीनाथ गुप्ता से वचन लिया कि वे चिकित्सा के क्षेत्र में जाएं, लेकिन जनता की निशुल्क सेवा करें। इसके बाद से काशीनाथ गुप्ता ने कभी भी किसी मरीज से पैसा नहीं लिया।

रिपुदमन राजवंशी ने सन 1961 में बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उनका चयन सेना में सेकेंड लेफ्टिनेंट के तौर पर हो गया। लेकिन पिताजी की बीमारी के कारण तथा गांव में जमीन की देखरेख के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी। उन्होंने खेती को अपना व्यवसाय बनाया और वैज्ञानिक खेती शुरू की। 1970 में गांव में जूनियर हाई स्कूल शुरू किया। 1978 में उन्होंने गांव में राजकीय हाईस्कूल के लिए 30 बीघा भूमि दान दी। जब सरकारी विद्यालय मंजूर हो गया तब उन्होंने अपनी जमीन में बने मकान में विद्यालय का संचालन शुरू कराया।
शास्त्री जी के कहने पर एक साल तक रखा उपवास
रिपुदमन राजवंशी बताते हैं कि देश में जब खाद्यान्न का संकट था और लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने देश के लोगों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी। उन्होंने शास्त्री जी की अपील को माना और कई वर्षों तक सप्ताह में एक दिन उपवास रखते रहे। उनके भाई डॉ. विजय सिंह राजवंशी जो कानपुर मेडिकल कॉलेज से प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए और उत्तम सिंह राजवंशी जो सिंचाई विभाग के इंजीनियर इन चीफ पद से रिटायर हुए। उनके बुलाने के बावजूद उन्होंने गांव नहीं छोड़ा और गांव में सामाजिक कार्य करते रहे।

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