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किसानों का रूख जैविक खेती की ओर रहा बढ़
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अफजलगढ़ के गांव प्रेमपुरी में खड़ी काले धान की फसल को देखते किसान अमरीक सिंह।
- फोटो : BIJNOR
अफजलगढ़। जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। कुछ किसान काले धान और काले गेहूं की खेती कर रहे हैं। इनके दाम अधिक हैं, साथ ही मधुमेह रोग में यह कारगर बताई जा रही है।
प्रेमपुरी निवासी किसान अमरीक सिंह ने बताया कि काला धान में चावल काला और जामुनी रंग का होता है। यह शुगर फ्री होता है। सामान्य धान के आकार का ही होता है। इनके गुणों की जानकारी होने पर बाजार में काले धान और गेहूं की मांग बढ़ने लगी है, जिसके चलते प्रेमपुरी और भोगपुर के कई किसान काले धान और काले गेहूं की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसकी प्रेरणा उन्हें द्वारिकेश शुगर मिल के अधिकारी एसपी सिंह की ओर से मिली, उन्होंने उन्हें काले धान और काले गेहूं के बारे में बताया। कृषि अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक केके सिंह ने बताया कि काला धान आसाम की साधारण किस्म है। फसल यहां सफल नहीं हो पाती है। इस धान का चावल भी यहां के आम चावलों जैसा ही है।
पैदावार कम, लेकिन भाव ज्यादा
काले धान की पैदावार सामान्य धान के मुकाबले कम है। काले धान की पैदावार करीब दो क्विंटल बीघा ही मिल पाती है, लेकिन काले धान का बाजार मूल्य करीब 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल है। जाती है। 20 जून से पांच जुलाई के बीच इसकी बुवाई का उचित समय है। काले धान और गेहूं का बीज कई कंपनियां बेच रही है। पंजाब के मोहाली से भी किसान इसका बीज प्राप्त कर सकते हैं।
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सह फसली खेती भी कर रहे किसान
किसान अमरीक सिंह काले धान व गेहूं की खेती के अलावा भी गन्ने के साथ अदरक, हल्दी, गोभी, अरबी आदि की जैविक खेती भी कर रहे हैं। जैविक खेती में उन्हें प्रदेश में दूसरा स्थान और मंडल व जिले में पहला स्थान प्राप्त हुआ है।
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प्रेमपुरी निवासी किसान अमरीक सिंह ने बताया कि काला धान में चावल काला और जामुनी रंग का होता है। यह शुगर फ्री होता है। सामान्य धान के आकार का ही होता है। इनके गुणों की जानकारी होने पर बाजार में काले धान और गेहूं की मांग बढ़ने लगी है, जिसके चलते प्रेमपुरी और भोगपुर के कई किसान काले धान और काले गेहूं की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसकी प्रेरणा उन्हें द्वारिकेश शुगर मिल के अधिकारी एसपी सिंह की ओर से मिली, उन्होंने उन्हें काले धान और काले गेहूं के बारे में बताया। कृषि अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक केके सिंह ने बताया कि काला धान आसाम की साधारण किस्म है। फसल यहां सफल नहीं हो पाती है। इस धान का चावल भी यहां के आम चावलों जैसा ही है।
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पैदावार कम, लेकिन भाव ज्यादा
काले धान की पैदावार सामान्य धान के मुकाबले कम है। काले धान की पैदावार करीब दो क्विंटल बीघा ही मिल पाती है, लेकिन काले धान का बाजार मूल्य करीब 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल है। जाती है। 20 जून से पांच जुलाई के बीच इसकी बुवाई का उचित समय है। काले धान और गेहूं का बीज कई कंपनियां बेच रही है। पंजाब के मोहाली से भी किसान इसका बीज प्राप्त कर सकते हैं।
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सह फसली खेती भी कर रहे किसान
किसान अमरीक सिंह काले धान व गेहूं की खेती के अलावा भी गन्ने के साथ अदरक, हल्दी, गोभी, अरबी आदि की जैविक खेती भी कर रहे हैं। जैविक खेती में उन्हें प्रदेश में दूसरा स्थान और मंडल व जिले में पहला स्थान प्राप्त हुआ है।