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बॉम्बे हाईकोर्ट: अदालत का आदेश- सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध, उत्सवों में डीजे-लेजर लाइट अनुचित

Wed, 23 Sep 2026 10:08 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 23 Sep 2026 10:08 AM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। अदालत ने उत्सवों के दौरान डीजे और लेजर लाइट को भी अनुचित करार दिया। दो जजों की खंडपीठ ने फैसले में औंर किन बिंदुओं को रेखांकित किया?

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Bombay High Court order Justices Kulkarni and Gokhale firecrackers on roads ban DJs laser lights inappropriate
बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

त्योहारों के दौरान होने वाले भारी ध्वनि और वायु प्रदूषण पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। गणेश उत्सव के दौरान आए इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक जुलूसों और आयोजनों में लाउडस्पीकर, डीजे और लेजर बीम का इस्तेमाल पूरी तरह से अनुचित है।

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पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती

अदालत ने कहा कि मुंबई जैसे शहर में सार्वजनिक सड़कों पर दिन हो या रात, किसी भी स्थिति में पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह न केवल खतरनाक है, बल्कि इससे शहर में जहरीला प्रदूषण और धुंध फैलाती है, जो अब शुरू हो चुकी है।

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दो जजों की खंडपीठ ने आदेश में क्या कुछ कहा?

न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने टिप्पणी की, क्या इन सभी लाउडस्पीकरों और पटाखों का उपयोग करने से हमें भगवान का अतिरिक्त आशीर्वाद मिल जाएगा? एक जिम्मेदार समाज के रूप में हमें यह सब बंद करना चाहिए।' कोर्ट ने पंढरपुर की 'वारी' यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि वह कितनी शांति से बिना किसी लाउडस्पीकर या शोर के निकाली जाती है।

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सरकार भारी सुरक्षा राशि जमा करवाए

महाराष्ट्र सरकार द्वारा यह बताए जाने पर कि पुलिस ने पहले ही प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं, कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये आदेश केवल कागजों पर अच्छे हैं, जबकि हकीकत में नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। अदालत ने सुझाव दिया कि पंडालों या जुलूसों की अनुमति मांगते समय सरकार को भारी सुरक्षा राशि जमा करवानी चाहिए।

उत्सव में नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं

अदालत ने कहा, यदि नियमों का उल्लंघन होता है, तो इस राशि को जब्त कर लिया जाए, जिससे उल्लंघनकर्ताओं में डर पैदा हो। पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी त्योहार या जश्न के खिलाफ नहीं है, लेकिन उत्सव नियमों के उल्लंघन और नागरिकों की सेहत या जान की कीमत पर नहीं हो सकते। धार्मिक भावनाओं और जनसुरक्षा के बीच संतुलन होना बेहद जरूरी है।

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