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Bijnor News: ग्रामीणों ने बनाया हौसले का तटबंध, रोकेगा गंगा की जलधारा

Wed, 23 Sep 2026 02:13 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 02:13 AM IST
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The villagers built a dam of courage to stop the flow of the Ganges.
जलीलपुर क्षेत्र में श्रमदान कर गंगा पर बालू बोरे का बंधा बनाते गांववासी फोटो स्रोत ग्रामीण - फोटो : Videograb
जलीलपुर (बिजनौर)। सिस्टम में सुनवाई नहीं हुई तो हर साल बाढ़ का दंश झेलने वाले गांव रायपुर खादर के ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने गंगा की धारा रोकने के लिए श्रमदान कर करीब 60 मीटर लंबा और चार फीट ऊंचा तटबंध तैयार कर लिया। इसे बनाने में मिट्टी से भरे कट्टों का इस्तेमाल किया गया है। मंगलवार को छोइया नदी के पानी को रोकने के लिए दूसरे तटबंध को बनाने में जुट गए हैं। आसपास के गांवों के ग्रामीण भी इस काम में सहयोग कर रहे हैं।
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बीते शनिवार को रायपुर खादर के ग्रामीणों ने गंगा से गांव की ओर आने वाली जलधारा को रोकने के लिए श्रमदान से छोटा तटबंध बनाने का काम शुरू किया था। उन्होंने लगातार मेहनत कर मिट्टी से भरे कट्टे लगाकर तटबंध बना दिया। उनके साथ जलालपुर खादर के लोग भी श्रमदान में सहयोग कर रहे हैं। मीरापुर सीकरी के ग्रामीणों ने खाली कट्टों समेत अन्य सामान उपलब्ध कराकर सहयोग किया। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ और जलभराव से लंबे समय से परेशानी बनी हुई है। वे वर्षों से गंगा पर तटबंध बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इसलिए अब वे अपने स्तर से गंगा की धारा को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
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दो महीने से रास्तों और जंगल में भरा है पानी
ग्रामीण बरन सिंह, शेर सिंह, नरोत्तम सिंह, उदल सिंह, प्रधान कृष्ण देव सिंह और पूर्व प्रधान करतार सिंह आदि ने बताया कि करीब दो महीने से गंगा की ओर जाने वाले रास्तों और जंगल में पानी भरा हुआ है। जलभराव के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। खेतों में भी पानी भरा होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ी हुईं हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण उन्होंने खुद श्रमदान करने का निर्णय लिया। ग्रामीण दिन-रात मेहनत कर जलधाराओं को रोकने के लिए मिनी तटबंधों का निर्माण कर रहे हैं।
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गंगा की बाढ़ से 30 गांवों की फसलें होती हैं प्रभावित
खादर क्षेत्र में बरसात के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही बाढ़ के हालात बन जाते हैं। बाढ़ का पानी करीब 30 गांवों के सैकड़ों किसानों की फसलों में पहुंच जाता है। इसके अलावा करीब एक दर्जन गांवों की आबादी भी प्रभावित होती है। रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी की आबादी में इस वर्ष चार बार बाढ़ का पानी घुस चुका है।
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वर्षों से तटबंध निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीण
बाढ़ प्रभावित रायपुर खादर, जलालपुर खादर, मीरापुर, सलेमपुर, जमालुद्दीनपुर खादर, दत्तियाना, मुजफ्फरपुर खादर, सियाली, सुजातपुर खादर और नारनौर समेत अन्य गांवों के ग्रामीण कई वर्षों से गंगा पर तटबंध निर्माण की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध बनने से हर वर्ष आने वाली बाढ़ और जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से उन्हें हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है।
गंगा तक नहीं पहुंच पाए थे अधिकारी
शुक्रवार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों की टीम बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंची थी। बहसूमा-ठाकुरद्वारा स्टेट हाईवे पर बने पुल और आगे के रास्ते पर पानी नहीं होने के कारण अधिकारी वहां तक तो पहुंच गए लेकिन रायपुर खादर के निकट गंगा की ओर जाने वाले रास्ते पर जलभराव के कारण आगे नहीं जा सके थे। ग्रामीणों के अनुसार, इससे उन्हें लगा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण अधूरा रह गया। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर गांव की ओर आने वाली जलधाराओं को रोकने का निर्णय लिया और मिनी तटबंधों का निर्माण शुरू कर दिया।

ग्रामीणों के श्रमदान करने का मामला संज्ञान में आया है। संबंधित विभाग के अधिकारियों को मौका स्थिति देखने के लिए कहा गया है। - प्रशांत वर्मा, एसडीएम, चांदपुर।
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