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Bijnor News: चीनी मिल में दो वर्ष से एथेनॉल उत्पादन ठप
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नजीबाबाद। किसान सहकारी चीनी मिल नजीबाबाद की आसवनी इकाई का मार्च 2024 से एथेनॉल का उत्पादन ठप है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्तूबर 2017 को किसान सहकारी चीनी मिल के आसवनी इकाई का शुभारंभ किया था। उद्घाटन अवसर पर चीनी मिल परिसर से मुख्यमंत्री ने नजीबाबाद चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने की भी घोषणा की थी। करीब 56 करोड़ रुपये की लागत से 40 हजार लीटर एथेनॉल प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के आसवनी इकाई का संचालन शुरुआती दौर से प्राइवेट कंपनी के हाथों में दिया गया। उद्घाटन के बाद दिल्ली की ईजेक कंपनी ने काफी समय तक इकाई का संचालन किया। आर्थिक चुनौतियों के चलते कोरोना के बाद कंपनी इकाई का संचालन छोड़ गई।
वर्ष 2021 से 24 तक सिसोदिया रिसर्च लेबोरेटरी लखनऊ के हाथों में चीनी मिल के आसवनी प्लांट की बागडोर रही। बी हैवी शीरा उत्पाद पर अधिक खर्च आने और एथेनॉल तैयार होने तक उसके उत्पादन में अधिक खर्च के चलते से आसवनी इकाई पर आर्थिक संकट के बदले छाने लगे।
एथेनॉल उत्पादन पर अधिक खर्च आने और बाजार मूल्य कम होने से आसवनी इकाई संचालन प्राइवेट कंपनी के लिए चुनौती बन गया। इकाई में कार्यरत श्रमिकों को समय पर पारिश्रमिक का भुगतान न होने से हड़ताल आदि की नौबत पहुंची। प्राइवेट कंपनी को आसवनी इकाई के संचालन से पीछे हटना पड़ा।
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नेशनल फेडरेशन आसवनी इकाई को फिर से संचालित कराने में जुटी
नजीबाबाद। चीनी मिल का आसवनी इकाई बंद होने, शीरा उत्पादन और तैयार एथेनॉल उत्पादन पर अधिक लागत आने, उत्पाद के बाजार मूल्य सहित अन्य कारणों की नेशनल फेडरेशन द्वारा जांच की जा रही है। फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल ने फरवरी में आसवनी इकाई पहुंचा था। राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ द्वारा आसवनी इकाई को किस तरह फिर से शुरू किया जाए, जिससे एथेनॉल उत्पादन फिर से शुरू हो सके, इस संबंध में अध्ययन किया जा रहा है। चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक महिपाल सिंह ने कहा कि शर्करा निदेशालय आसवनी इकाई के बंद होने और उसके पुन: संचालन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर अध्ययन कर रहा है। निदेशालय एवं शासन स्तर पर ही संबंधित मामले में फैसला लिया जाना है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्तूबर 2017 को किसान सहकारी चीनी मिल के आसवनी इकाई का शुभारंभ किया था। उद्घाटन अवसर पर चीनी मिल परिसर से मुख्यमंत्री ने नजीबाबाद चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने की भी घोषणा की थी। करीब 56 करोड़ रुपये की लागत से 40 हजार लीटर एथेनॉल प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के आसवनी इकाई का संचालन शुरुआती दौर से प्राइवेट कंपनी के हाथों में दिया गया। उद्घाटन के बाद दिल्ली की ईजेक कंपनी ने काफी समय तक इकाई का संचालन किया। आर्थिक चुनौतियों के चलते कोरोना के बाद कंपनी इकाई का संचालन छोड़ गई।
वर्ष 2021 से 24 तक सिसोदिया रिसर्च लेबोरेटरी लखनऊ के हाथों में चीनी मिल के आसवनी प्लांट की बागडोर रही। बी हैवी शीरा उत्पाद पर अधिक खर्च आने और एथेनॉल तैयार होने तक उसके उत्पादन में अधिक खर्च के चलते से आसवनी इकाई पर आर्थिक संकट के बदले छाने लगे।
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एथेनॉल उत्पादन पर अधिक खर्च आने और बाजार मूल्य कम होने से आसवनी इकाई संचालन प्राइवेट कंपनी के लिए चुनौती बन गया। इकाई में कार्यरत श्रमिकों को समय पर पारिश्रमिक का भुगतान न होने से हड़ताल आदि की नौबत पहुंची। प्राइवेट कंपनी को आसवनी इकाई के संचालन से पीछे हटना पड़ा।
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नेशनल फेडरेशन आसवनी इकाई को फिर से संचालित कराने में जुटी
नजीबाबाद। चीनी मिल का आसवनी इकाई बंद होने, शीरा उत्पादन और तैयार एथेनॉल उत्पादन पर अधिक लागत आने, उत्पाद के बाजार मूल्य सहित अन्य कारणों की नेशनल फेडरेशन द्वारा जांच की जा रही है। फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल ने फरवरी में आसवनी इकाई पहुंचा था। राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ द्वारा आसवनी इकाई को किस तरह फिर से शुरू किया जाए, जिससे एथेनॉल उत्पादन फिर से शुरू हो सके, इस संबंध में अध्ययन किया जा रहा है। चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक महिपाल सिंह ने कहा कि शर्करा निदेशालय आसवनी इकाई के बंद होने और उसके पुन: संचालन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर अध्ययन कर रहा है। निदेशालय एवं शासन स्तर पर ही संबंधित मामले में फैसला लिया जाना है।