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खाली टैंक, सूखी पाइप लाइन, सालों से नहीं आया पानी
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अफजलगढ़ की डूडा कालोनी में शो पीस बनी पानी की टंकी।
- फोटो : BIJNOR
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खाली टैंक, सूखी पाइप लाइन, सालों से नहीं आया पानी
बिजनौर। ओवर हैड टैंक खाली हैं, पाइप लाइन सूखी हैं और सालों से नीर का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। दरअसल, जिले में 22 पाइप लाइन पेयजल योजनाएं एक दशक बीतने के बाद भी पूरी नहीं हुई हैं। कहीं टैंक का निर्माण अधूरा है तो कहीं पाइप लाइन नहीं बनीं। कहीं निर्माण पूरा होने के बाद भी जल आपूर्ति नहीं की जा सकी। इनमें 16 परियोजनाएं अकेले स्वजल धारा योजना की हैं, जो एक दशक पहले आई थीं। इनमें एक भी पूरी नहीं हो सकी। यह केंद्र सरकार की योजना थी। इनसे जल निगम का भी कोई नाता नहीं रहा। उधर जल निगम की भी छह परियोजनाएं बंद पड़ी हैं।
अफजलगढ़ की डूडा कॉलोनी में ओवरहैड टैंक का निर्माण कराया गया था। एक दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद इसमें कभी पानी नहीं भरा गया। अब यह ओवरहैड टैंक क्षतिग्रस्त हो रहा है, जो कभी भी गिर सकता है। लोगों को इंडिया मार्का हैंडपंप से या आसपास की कॉलोनी में लगे नलों से पानी लाना पड़ता है। नसीरी गांव में करीब 12 साल पहले ओवर हैड टैंक का निर्माण हुआ। पाइप लाइन बिछाई गई, लेकिन घर-घर तक पानी नहीं पहुंच पाया। तब से लेकर अब तक यह ओवर हैड टैंक सूखा पड़ा है। गांव की बात तो छोड़िए चांदपुर शहर में तीन ओवर हैड टैंक का निर्माण पूरा हुए पांच साल बीत गए हैं, लेकिन आज तक इन्हें चालू नहीं किया गया। नगर पालिका परिसर, मोहल्ला पतियापाड़ा और बास्टा मार्ग पर 2017 में निर्माण पूरा हो चुका था।
12 साल पहले हो चुकी है मियाद पूरी
नजीबाबाद के मंडावली में 42 साल पहले ओवर हैड टैंक बनाया गया था। जिसकी मियाद तीस साल थी। अब 12 साल पहले मियाद खत्म हो चुकी है। जर्जर होने की वजह से इसका उपयोग बंद कर दिया गया है। जिस वजह से ग्रामीणों को पाइप लाइन से पानी नहीं मिल रहा।
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तेज हवा में डोल जाता है टैंक
नांगलसोती के गांव कामराजपुर में 12 साल पहले ओवरहैड टैंक बनाया गया। लेकिन अभी तक पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हुई। इतना ही नहीं तेज हवा में इसे गांव वालों ने हिलते हुए देखा है। ग्राम प्रधान तसलीमा ने बताया कि आबादी के बीच बने इस टैंक से खतरा है, कई बार इसे गिराने के लिए मांग की गई।
जल निगम की छह से सात परियोजनाएं बंद हैं। इन्हें जल जीवन मिशन के तहत चालू किया जाएगा। हालांकि स्वजल धारा की करीब 16 परियोजनाएं अधूरी हैं, जिनका जल निगम से कोई ताल्लुक नहीं है। पाइप लाइन से पेयजल की आपूर्ति के लिए जल जीवन मिशन के तहत जिले में 412 परियोजनाओं के प्रोजेक्ट तैयार कर लिए गए हैं। जिन पर 700 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके अलावा 20 से 25 गांव में सर्वे भी चल रहा है-भरत सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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बिजनौर। ओवर हैड टैंक खाली हैं, पाइप लाइन सूखी हैं और सालों से नीर का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। दरअसल, जिले में 22 पाइप लाइन पेयजल योजनाएं एक दशक बीतने के बाद भी पूरी नहीं हुई हैं। कहीं टैंक का निर्माण अधूरा है तो कहीं पाइप लाइन नहीं बनीं। कहीं निर्माण पूरा होने के बाद भी जल आपूर्ति नहीं की जा सकी। इनमें 16 परियोजनाएं अकेले स्वजल धारा योजना की हैं, जो एक दशक पहले आई थीं। इनमें एक भी पूरी नहीं हो सकी। यह केंद्र सरकार की योजना थी। इनसे जल निगम का भी कोई नाता नहीं रहा। उधर जल निगम की भी छह परियोजनाएं बंद पड़ी हैं।
अफजलगढ़ की डूडा कॉलोनी में ओवरहैड टैंक का निर्माण कराया गया था। एक दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद इसमें कभी पानी नहीं भरा गया। अब यह ओवरहैड टैंक क्षतिग्रस्त हो रहा है, जो कभी भी गिर सकता है। लोगों को इंडिया मार्का हैंडपंप से या आसपास की कॉलोनी में लगे नलों से पानी लाना पड़ता है। नसीरी गांव में करीब 12 साल पहले ओवर हैड टैंक का निर्माण हुआ। पाइप लाइन बिछाई गई, लेकिन घर-घर तक पानी नहीं पहुंच पाया। तब से लेकर अब तक यह ओवर हैड टैंक सूखा पड़ा है। गांव की बात तो छोड़िए चांदपुर शहर में तीन ओवर हैड टैंक का निर्माण पूरा हुए पांच साल बीत गए हैं, लेकिन आज तक इन्हें चालू नहीं किया गया। नगर पालिका परिसर, मोहल्ला पतियापाड़ा और बास्टा मार्ग पर 2017 में निर्माण पूरा हो चुका था।
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12 साल पहले हो चुकी है मियाद पूरी
नजीबाबाद के मंडावली में 42 साल पहले ओवर हैड टैंक बनाया गया था। जिसकी मियाद तीस साल थी। अब 12 साल पहले मियाद खत्म हो चुकी है। जर्जर होने की वजह से इसका उपयोग बंद कर दिया गया है। जिस वजह से ग्रामीणों को पाइप लाइन से पानी नहीं मिल रहा।
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तेज हवा में डोल जाता है टैंक
नांगलसोती के गांव कामराजपुर में 12 साल पहले ओवरहैड टैंक बनाया गया। लेकिन अभी तक पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हुई। इतना ही नहीं तेज हवा में इसे गांव वालों ने हिलते हुए देखा है। ग्राम प्रधान तसलीमा ने बताया कि आबादी के बीच बने इस टैंक से खतरा है, कई बार इसे गिराने के लिए मांग की गई।
जल निगम की छह से सात परियोजनाएं बंद हैं। इन्हें जल जीवन मिशन के तहत चालू किया जाएगा। हालांकि स्वजल धारा की करीब 16 परियोजनाएं अधूरी हैं, जिनका जल निगम से कोई ताल्लुक नहीं है। पाइप लाइन से पेयजल की आपूर्ति के लिए जल जीवन मिशन के तहत जिले में 412 परियोजनाओं के प्रोजेक्ट तैयार कर लिए गए हैं। जिन पर 700 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके अलावा 20 से 25 गांव में सर्वे भी चल रहा है-भरत सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम