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तटबंध परियोजना को शासन से नहीं मिली मंजूरी
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मंडावर में खादर क्षेत्र में गंगा से होता कटान।
- फोटो : BIJNOR
तटबंध परियोजना को शासन से नहीं मिली मंजूरी
बिजनौर। गंगा किनारे बसे खादर क्षेत्र में भूमि कटान रोकने के लिए तटबंध परियोजना से आस लगाए बैठे लोगों के हाथ मायूसी लगी है। कटान रोकने के लिए तटबंध निर्माण को लेकर बनाई गई करीब 61 करोड़ की परियोजना को शासन ने मंजूरी नहीं दी। शासन स्तर पर यह फाइल करीब एक साल से अटकी हुई थी।
हर साल बरसात के सीजन में गंगा की धारा तबाही मचाती है। जबरदस्त कटान होता है, जिससे खादर क्षेत्र के गांवों में रहने वालों को दूसरे गांवों में बसना पड़ता है। वहीं, जो परिवार गंगा की चपेट में आने से बच गए, अब वह हर साल कटान के चलते गंगा के नजदीक आते जा रहे हैं। गांव वालों का दावा है कि कटान से उनकी करीब दो लाख बीघा जमीन बह चुकी है। इस जमीन का कोई मुआवजा भी नहीं मिला। गांव वालों ने एक महीने से ज्यादा समय तक आंदोलन किया था। महिलाओं व बच्चों सहित गंगा की धारा में खड़े होकर धरना दिया था। ग्रामीणों का कहना था कि गंगा की धारा पांच किलोमीटर चौड़ी हो गई है। धारा के बीच में खाली जमीन पर खेती कर रहे हैं। जमीन के लिए उनका दूसरे जिले के किसानों से विवाद भी रहने लगा है। कटान से निजात दिलाने को परियोजना काफी पहले बन चुकी है। परियोजना में 61 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। परियोजना को उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों से मंजूरी मिल चुकी है। गत 23 अक्तूबर को इस परियोजना को लेकर लखनऊ में आला अफसरों की बैठक हुई। सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि परियोजना को शासन से मंजूरी नहीं मिली है। इसे अस्वीकृत कर दिया गया है।
- ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मानवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं।
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- सपा सरकार में बनी फाइल अब तक लटक रही
तटबंध बनाने की परियोजना सपा सरकार में बनाकर भेजी गई थी। तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने खादर में एक सभा में तटबंध बनाने का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब शासन ने तटबंध के महत्व के लिए फिर से सर्वे करने को कहा। पता लगाने को कहा कि गंगा की धारा कहीं गांवों से दूर तो नहीं पहुंच गई थी। सर्वे करके दोबारा फाइल भेज दी गई थी।
- एक साल बाद फिर से योजना अस्वीकृत
फाइल की मंजूरी पर अंतिम मोहर मुख्यमंत्री कार्यालय से लगती है। मुख्यमंत्री कार्यालय में पिछले साल नवंबर में यह परियोजना भेजी गई थी। इस साल के अंत में यह परियोजना अस्वीकृत हुई है।
- होगा पहले से बड़ा आंदोलन
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि अधिकारियों ने जिले के किसानों से तटबंध बनवाने के लिए झूठे वादे किए थे। तटबंध बनने से ही खादर में खेती और किसान बचे रह सकते हैं। तटबंध बनवाने की मांग को लेकर भाकियू पहले से बड़ा आंदोलन करेगा।
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बिजनौर। गंगा किनारे बसे खादर क्षेत्र में भूमि कटान रोकने के लिए तटबंध परियोजना से आस लगाए बैठे लोगों के हाथ मायूसी लगी है। कटान रोकने के लिए तटबंध निर्माण को लेकर बनाई गई करीब 61 करोड़ की परियोजना को शासन ने मंजूरी नहीं दी। शासन स्तर पर यह फाइल करीब एक साल से अटकी हुई थी।
हर साल बरसात के सीजन में गंगा की धारा तबाही मचाती है। जबरदस्त कटान होता है, जिससे खादर क्षेत्र के गांवों में रहने वालों को दूसरे गांवों में बसना पड़ता है। वहीं, जो परिवार गंगा की चपेट में आने से बच गए, अब वह हर साल कटान के चलते गंगा के नजदीक आते जा रहे हैं। गांव वालों का दावा है कि कटान से उनकी करीब दो लाख बीघा जमीन बह चुकी है। इस जमीन का कोई मुआवजा भी नहीं मिला। गांव वालों ने एक महीने से ज्यादा समय तक आंदोलन किया था। महिलाओं व बच्चों सहित गंगा की धारा में खड़े होकर धरना दिया था। ग्रामीणों का कहना था कि गंगा की धारा पांच किलोमीटर चौड़ी हो गई है। धारा के बीच में खाली जमीन पर खेती कर रहे हैं। जमीन के लिए उनका दूसरे जिले के किसानों से विवाद भी रहने लगा है। कटान से निजात दिलाने को परियोजना काफी पहले बन चुकी है। परियोजना में 61 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। परियोजना को उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों से मंजूरी मिल चुकी है। गत 23 अक्तूबर को इस परियोजना को लेकर लखनऊ में आला अफसरों की बैठक हुई। सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि परियोजना को शासन से मंजूरी नहीं मिली है। इसे अस्वीकृत कर दिया गया है।
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- ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मानवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं।
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- सपा सरकार में बनी फाइल अब तक लटक रही
तटबंध बनाने की परियोजना सपा सरकार में बनाकर भेजी गई थी। तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने खादर में एक सभा में तटबंध बनाने का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब शासन ने तटबंध के महत्व के लिए फिर से सर्वे करने को कहा। पता लगाने को कहा कि गंगा की धारा कहीं गांवों से दूर तो नहीं पहुंच गई थी। सर्वे करके दोबारा फाइल भेज दी गई थी।
- एक साल बाद फिर से योजना अस्वीकृत
फाइल की मंजूरी पर अंतिम मोहर मुख्यमंत्री कार्यालय से लगती है। मुख्यमंत्री कार्यालय में पिछले साल नवंबर में यह परियोजना भेजी गई थी। इस साल के अंत में यह परियोजना अस्वीकृत हुई है।
- होगा पहले से बड़ा आंदोलन
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि अधिकारियों ने जिले के किसानों से तटबंध बनवाने के लिए झूठे वादे किए थे। तटबंध बनने से ही खादर में खेती और किसान बचे रह सकते हैं। तटबंध बनवाने की मांग को लेकर भाकियू पहले से बड़ा आंदोलन करेगा।