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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Police caught factory of fake liquor manufacturing in the jungle

पुलिस ने जंगल में नकली शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़ी

Sun, 31 Dec 2017 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Sun, 31 Dec 2017 11:47 PM IST
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Police caught factory of fake liquor manufacturing in the jungle
आराेपी के बारे में जानकारी देती सीओ अंशु जैन। - फोटो : अमर उजाला
नूरपुर (बिजनौर) में शिवाला कलां पुलिस ने गांव सेह के जंगल में चल रही नकली शराब बनाने की फैक्ट्री को पकड़ा है। एक शराब माफिया भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो शराब माफिया फरार हो गए। पुलिस को मौके से अंग्रेजी शराब की कई कंपनियों के रैपर, कांच की खाली बोतलें, स्प्रिट, अन्य केमिकल बरामद हुए हैं। 
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थानाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने रविवार दोपहर गांव सेह के जंगल में छापा मारकर सुभाषचंद उर्फ कोकिल निवासी गांव सेह को गिरफ्तार किया, जबकि दीपक निवासी सेह, दानिश निवासी धनौरा जनपद अमरोहा फरार हो गए। थानाध्यक्ष के मुताबिक पकड़ा गया सुभाषचंद अपने फरार साथियों के साथ जंगल में नकली शराब बनाने की फैक्ट्री चला रहा था। पुलिस को मौके से एक केन में 50 लीटर रेक्टिफाइड, विभिन्न कंपनियों के नकली होलोग्राम, प्लास्टिक की बाल्टी में भरा केमिकल, शराब बनाने के लिए रंग के अलावा अंग्रेजी शराब की विभिन्न कंपनियों के रैपर, सील, कांच की खाली बोतलें एवं भारी मात्रा में खाली पब्बे बरामद हुए। 
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पूछताछ में पकड़े गए सुभाष ने बताया कि वह और उसके साथी दीपक एवं दानिश केमिकल में रंग मिलाकर शराब तैयार करते थे। नकली शराब को बोतलों में भरकर उन पर अंग्रेजी शराब की विभिन्न कंपनियों के रैपर चिपकाकर बेच देते थे। पुलिस ने तीनों शराब माफिया के विरुद्घ विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर सुभाषचंद का चालान कर दिया है। 
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आर्डर पर बेची जाती थी नकली शराब
 गांव सेह के जंगल में पकड़ी गई नकली शराब की फैक्ट्री में रेक्टिफाइड को अंग्रेजी शराब के नामी ब्रांडों की बनाकर बिक्री करने का काम धड़ल्ले से चल रहा था। पुलिस को मौके से जो खाली बोतल और कंपनियों रैपर, सील, होलोग्राम मिले हैं वह देखने में असली जैसे लगते हैं। शराब माफिया स्प्रिट व अन्य केमिकलों में रंग मिलाकर शराब तैयार करते थे। इस शराब को ब्रांडेड कंपनी की शराब की बोतलों में भरकर एजेंटों के माध्यम से बेचा जाता था। विवाह, चुनाव और अन्य कार्यक्रमों में एजेंट इस शराब को आर्डर करने पर ठिकाने तक पहुंचा देते थे। पुलिस ने फैक्ट्री तो पकड़ ली है, लेकिन इसे बेचने वाले एजेंट और अन्य माफिया अभी पकड़ से दूर हैं। थानाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने बताया कि फरार हुआ दीपक पहले भी शराब बनाने में जेल जा चुका है। उसकी और दानिश की तलाश में दबिश दी जा रही है। 
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