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हमारी सोच है हिंदी के पतन का कारण : हुक्का बिजनौरी

Thu, 13 Aug 2020 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2020 12:09 AM IST
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Bijnor's satirist Hookah Bijnori
हुक्का बिजनौरी - फोटो : BIJNOR
हिमारी सोच है हिंदी के पतन का कारण : हुक्का बिजनौरी
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बिजनौर। हिंदी हैं हम अभियान के तहत अमर उजाला ने जाने माने व्यंग्यकार हुक्का बिजनौरी से खास बातचीत की। इस दौरान उनसे हिंदी भाषा का पतन व घटती लोकप्रियता का कारण और इसके उत्थान को लेकर चर्चा की गई। हुक्का बिजनौरी हास्य व्यंग्य के जाने माने कवि हैं। इसके साथ वह कवि सम्मेलन मंच के शानदार संचालक भी हैं। हुक्का बिजनौरी का असली नाम अशोक कुमार जैन है। काव्य जगत में आने के बाद ये हुक्का बिजनौरी के नाम से प्रसिद्ध हो गए। इससे पहले ये कई साल तक हिंदी के शिक्षक भी रह हैं। हुक्का बिजनौरी अखबार के शीर्षक, सरकार द्वारा जनजागरण के लिए चलाए गए नारों आदि से ही कविता बना देते हैं।
अमर उजाला ने उनसे हिंदी की दुर्दशा और हिंदी भाषी बच्चों के सर्वाधिक हिंदी विषय में ही फेल होने का कारा पूछा। हुक्का बिजनौरी ने बताया कि हिंदी के पतन का मुख्य कारण हमारी सोच है। हम सोचते हैं कि हम हिंदी को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। इसे गंभीरता से लेने का क्या जरूरत। बच्चा जब स्कूल में पढ़ता है तो अभिभावक यही सोचकर अन्य विषयों पर हिंदी से ज्यादा ध्यान दिलाते हैं कि हिंदी तो सरल भाषा है। इसकी तैयारी तो बच्चा आसानी से कर लेगा। आजकल अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाने का चलन बढ़ता जा रहा है। अंग्रेजी स्कूलों में हिंदी पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जाता। यही कारण है कि छात्र सर्वाधिक हिंदी विषय में फेल हो रहे हैं।
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हिंदी के उत्थान के लिए उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम अभिभावक बच्चों को हिंदी विषय को गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित करें। हिंदी में बात करें, हिंदी के प्रति गौरव का भाव जाग्रत करें। इसके अलावा स्कूलों में हिंदी भाषा पर छोटी-छोटी गोष्ठियां आयोजित की जानी चाहिए। बच्चों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए हिंदी की प्रतियोगिताएं जैसे कविता, दोहा या श्लोक प्रतियोगिता आयोजित करें। इससे बच्चों में हिंदी के प्रति लगाव बढ़ेगा। शिक्षकों को भी चाहिए कि वो पढ़ाई के तरीकों को रुचिकर बनाएं ताकि बच्चे मन लगाकर हिंदी विषय को पढ़ सकें। शिक्षकों को भी हिंदी विषय में अपना ज्ञान बढ़ाने की आवश्यकता है।
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