Accident: यूपी के इस जिले में चले संभलकर, इस वजह से हो रहे हादसे, अब एक शिक्षक की गई जान, 12 से ज्यादा घायल
Bijnor News : यूपी के बिजनौर जिले में यहां पर इस वजह से ज्यादा हादसे हो रहे हैं। आज भी एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें एक शिक्षक की जान चली गई और 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
विस्तार
बिजनौर में बिजनौर शक्ति चौराहे के पास शुक्रवार की शाम एक कार डिवाइडर पर चढ़कर पलट गई। हालांकि कोई गंभीर घायल तो नहीं हुआ लेकिन लोगों की सांस जरूर अटक गई थी, यह पहला मामला नहीं है। यहां दूसरे तीसरे रोज ऐसी घटना होना आम बात है। जिसकी वजह है नियमों के विपरीत बना डिवाइडर। डिवाइडर की रात में पहचान भी नहीं हो पाती।
मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे 119 बिजनौर शहर के बीच से होकर गुजर रहा है। इस हाईवे पर सालों पहले शक्ति चौराहे से जजी की ओर को डिवाइड का निर्माण कराया गया था। उस वक्त इसका निर्माण नगर पालिका ने कराया था, लेकिन हाईवे प्राधिकरण की आपत्ति के बाद निर्माण को बीच में ही छोड़ दिया था। उस वक्त हाईवे प्राधिकरण ने पालिका के इस निर्माण पर एतराज जताया। जिसके बाद डिवाइडर का कुछ हिस्सा उखड़ गया जबकि करीब डेढ़ सौ मीटर तक डिवाइडर वजूद में है।
हादसों की वजह बन रहा डिवाइडर
यूं तो शहर में ट्रैफिक को अलग-अलग लेन में चलाने के लिए इस डिवाइडर का निर्माण कराया गया था लेकिन अब यह हादसों की वजह बन रहा है। शुक्रवार की देर शाम भी जजी की ओर आ रही एक कार डिवाइडर पर चढ़कर पलट गई। जिसमें महिलाओं समेत एक बच्चा भी मामूली रूप से चोटिल हुए। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है।
नहीं लगे हैं रिफलेक्टर
इस डिवाइडर पर रिफलेक्टर नहीं है। ऐसे में तेज गति में आने वाले वाहनों को पता नहीं चलता कि बीच सड़क में कब डिवाइडर आ गया। क्योंकि शक्ति की ओर से जजी की ओर से जाने वाले तो सीधे अपनी लेन में चले जाते हैं, लेकिन जजी की ओर से शक्ति की ओर जाने वालों को मालूम ही नहीं पड़ता कि आगे डिवाइडर है।
चार लेन सड़क पर है डिवाइडर का नियम
बिजनौर में जिस सड़क पर डिवाइडर बना हुआ है, वह दस मीटर चौड़ी यानि दो लेन है। जबकि नियम कहता है कि चार लेन सड़क पर ही डिवाइडर बनाया जाना चाहिए।
सड़क पर भी नहीं बने हैं संकेतक
हाईवे पर सफेद पट्टी बनाने का नियम है। उधर अगर कहीं सड़क संकरी होती है तो पहले ही सफेद पट्टी से संकेतक बना दिया जाता है। अब बिजनौर में जो डिवाइडर बना है, उसकी ऊंचाई भी कम है जबकि कम से कम 52 सेमी ऊंचा होना चाहिए। उधर सड़क पर भी ऐसी कोई पट्टी नहीं बनाई गई जो यह इशारा करे कि आगे डिवाइडर की सड़क आने वाली है। बीच सड़क में चलने वाली गाड़ियां सीधे डिवाइडर पर चढ़ जाती है।
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बोले शहरवासी...
नानक चंद खेड़ा ने बताया कि यह डिवाइडर शक्ति चौराहे से नुमाइश ग्राउंड तक बनना चाहिए। अगर वहां तक नहीं बन पाता तो इस आधे अधूरे डिवाइडर को ही तोड़ देना चाहिए। यह लोगों के लिए खतरा बना हुआ है।
महेश कुमार ने बताया कि डिवाइडर पर संकेतक नहीं होने की वजह से हादसे हो रहे हैं। यह डिवाइडर ही अधूरा है। कम से कम इस पर रंगीन पेंट करा दिया चाहिए। जिससे कार चालकों को डिवाइडर दूर से दिख जाए।
खिलेंद्र राणा ने बताया कि रात में यह डिवाइडर लोगों को दिखाई ही नहीं देता है। आधा अधूरा डिवाइडर तोड़ देना ही बेहतर रहेगा। या फिर दोनों ओर सड़क चौड़ी होनी चाहिए।
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हाईवे प्राधिकरण को लिखी जाएगी चिट्टी
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एस के राव ने बताया कि नियमानुसार डिवाइडर के दोनों ओर सात-सात मीटर चौड़ी सड़क होनी चाहिए। फोरलेन पर ही डिवाइडर अनुमन्य होता है। अब यह डिवाइडर ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए बनाया गया होगा। इस मामले में हाईवे प्राधिकरण को पत्र लिखा जाएगा। यह सड़क नेशनल हाईवे अधीन है।