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आयुष विभाग बंटेगा मरीजों को आयुष काढ़ा
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आयुष विभाग बंटेगा मरीजों को आयुष काढ़ा
बिजनौर। कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के उद्देश्य से आयुष विभाग द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों को आयुष काढ़ा वितरित किया जाएगा। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के अनुसार जिले के लिए लखनऊ मुख्यालय से करीब साढ़े तीन क्विंटल आयुष काढ़ा जिले को उपलब्ध कराया जाएगा। इसे 50-50 ग्राम के पाउच तैयार कराकर प्रति मरीज के हिसाब से दिया जाएगा।
आयुष काढ़ा पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ऊर्जा के साथ रक्त का भी संचार तेजी से होता है। इससे कोरोना संक्रमण के हमला करने की संभावनाएं भी काफी कम रहती हैं। वर्तमान में चल रही कोरोना महामारी से बचाव के लिए हर कोई रास्ता ढूंढ रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि आयुष काढ़ा इम्युनिटी बूस्टर होता है, जबकि गिलोय को इसके लिए सर्वोत्तम माना जाता है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. इसमपाल के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार काढ़ा पीना चाहिए। उन्होंने बताया कि आयुष काढ़ा पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ऊर्जा के साथ रक्त का संचार तेज होता है। गिलोय के तने का काढ़ा बनाकर पिया जाए तो वह इससे भी बेहतर माना जाता है। नीम के पेड़ पर चढ़े गिलोय के तने को रामबाण बताया गया है। मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गिलोय का तना बेहतर होता है। आयुर्वेद में इसे रसायन के तौर पर जाना जाता है, क्योंकि इससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है। गिलोय को डेंगू, मलेरिया, तीव्र ज्वर (बुखार) आदि के लिए सर्वोत्तम औषधि माना गया है। गिलोय के अधिकतर औषधीय गुण इसके तने में मौजूद होते हैं, लेकिन इसकी पत्तियां, फल और जड़ का भी औषधीय उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया लखनऊ मुख्यालय पर आयुष काढ़ा तैयार कराया जा रहा है। अगले सप्ताह तक वहां से जिले को साढ़े तीन क्विंटल काढ़ा मिलेगा।
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बिजनौर। कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के उद्देश्य से आयुष विभाग द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों को आयुष काढ़ा वितरित किया जाएगा। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के अनुसार जिले के लिए लखनऊ मुख्यालय से करीब साढ़े तीन क्विंटल आयुष काढ़ा जिले को उपलब्ध कराया जाएगा। इसे 50-50 ग्राम के पाउच तैयार कराकर प्रति मरीज के हिसाब से दिया जाएगा।
आयुष काढ़ा पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ऊर्जा के साथ रक्त का भी संचार तेजी से होता है। इससे कोरोना संक्रमण के हमला करने की संभावनाएं भी काफी कम रहती हैं। वर्तमान में चल रही कोरोना महामारी से बचाव के लिए हर कोई रास्ता ढूंढ रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि आयुष काढ़ा इम्युनिटी बूस्टर होता है, जबकि गिलोय को इसके लिए सर्वोत्तम माना जाता है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. इसमपाल के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार काढ़ा पीना चाहिए। उन्होंने बताया कि आयुष काढ़ा पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ऊर्जा के साथ रक्त का संचार तेज होता है। गिलोय के तने का काढ़ा बनाकर पिया जाए तो वह इससे भी बेहतर माना जाता है। नीम के पेड़ पर चढ़े गिलोय के तने को रामबाण बताया गया है। मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गिलोय का तना बेहतर होता है। आयुर्वेद में इसे रसायन के तौर पर जाना जाता है, क्योंकि इससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है। गिलोय को डेंगू, मलेरिया, तीव्र ज्वर (बुखार) आदि के लिए सर्वोत्तम औषधि माना गया है। गिलोय के अधिकतर औषधीय गुण इसके तने में मौजूद होते हैं, लेकिन इसकी पत्तियां, फल और जड़ का भी औषधीय उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया लखनऊ मुख्यालय पर आयुष काढ़ा तैयार कराया जा रहा है। अगले सप्ताह तक वहां से जिले को साढ़े तीन क्विंटल काढ़ा मिलेगा।
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