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माध्यमिक विद्यालयों में नहीं आग से बचाव के संसाधन
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किरतपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय नगर में रखें आग बुझाने संयंत्र।
- फोटो : BIJNOR
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अमर उजाला अभियान : माध्यमिक विद्यालयों में नहीं आग से बचाव के संसाधन
बिजनौर। नजीबाबाद में एक मकान में आग लगने से हुई दो मौत के बाद भी सरकारी विभाग सबक लेते नजर नहीं आ रहे हैं। माध्यमिक विद्यालयों में आग से बचाव के संसाधन नहीं हैं। अधिकारियों के निरीक्षण कागजों तक सिमटे हैं। कई विद्यालयों में आग बुझाने के संयंत्र धूल फांक रहे हैं। छात्र संगठन व अभिभावकों ने मामला कई बार अधिकारियों के समक्ष उठाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिले में 387 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें 32 राजकीय इंटर कॉलेज, 73 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय तथा 282 वित्त विहीन विद्यालय हैं। विद्यालय 19 मई तक खुलेंगे, गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। मई तथा जून माह अग्निकांड के लिहाज से संवेदनशील होते हैं। शासन से विद्यालयों को आग से बचाव के लिए मानक निर्धारित हैं। मई 2019 में गुजरात में सूरत शहर के एक कोचिंग सेंटर पर भयानक अग्निकांड हुआ। हादसे में जन धन की भारी क्षति हुई। इसके बाद शासन प्रशासन की नींद टूटी। प्रशासन ने फायर व शिक्षा विभाग की अलग-अलग टीम कॉलेजों में भेजी। रिपोर्ट के आधार पर कॉलेजों को आग से बचाव के निर्देश जारी हुए। कॉलेजों ने निर्देश के अनुपालन में उस समय खानापूर्ति कर ली। आरोप है कि अब शासन के निर्देश फाइलों में कैद हैं।
ये है आग से बचाव के 10 प्रमुख निर्देश
1- विद्यालयों के क्षेत्रफल फैलाव के अनुसार आग बुझाने के सिलिंडर हों।
2- हर कक्षा के बाहर रेत की बाल्टी लगाई जाए।
3- विद्यालय में पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो।
4- विद्यार्थियों के आने जाने के लिए दो जीने हों।
5- जीने की चौड़ाई तय मानकों के अनुरूप हो।
6- विद्यालय के में गेट पर निकासी के दो रास्ते हो।
7- विद्यालय में एक इमरजेंसी गेट हो।
8- अग्नि बुझाने के संयंत्रों की समय समय पर विशेषज्ञों से जांच कराई जाए।
9- विद्यालयों में आग से बचाव के प्रदर्शन हों।
10- आग से बुझाने के निर्देश से अपडेट रहें।
ये है स्कूलों का हाल
मूल्यांकन केंद्रों पर आ रहे विद्यालयों के शिक्षकों की बात पर यकीन किया जाए तो सूरत हादसे के बाद कॉलेजों में एक दो आग बुझाने का सिलिंडर, बाल्टी खरीद लिया गया। आरोप है कि अब सिलिंडर व बाल्टी आदि उपकरण गोदामों में धूल फांक रहे हैं। फायर विभाग सुविधा अनुसार एक दो विद्यालय में आग से बचाव का प्रदर्शन करता है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की तो किसी को याद आती नहीं। शिक्षकों को गैस सिलिंडर संचालन का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। निगरानी के लिए शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी हैं। जिला क्वालिटी कंट्रोल टीम विद्यालयों का निरीक्षण करती है। विद्यालयों के पैनल निरीक्षण होते हैं। सभी विद्यालयों की व्यवस्था पर बिंदुवार रिपोर्ट देते हैं। आरोप है कि किसी भी अधिकारी का इस ओर ध्यान नहीं जाता। अभिभावकों हरेंद्र सिंह, अरविंद कुमार, आदि का कहना है कि आग से बचाव जरूरी है। अधिकारियों को समय समय पर विद्यालयों में टीम भेजकर व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
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स्कूलों की कराई जाएगी जांच : डीआईओएस
डीआईओएस राजेश कुमार का विद्यालयों में आग से बचाव के मामले में कहना है कि शासन से आए निर्देश को तुरंत विद्यालयों को भेज दिया जाता है। क्रियान्वयन की जिम्मेदारी विद्यालयों के प्रधानाचार्य की है। भीषण गर्मी को देखते हुए आग से बचाव की समुचित व्यवस्था रखने के बारे में विद्यालयों को पत्र भेजे जा रहे हैं, टीम भेजकर जांच भी कराई जाएगी।
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बिजनौर। नजीबाबाद में एक मकान में आग लगने से हुई दो मौत के बाद भी सरकारी विभाग सबक लेते नजर नहीं आ रहे हैं। माध्यमिक विद्यालयों में आग से बचाव के संसाधन नहीं हैं। अधिकारियों के निरीक्षण कागजों तक सिमटे हैं। कई विद्यालयों में आग बुझाने के संयंत्र धूल फांक रहे हैं। छात्र संगठन व अभिभावकों ने मामला कई बार अधिकारियों के समक्ष उठाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिले में 387 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें 32 राजकीय इंटर कॉलेज, 73 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय तथा 282 वित्त विहीन विद्यालय हैं। विद्यालय 19 मई तक खुलेंगे, गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। मई तथा जून माह अग्निकांड के लिहाज से संवेदनशील होते हैं। शासन से विद्यालयों को आग से बचाव के लिए मानक निर्धारित हैं। मई 2019 में गुजरात में सूरत शहर के एक कोचिंग सेंटर पर भयानक अग्निकांड हुआ। हादसे में जन धन की भारी क्षति हुई। इसके बाद शासन प्रशासन की नींद टूटी। प्रशासन ने फायर व शिक्षा विभाग की अलग-अलग टीम कॉलेजों में भेजी। रिपोर्ट के आधार पर कॉलेजों को आग से बचाव के निर्देश जारी हुए। कॉलेजों ने निर्देश के अनुपालन में उस समय खानापूर्ति कर ली। आरोप है कि अब शासन के निर्देश फाइलों में कैद हैं।
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ये है आग से बचाव के 10 प्रमुख निर्देश
1- विद्यालयों के क्षेत्रफल फैलाव के अनुसार आग बुझाने के सिलिंडर हों।
2- हर कक्षा के बाहर रेत की बाल्टी लगाई जाए।
3- विद्यालय में पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो।
4- विद्यार्थियों के आने जाने के लिए दो जीने हों।
5- जीने की चौड़ाई तय मानकों के अनुरूप हो।
6- विद्यालय के में गेट पर निकासी के दो रास्ते हो।
7- विद्यालय में एक इमरजेंसी गेट हो।
8- अग्नि बुझाने के संयंत्रों की समय समय पर विशेषज्ञों से जांच कराई जाए।
9- विद्यालयों में आग से बचाव के प्रदर्शन हों।
10- आग से बुझाने के निर्देश से अपडेट रहें।
ये है स्कूलों का हाल
मूल्यांकन केंद्रों पर आ रहे विद्यालयों के शिक्षकों की बात पर यकीन किया जाए तो सूरत हादसे के बाद कॉलेजों में एक दो आग बुझाने का सिलिंडर, बाल्टी खरीद लिया गया। आरोप है कि अब सिलिंडर व बाल्टी आदि उपकरण गोदामों में धूल फांक रहे हैं। फायर विभाग सुविधा अनुसार एक दो विद्यालय में आग से बचाव का प्रदर्शन करता है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की तो किसी को याद आती नहीं। शिक्षकों को गैस सिलिंडर संचालन का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। निगरानी के लिए शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी हैं। जिला क्वालिटी कंट्रोल टीम विद्यालयों का निरीक्षण करती है। विद्यालयों के पैनल निरीक्षण होते हैं। सभी विद्यालयों की व्यवस्था पर बिंदुवार रिपोर्ट देते हैं। आरोप है कि किसी भी अधिकारी का इस ओर ध्यान नहीं जाता। अभिभावकों हरेंद्र सिंह, अरविंद कुमार, आदि का कहना है कि आग से बचाव जरूरी है। अधिकारियों को समय समय पर विद्यालयों में टीम भेजकर व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
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स्कूलों की कराई जाएगी जांच : डीआईओएस
डीआईओएस राजेश कुमार का विद्यालयों में आग से बचाव के मामले में कहना है कि शासन से आए निर्देश को तुरंत विद्यालयों को भेज दिया जाता है। क्रियान्वयन की जिम्मेदारी विद्यालयों के प्रधानाचार्य की है। भीषण गर्मी को देखते हुए आग से बचाव की समुचित व्यवस्था रखने के बारे में विद्यालयों को पत्र भेजे जा रहे हैं, टीम भेजकर जांच भी कराई जाएगी।