बिजनौर में चांदपुर से मेरठ जाने के लिए हस्तिनापुर गंगा पुल के निकट धंसी सड़क को ठीक करने का काम फिलहाल रुक गया है। गंगा उफान पर हैं, मिट्टी के बोरे, बांस-बल्ली गंगा के पानी की धार को नहीं झेल पा रहे हैं। तेज बहाव के कारण गंगा की धार से मिट्टी के काटन रोकने के काम को रोकना पड़ा।
सवालों के घेरे में अफसर:कटान रोकने के सभी इंतजाम फेल, बड़े नुकसान का है डर, तस्वीरों में देखें गंगा पुल का हाल
रविवार से आनन-फानन में गंगा की गीली रेत में बल्ली गाड़कर कर व रेतीली मिट्टी से भरे बोरों से गंगा की धार को रोकने का काम शुरू किया गया। मंगलवार को पुल के डाउन स्ट्रीम में भी बल्ली गाड़ने का काम शुरू किया गया। दोपहर बाद गंगा का बहाव तेज होने लगा। शाम के समय गंगा ने रौद्र रूप दिखाते हुए अधिकांश बल्ली, मिट्टी के बोरे उखाड़ कर बहा दिए।
पत्थर (बोल्डर) ही रोक सकते हैं गंगा की धार
एक तकनीकी व्यक्ति ने बिना अपना नाम बताए, बताया कि इस तरह के मरम्मत कार्य में सबसे पहले बोरिंग कर बल्ली गाड़ी जाती है, क्योंकि बल्ली का ज्यादा गहराई तक जाना जरूरी होता है। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में बोल्डर पत्थर व वायर मरम्मत स्थल पर जमा करते हैं। फिर एक साथ भारी संख्या में लेबर लगाकर ऊपर की तरफ से बहाव को रोकते हैं। यदि काम धीरे-धीरे करेंगे, तब सफलता मुश्किल से मिलेगी।
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गंगा की धार बिजनौर की तरफ कर रही कटान, पुल व सड़क की बढ़ी दूरी
गंगा में उफान व बिजनौर की तरफ कटान के चलते गंगा पुल व सड़क के बीच दूरी और बढ़ गई है। सड़क का हिस्सा धीरे-धीरे गंगा की धार से टूट रहा हैं। सड़क में दरार बढ़ती जा रही हैं।
यदि जिम्मेदार अफसरों ने सड़क व पुल को बचाने के लिए स्थाई योजना बनाकर युद्ध स्तर कार्य नहीं किया तो सड़क को बहुत बड़ी क्षति हो सकती हैं।