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Bijnor News: केदारघाटी की आपदा के बाद से बिजनौर में रुख बदल रही गंगा की धारा
Fri, 22 Aug 2025 11:37 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 22 Aug 2025 11:37 PM IST
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बालावाली क्षेत्र में कटान के बाद गंगा में गिरा आम का पेड़। स्रोत वीडियो ग्रैव
बिजनौर। यूं तो नदियां अपने बहाव का रास्ता खुद तय करती हैं, मगर बालावाली के पास गंगा की धारा का रुख केदारघाटी में आपदा के बाद से लगातार बदल रहा है। 12 सालों से गंगा यहां लगातार भूमि का कटान कर रही है। खास बात यह है कि गंगा की धारा बिजनौर की सीमा में तो लगातार कटान कर रही है जबकि उत्तराखंड के गांवों में राहत है। अब उनके यहां कटान नहीं हो रहा।
बालावाली में साल 1888 में गंगा नदी पर रेलवे के लिए पुल का निर्माण हुआ। इंजीनियर सर एंडरसन की देखरेख में यह ब्रिज बनाया गया था। उसी वक्त पुल के दोनों सिरों पर गंगा के तट पर गाइड बंध भी बनाए गए। जिससे गंगा का पानी पुल के नीचे से निकले और इधर उधर ना बहे। अब बिजनौर की सीमा में स्थित रेल के पुल के गाइड बंध को खतरा बना हुआ है।
गाइड बंध के लिए गंगा की धारा का बदलना भी खतरा है क्योंकि गंगा की एक धारा पुल के नीचे सीधे आने के बजाए गाइड बंध के बाहर पूर्व दिशा में रेलवे स्टेशन बालावाली और पुल के बीच ट्रैक पर टक्कर मार रही है।
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nगौसपुर के सामने हुआ करता था गंगा का घुमाव : बालावाली रेलवे ट्रैक से अप स्ट्रीम में करीब एक किलोमीटर दूर गांव गौसपुर बसा हुआ है। इसी गांव के रहने वाले विपिन कुमार गढ़वाल विश्वविद्यालय से भूमि कटाव विषय पर शोध कर रहे हैं। विपिन कुमार बताते हैं कि उनके गांव से करीब दो पश्चिम दिशा में गंगा का घुमाव हुआ करता था। साल 2013 में केदारघाटी में आपदा के बाद काफी मात्रा में पानी आया तो घुमाव में बदलाव होने लगा। तभी से गंगा की धारा लगातार रुख बदल रही है।
साल 2013 से साल 2015 तक गंगा ने गौसपुर गांव के सामने खादर क्षेत्र का कटान किया। साल 2015 से 22 तक बांगर कृषि क्षेत्र का कटान किया। जमीन का काटते हुए गंगा उनके गांव की तरफ बढ़ रही थी हालांकि साल 2023 में बाढ़ रोधी स्टड आदि बनाए गए तो गंगा की धारा को आबादी से पचास मीटर दूर रोक दिया गया। संवाद
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बालावाली में साल 1888 में गंगा नदी पर रेलवे के लिए पुल का निर्माण हुआ। इंजीनियर सर एंडरसन की देखरेख में यह ब्रिज बनाया गया था। उसी वक्त पुल के दोनों सिरों पर गंगा के तट पर गाइड बंध भी बनाए गए। जिससे गंगा का पानी पुल के नीचे से निकले और इधर उधर ना बहे। अब बिजनौर की सीमा में स्थित रेल के पुल के गाइड बंध को खतरा बना हुआ है।
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गाइड बंध के लिए गंगा की धारा का बदलना भी खतरा है क्योंकि गंगा की एक धारा पुल के नीचे सीधे आने के बजाए गाइड बंध के बाहर पूर्व दिशा में रेलवे स्टेशन बालावाली और पुल के बीच ट्रैक पर टक्कर मार रही है।
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nगौसपुर के सामने हुआ करता था गंगा का घुमाव : बालावाली रेलवे ट्रैक से अप स्ट्रीम में करीब एक किलोमीटर दूर गांव गौसपुर बसा हुआ है। इसी गांव के रहने वाले विपिन कुमार गढ़वाल विश्वविद्यालय से भूमि कटाव विषय पर शोध कर रहे हैं। विपिन कुमार बताते हैं कि उनके गांव से करीब दो पश्चिम दिशा में गंगा का घुमाव हुआ करता था। साल 2013 में केदारघाटी में आपदा के बाद काफी मात्रा में पानी आया तो घुमाव में बदलाव होने लगा। तभी से गंगा की धारा लगातार रुख बदल रही है।
साल 2013 से साल 2015 तक गंगा ने गौसपुर गांव के सामने खादर क्षेत्र का कटान किया। साल 2015 से 22 तक बांगर कृषि क्षेत्र का कटान किया। जमीन का काटते हुए गंगा उनके गांव की तरफ बढ़ रही थी हालांकि साल 2023 में बाढ़ रोधी स्टड आदि बनाए गए तो गंगा की धारा को आबादी से पचास मीटर दूर रोक दिया गया। संवाद

बालावाली क्षेत्र में कटान के बाद गंगा में गिरा आम का पेड़। स्रोत वीडियो ग्रैव