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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे पर भारी पड़ा कोरोना, बेटियों की घटी जन्मदर

Thu, 18 Nov 2021 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 11:36 PM IST
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77 boys out of one thousand in the district will remain bachelors
जिले में एक हजार में से 77 लड़के रह जाएंगे कुंवारे
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अजीत चौधरी
बिजनौर। एक ओर जहां भ्रूण जांच और कन्या भ्रूण हत्या रोकने को स्वास्थ्य विभाग और सरकार तमाम दावे कर रही है, वहीं जिले के लिंगानुपात के आंकड़े चिंताजनक हो चले हैं। यही हाल रहा तो जिले में हर एक हजार में 77 लड़के कुंवारे ही रह जाएंगे। जी हां, आंकड़े तो यही कह रहे हैं। जिले में लिंगानुपात घटकर एक हजार लड़कों पर 923 लड़की हो गया है, जबकि पिछले साल यह 945 था। इस साल का लिंगानुपात पिछले चार सालों में सबसे कम है। हालांकि विभाग जहां इसका ठीकरा कोरानाकाल पर फोड़ रहा है, लेकिन आंकड़े जिले में बढ़ती भ्रूण जांच और कन्या भ्रूण हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं।
बेटियों को बचाना और उन्हें दुनिया में आने देना एक बड़ा अभियान है और सरकार इस पर एक मिशन की तरह काम कर रही है। जिले में एक समय बेटियों का लिंगानुपात 850 तक कम था। यानी कि एक हजार बेटों के सापेक्ष 850 से बेटी ही जन्म ले पाती थीं। बेटियों का लिंगानुपात बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान शुरू किया और इसके अंतर्गत तमाम जागरुकता अभियान चलाए। गांव-गांव जाकर बेटियों को बचाने के लिए जागरुकता शिविर लगाए गए और विद्यार्थियों को भी ओस अभियान से जोड़ा गया। प्रसव पूर्व लिंग की जांच कराकर बेटियों को कोख में ही मार देने पर भी सख्ती से लगाम लगाई गई। अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच कराने के लिए बहुत सख्ती बरती गई और बिना अनुमति चलने वाले सेंटर भी सील किए गए। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए और बेटियों का लिंगानुपात बढ़कर 2019 में 945 तक पहुंच गया था लेकिन करीब डेढ़ साल से कोरोना की वजह से उत्पन्न हुई परिस्थितियों ने सरकार के सभी कार्यक्रमों को पटरी से उतार दिया है। पिछले साल की शुरुआत में ही कोरोना आ गया था। जागरुकता अभियान न के बराबर चले और बेटियों के लिंगानुपात पर भी काम नहीं हो पाया। सरकार का ध्यान कोरोना से निपटने और टीकाकरण पर ज्यादा रहा। हाल ही में तैयार हुई पिछले साल की रिपोर्ट में बेटियों का लिंगानुपात घटकर 923 पाया गया है। खुद स्वास्थ्य विभाग भी इसे देखकर हैरत में है। (संवाद)
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जागरुकता सबसे अहम
पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ.एसके निगम के अनुसार कोरोना की वजह से जागरुकता अभियान प्रभावित हुए हैं। बेटियों को बचाने के लिए जागरुकता अभियान का सबसे ज्यादा महत्व रहता है। अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भी लगातार छापा मारा जा रहा है।
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साल-दर-साल लिंगानुपात पर एकनजर
साल लिंगानुपात
2014-15 846
2015-16 894
2016-17 873
2017-18 937
2018-19 934
2019-20 945
2020-21 923
नोट: आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से लिए गए हैं।
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