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सत्यगिरि महाराज ने शुरू की अग्नि तपस्या
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सत्यगिरि महाराज ने शुरू की अग्नि तपस्या
रेहड़। देश में सुख शांति और सांप्रदायिक सौहार्द की कामना के लिए गांव जाब्तानगर के शिव मंदिर में महात्मा बाबा सत्यगिरि महाराज ने 11 मई से एक माह तक के लिए रोजाना दो घंटे अग्नि के बीच बैठकर तपस्या शुरू कर दी है। इस भीषण गर्मी में बाबा की अग्नि तपस्या को देखने के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा है। बाबा सत्यगिरि महाराज के जयकारे लगने शुरू हो गए हैं।
जाब्तानगर निवासी ज्ञानचंद प्रजापति , महेश शर्मा, अमित कुमार, रामबहादुर सिंह, नीरज कुमार ने बताया कि बाबा हरिद्वार निवासी पंच दशनामी अखाड़े से संबंधित है। वह यहां पर पहली बार तपस्या करने आए हैं। उनका कहीं एक जगह कोई ठिकाना नहीं है। वह घूमते रहते हैं। शिव मंदिर में अग्नि तपस्या में विलीन बाबा सत्य गिरि महाराज ने बताया कि वह पंच दशनामी अखाड़े से जुड़े हैं। प्रतिवर्ष देश की खुशहाली के लिए एक माह तक अग्नि तपस्या करते हैं। यहां पर मंदिर में उनका 31वां प्रयास है। इससे पहले वह जनपद रामपुर के टाण्डा बादली, सिरका, कुंदनपुर आदि स्थानों पर अग्नि तपस्या कर चुके हैं। यहां पर उनकी ओर से 11 मई शनिवार से अग्नि तपस्या शुरू की गई है। 11 जून तक संपन्न होगी। तपस्या प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक होगी। तपस्या के दौरान उनके चारों ओर पांच- पांच उपलों की पांच धूनी लगाई जाएगी। उनके बीच में वह बैठ भगवान की तपस्या करेंगे। प्रतिदिन होने वाली तपस्या में हररोज एक एक उपला बढ़ता रहेगा। तपस्या पूरी होने तक बाबा अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। केवल फलाहार लेंगे।
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रेहड़। देश में सुख शांति और सांप्रदायिक सौहार्द की कामना के लिए गांव जाब्तानगर के शिव मंदिर में महात्मा बाबा सत्यगिरि महाराज ने 11 मई से एक माह तक के लिए रोजाना दो घंटे अग्नि के बीच बैठकर तपस्या शुरू कर दी है। इस भीषण गर्मी में बाबा की अग्नि तपस्या को देखने के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा है। बाबा सत्यगिरि महाराज के जयकारे लगने शुरू हो गए हैं।
जाब्तानगर निवासी ज्ञानचंद प्रजापति , महेश शर्मा, अमित कुमार, रामबहादुर सिंह, नीरज कुमार ने बताया कि बाबा हरिद्वार निवासी पंच दशनामी अखाड़े से संबंधित है। वह यहां पर पहली बार तपस्या करने आए हैं। उनका कहीं एक जगह कोई ठिकाना नहीं है। वह घूमते रहते हैं। शिव मंदिर में अग्नि तपस्या में विलीन बाबा सत्य गिरि महाराज ने बताया कि वह पंच दशनामी अखाड़े से जुड़े हैं। प्रतिवर्ष देश की खुशहाली के लिए एक माह तक अग्नि तपस्या करते हैं। यहां पर मंदिर में उनका 31वां प्रयास है। इससे पहले वह जनपद रामपुर के टाण्डा बादली, सिरका, कुंदनपुर आदि स्थानों पर अग्नि तपस्या कर चुके हैं। यहां पर उनकी ओर से 11 मई शनिवार से अग्नि तपस्या शुरू की गई है। 11 जून तक संपन्न होगी। तपस्या प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक होगी। तपस्या के दौरान उनके चारों ओर पांच- पांच उपलों की पांच धूनी लगाई जाएगी। उनके बीच में वह बैठ भगवान की तपस्या करेंगे। प्रतिदिन होने वाली तपस्या में हररोज एक एक उपला बढ़ता रहेगा। तपस्या पूरी होने तक बाबा अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। केवल फलाहार लेंगे।
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