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श्रीरामलीला मंचन को लेकर असमंजस
Updated Mon, 24 Sep 2018 12:01 AM IST
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श्रीरामलीला मंचन को लेकर असमंजस
कालागढ़। रामगंगा बांध परियोजना की श्रीराम लीला मंचन को लेकर इस बार आम जनता में असमंजस की स्थिति है। वहीं, कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इस मामले में अधिकारियों से वार्ता कर समस्या के समाधान की मांग की गई है।
रामगंगा बांध परियोजना के कर्मचारियों के तत्वावधान में 1960 के दशक से किया जा रहा है। श्रीरामलीला मंचन इस बार असमंजस की स्थिति में आ गया है। श्रीराम गंगा बांध परियोजना के मुख्य भवन के सामने बने विशाल मैदान को वन विभाग को सौंपे जाने के दौरान प्रशासन ने श्रीराम लीला मंचन के स्थान को भी ध्वस्तीकरण में शामिल कर दिया। उसका टीन शेड ध्वस्त कर दिया गया। जिसकी वजह से श्रीरामलीला मंचन को लेकर जनता में भारी असमंजस की स्थिति है। इस बारे में कर्मचारी नेताओं भीम सिंह मेहता, हरपाल सिंह चौहान आदि का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराते हुए उनके समाधान की मांग की गई है।
क्या है कालागढ़ की श्रीरामलीला का माजरा
रामगंगा बांध परियोजना के निर्माण के साथ ही कर्मचारियों के लिए कालागढ़ में दो स्थानों पर श्रीरामलीला का मंचन किया जाता रहा है। केंद्रीय कॉलोनी के वेलफेयर क्लब व नई कालोनी में सिंचाई विभाग के मुख्य कार्यालय के सामने विशाल मैदान में कर्मचारी ही श्रीराम लीला का मंचन करते रहे हैं। क्षेत्र के लगभग 25 ग्रामों का दशहरा यहां मनाया जाता रहा है। कुछ वर्ष पूर्व केंद्रीय कालोनी के वेलफेयर क्लब की श्रीरामलीला का मंचन दुर्गा पूजा स्थल पर किया जाने लगा। वहीं, दशहरा नई कालोनी में ही मनाया जाता है। नई कालोनी की श्रीरामलीला वहीं की जाती रही। इस बार कालागढ़ में प्रशासन का ध्वस्तीकरण का जो चाबुक आवासों पर चला उसमें एसडीएम की मौजूदगी में श्रीरामलीला मंचन स्थान भी ध्वस्तीकरण कर दिया गया है। जिससे अब यहां दशहरा और श्रीरामलीला मंचन को लेकर असमंजस की स्थिति है। नागरिक के राकेश कुमार, राजदेव सिंह, कोमल सिंह, सोनू, नरेंद्र सैनी आदि का कहना है कि वह जन्म से ही यहां की रामलीला मंचन में सहयोग करते रहे है। इस बार क्या होगा। पता नही है। बस मन में तमन्ना है कि हर वर्ष की तरह से श्रीरामलीला का मंचन हो और विशाल दशहरा मने और प्रसाद चढ़े। कालागढ़ से जनता की भावनाएं जुड़ी हैं। यहां के नागरिकों की रग रग में यहां की मिट्टी और हवा शामिल है। ऐसे में कुछ और सोच पाना ही संभव नहीं है।
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कालागढ़। रामगंगा बांध परियोजना की श्रीराम लीला मंचन को लेकर इस बार आम जनता में असमंजस की स्थिति है। वहीं, कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इस मामले में अधिकारियों से वार्ता कर समस्या के समाधान की मांग की गई है।
रामगंगा बांध परियोजना के कर्मचारियों के तत्वावधान में 1960 के दशक से किया जा रहा है। श्रीरामलीला मंचन इस बार असमंजस की स्थिति में आ गया है। श्रीराम गंगा बांध परियोजना के मुख्य भवन के सामने बने विशाल मैदान को वन विभाग को सौंपे जाने के दौरान प्रशासन ने श्रीराम लीला मंचन के स्थान को भी ध्वस्तीकरण में शामिल कर दिया। उसका टीन शेड ध्वस्त कर दिया गया। जिसकी वजह से श्रीरामलीला मंचन को लेकर जनता में भारी असमंजस की स्थिति है। इस बारे में कर्मचारी नेताओं भीम सिंह मेहता, हरपाल सिंह चौहान आदि का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराते हुए उनके समाधान की मांग की गई है।
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क्या है कालागढ़ की श्रीरामलीला का माजरा
रामगंगा बांध परियोजना के निर्माण के साथ ही कर्मचारियों के लिए कालागढ़ में दो स्थानों पर श्रीरामलीला का मंचन किया जाता रहा है। केंद्रीय कॉलोनी के वेलफेयर क्लब व नई कालोनी में सिंचाई विभाग के मुख्य कार्यालय के सामने विशाल मैदान में कर्मचारी ही श्रीराम लीला का मंचन करते रहे हैं। क्षेत्र के लगभग 25 ग्रामों का दशहरा यहां मनाया जाता रहा है। कुछ वर्ष पूर्व केंद्रीय कालोनी के वेलफेयर क्लब की श्रीरामलीला का मंचन दुर्गा पूजा स्थल पर किया जाने लगा। वहीं, दशहरा नई कालोनी में ही मनाया जाता है। नई कालोनी की श्रीरामलीला वहीं की जाती रही। इस बार कालागढ़ में प्रशासन का ध्वस्तीकरण का जो चाबुक आवासों पर चला उसमें एसडीएम की मौजूदगी में श्रीरामलीला मंचन स्थान भी ध्वस्तीकरण कर दिया गया है। जिससे अब यहां दशहरा और श्रीरामलीला मंचन को लेकर असमंजस की स्थिति है। नागरिक के राकेश कुमार, राजदेव सिंह, कोमल सिंह, सोनू, नरेंद्र सैनी आदि का कहना है कि वह जन्म से ही यहां की रामलीला मंचन में सहयोग करते रहे है। इस बार क्या होगा। पता नही है। बस मन में तमन्ना है कि हर वर्ष की तरह से श्रीरामलीला का मंचन हो और विशाल दशहरा मने और प्रसाद चढ़े। कालागढ़ से जनता की भावनाएं जुड़ी हैं। यहां के नागरिकों की रग रग में यहां की मिट्टी और हवा शामिल है। ऐसे में कुछ और सोच पाना ही संभव नहीं है।
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