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बनाए जाएंगे सुपोषित गांव
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अब कुपोषण को खत्म कर बनाए जाएंगे सुपोषित गांव
बिजनौर। जिले के गांवों से नौनिहालों, गर्भवती महिलाओं व किशोरियों से कुपोषण खत्म करके सुपोषित गांव बनाए जाएंगे। इन गांवों में कोई भी कुपोषण का शिकार नहीं होगा। इसके लिए गांवों की ग्रेडिंग होगी। अधिकारी गांवों को गोद लेंगे। ग्रेडिंग में पास होने वाले गांव ही सुपोषित गांव घोषित होंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल पोषण अभियान का शुभारंभ किया था। योजना का उद्देश्य नौनिहालों, किशोरियों तथा बालिकाओं को कुपोषण से पुर्णत: मुक्त करना है। योजना में अधिकारी गांवों को गोद लेंगे। एक बार में 75 गांवों को जिला व ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को गोद दिया जाएगा। स्वास्थ्य तथा महिला बाल विकास एवं पोषाहार विभाग द्वारा इन गांवों में अनेक अभियान चलाए जाएंगे। अभियान के बाद इन गांवों को अभियान के आधार पर अंक मिलेंगे, जो गांव 100 में से 80 अंक प्राप्त कर लेंगे उन्हें सुपोषित गांव घोषित किया जाएगा। इस तरह कई चरण में योजना चलाकर सभी गांवों को सुपोषित घोषित किया जाएगा। गांवों को सुपोषित करने के लिए छह माह का समय दिया जाएगा।
ऐसे मिलेंगे अंक
अभियान में गांवों को 100 में से 80 नंबर लाने होंगे। गांवों में दस प्रतिशत महिलाओं के एनीमिया से ग्रसित न होने व कुपोषित बच्चा न मिलने पर 15 अंक, गांव में हर तीन महीने में स्वास्थ्य जांच होने पर 15, बालिकाओं को आयरन व विटामिन की गोली बांटे जाने पर 15, गुड़, चने, सहजन, आंवले आदि के सेवन के लिए आंगनबाड़ी द्वारा प्रोत्साहित करने पर 15, पोषाहार समय से बांटने पर दस अंक निर्धारित किए गए हैं। डीएम द्वारा गठित कमेटी गांव वालों से सत्यापन होने के बाद गांवों को सुपोषित घोषित किया जाएगा।
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बिजनौर। जिले के गांवों से नौनिहालों, गर्भवती महिलाओं व किशोरियों से कुपोषण खत्म करके सुपोषित गांव बनाए जाएंगे। इन गांवों में कोई भी कुपोषण का शिकार नहीं होगा। इसके लिए गांवों की ग्रेडिंग होगी। अधिकारी गांवों को गोद लेंगे। ग्रेडिंग में पास होने वाले गांव ही सुपोषित गांव घोषित होंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल पोषण अभियान का शुभारंभ किया था। योजना का उद्देश्य नौनिहालों, किशोरियों तथा बालिकाओं को कुपोषण से पुर्णत: मुक्त करना है। योजना में अधिकारी गांवों को गोद लेंगे। एक बार में 75 गांवों को जिला व ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को गोद दिया जाएगा। स्वास्थ्य तथा महिला बाल विकास एवं पोषाहार विभाग द्वारा इन गांवों में अनेक अभियान चलाए जाएंगे। अभियान के बाद इन गांवों को अभियान के आधार पर अंक मिलेंगे, जो गांव 100 में से 80 अंक प्राप्त कर लेंगे उन्हें सुपोषित गांव घोषित किया जाएगा। इस तरह कई चरण में योजना चलाकर सभी गांवों को सुपोषित घोषित किया जाएगा। गांवों को सुपोषित करने के लिए छह माह का समय दिया जाएगा।
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ऐसे मिलेंगे अंक
अभियान में गांवों को 100 में से 80 नंबर लाने होंगे। गांवों में दस प्रतिशत महिलाओं के एनीमिया से ग्रसित न होने व कुपोषित बच्चा न मिलने पर 15 अंक, गांव में हर तीन महीने में स्वास्थ्य जांच होने पर 15, बालिकाओं को आयरन व विटामिन की गोली बांटे जाने पर 15, गुड़, चने, सहजन, आंवले आदि के सेवन के लिए आंगनबाड़ी द्वारा प्रोत्साहित करने पर 15, पोषाहार समय से बांटने पर दस अंक निर्धारित किए गए हैं। डीएम द्वारा गठित कमेटी गांव वालों से सत्यापन होने के बाद गांवों को सुपोषित घोषित किया जाएगा।
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