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आज विश्व क्षय रोग दिवस पर विशेष
Updated Sat, 24 Mar 2018 12:45 AM IST
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बिजनौर। यदि आप टीबी की बीमारी से परेशान हैं और एलोपैथिक दवा खाते हुए तंग आ चुके हैं तो अब चिंता करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति अपनाकर भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है। यानी घर बैठे ही इस दवा को तैयार कर सकते हैं और इसका सेवन कर ठीक हो सकते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने इस दवा को रामबाण औषधि बताया है।
भारत सरकार की मंशा है कि वर्ष 2025 तक देश टीबी मुक्त हो जाए। इसके लिए देशभर में हर जगह टीबी रोगियों को चयनित करने के लिए डोर-टू-डोर अभियान चलाए गए। बिजनौर जनपद से 130 मरीजों का टीबी पॉजिटिव होना पाया गया था। आंकड़ों के अनुसार भारत में सर्वाधिक मौतें टीबी की वजह से ही होती हैं। भारत सरकार के इस आंदोलन को सफल बनाने के लिये आयुर्वेद चिकित्सालय भी आगे आ गए हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सकों का दावा है कि यदि मरीज एक लहसुन की गुली और उतनी ही मात्रा में गुड़ को पीसकर एक गोली बनाकर दिन में तीन बार सेवन करेंगे तो टीबी को पूरी तरह से बाय-बाय कर सकते हैं। इसके अलावा आधा चम्मच शीतोप्लादि चूर्ण और शहद की बराबर मात्रा में देसी गाय के घी की चार बूंदे मिलाकर चटनी बना लें और दिन में तीन बार खाएंगे तो टीबी को पूरी तरह से ठीक करने की इसमें सबसे बड़ी ताकत है। मंडावर क्षेत्र के पांच मरीजों को इस दवा को अपनाने से अब तक निजात मिल चुकी है। राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की प्रभारी चिकित्सक डा. ज्योत्सना शर्मा ने बताया कि मंडावर में कई लोगों को गुड़ और लहसुन से बनी गोली का एक साल तक सेवन करने की सलाह दी गई। इनमें से पांच मरीजों को पूर्णत: आराम मिला और उनको टीबी रोग से मुक्ति मिल गई। ये सारे मरीज टीबी की आखिरी स्टेज पर पहुंच चुके थे।
क्या करें
1. सुबह उठकर कम से कम दो से पांच किलोमीटर तक चार से छह बजे के बीच टहलें।
2. रात को सोने से पूर्व गुनगुने दूध का गुड़ के साथ सेवन करें।
3. चीनी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें।
4. छह से आठ माह तक रोज दवा का सेवन करें।
5. खांसते और छींकते समय रुमाल आदि का इस्तेमाल करें।
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भारत सरकार की मंशा है कि वर्ष 2025 तक देश टीबी मुक्त हो जाए। इसके लिए देशभर में हर जगह टीबी रोगियों को चयनित करने के लिए डोर-टू-डोर अभियान चलाए गए। बिजनौर जनपद से 130 मरीजों का टीबी पॉजिटिव होना पाया गया था। आंकड़ों के अनुसार भारत में सर्वाधिक मौतें टीबी की वजह से ही होती हैं। भारत सरकार के इस आंदोलन को सफल बनाने के लिये आयुर्वेद चिकित्सालय भी आगे आ गए हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सकों का दावा है कि यदि मरीज एक लहसुन की गुली और उतनी ही मात्रा में गुड़ को पीसकर एक गोली बनाकर दिन में तीन बार सेवन करेंगे तो टीबी को पूरी तरह से बाय-बाय कर सकते हैं। इसके अलावा आधा चम्मच शीतोप्लादि चूर्ण और शहद की बराबर मात्रा में देसी गाय के घी की चार बूंदे मिलाकर चटनी बना लें और दिन में तीन बार खाएंगे तो टीबी को पूरी तरह से ठीक करने की इसमें सबसे बड़ी ताकत है। मंडावर क्षेत्र के पांच मरीजों को इस दवा को अपनाने से अब तक निजात मिल चुकी है। राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की प्रभारी चिकित्सक डा. ज्योत्सना शर्मा ने बताया कि मंडावर में कई लोगों को गुड़ और लहसुन से बनी गोली का एक साल तक सेवन करने की सलाह दी गई। इनमें से पांच मरीजों को पूर्णत: आराम मिला और उनको टीबी रोग से मुक्ति मिल गई। ये सारे मरीज टीबी की आखिरी स्टेज पर पहुंच चुके थे।
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क्या करें
1. सुबह उठकर कम से कम दो से पांच किलोमीटर तक चार से छह बजे के बीच टहलें।
2. रात को सोने से पूर्व गुनगुने दूध का गुड़ के साथ सेवन करें।
3. चीनी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें।
4. छह से आठ माह तक रोज दवा का सेवन करें।
5. खांसते और छींकते समय रुमाल आदि का इस्तेमाल करें।