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वेव ग्रुप ने गन्ना भुगतान के लिए मांगी 165 करोड़ की सीसीएल
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वेव ग्रुप ने गन्ना भुगतान के लिए मांगी 165 करोड़ की सीसीएल
बिजनौर। वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने चालू पेराई सत्र के गन्ना भुगतान के लिए बैंक से 165 करोड़ रुपये सीसी लिमिट मांगी है। इसके लिए चीनी गिरवी रखकर बैंक से लोन मांगा गया है। इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है। सीसी लिमिट मंजूर हो गई तो बैंक मिलों को भुगतान के लिए लोन दे देगी। इससे चालू पेराई सत्र में भुगतान किसानों को समय पर मिलेगा। वहीं बिलाई चीनी मिल ने भुगतान के लिए आवेदन नहीं किया है।
वेव ग्रुप की बिजनौर चीनी मिल पर पिछले साल का 26.50 करोड़ तथा चांदपुर चीनी मिल 35.63 करोड़ रुपया बकाया है। ग्रुप को सॉफ्ट लोन न मिल पाने के कारण पिछले साल का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इस साल भी किसानों का चीनी मिल पर करोड़ों रुपया बकाया हो गया है। किसान पिछले साल के अलावा नए साल का भुगतान भी मांग रहे हैं। पिछले साल के भुगतान के लिए ग्रुप अभी तक सरकार से सॉफ्ट लोन मिलने की आस लगा रहा है। नए साल के भुगतान के लिए भी ग्रुप ने उत्तर प्रदेश को आपरेटिव बैंक से सीसी लिमिट (कैश क्रेडिट लिमिट) के लिए आवेदन किया है। ग्रुप ने सीसी लिमिट के लिए बैंक से उसकी चीनी गिरवी रखकर लोन मांगा है। ग्रुप की बिजनौर चीनी मिल ने भुगतान के लिए 80 करोड़ रुपये व चांदपुर चीनी मिल ने 85 करोड़ रुपये मांगा है।
ऐसे बनती है सीसीएल
वर्तमान में चीनी के न्यूनतम दाम 2900 रुपये प्रति क्विंटल हैं। बैंक इस मूल्य पर चीनी गिरवी रखती है और कुल कीमत का 85 प्रतिशत लोन बैंक को दे देती है। इस लोन राशि से बैंक भुगतान कर देते हैं। चीनी मिल के पास बंधक रहती है। चीनी मिल को यह चीनी बेचने का अधिकार रहता है। चीनी मिल चीनी बेचकर मिल का लोन चुकाती रहती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश सरकार गारंटर बनती है।
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27 हजार से ज्यादा किसानों को फायदा
बिजनौर चीनी मिल से नौ हजार 381 तथा चांदपुर चीनी मिल से 17 हजार 859 किसान जुड़े हैं। दोनों मिलों को कुल 27 हजार 240 किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। अगर सीसी लिमिट मंजूर हुई तो इन सब किसानों को फायदा होगा।
बिलाई मिल ने नहीं किया आवेदन
बजाज ग्रुप ने बैंकों से पहले से ही छह हजार करोड़ का लोन ले रखा है। इस वजह से सॉफ्ट लोन के समय बैंकों ने ग्रुप की बिलाई चीनी मिल को लोन देने से मना कर दिया था। चालू पेराई सत्र के भुगतान के लिए ग्रुप ने सीसी लिमिट के लिए आवेदन ही नहीं किया है। अगर मिल सीसी लिमिट के लिए आवेदन करती तो भी लोन नहीं मिलता।
जल्द सॉफ्ट लोन मिलने के आसार
वेव ग्रुप की बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल को अब तक सॉफ्ट लोन नहीं मिला है। हालांकि चीनी मिलों को सॉफ्ट लोन के लिए अब भी आस लगा रखी है। चीनी मिल के अफसरों के अनुसार एक दो दिन में ही सरकार द्वारा सॉफ्ट लोन को मंजूरी मिल सकती है।
भुगतान नहीं तो आंदोलन
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार किसानों को गन्ने का भुगतान जल्द से जल्द मिलना चाहिए। अगर किसानों को भुगतान नहीं दिया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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बिजनौर। वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने चालू पेराई सत्र के गन्ना भुगतान के लिए बैंक से 165 करोड़ रुपये सीसी लिमिट मांगी है। इसके लिए चीनी गिरवी रखकर बैंक से लोन मांगा गया है। इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है। सीसी लिमिट मंजूर हो गई तो बैंक मिलों को भुगतान के लिए लोन दे देगी। इससे चालू पेराई सत्र में भुगतान किसानों को समय पर मिलेगा। वहीं बिलाई चीनी मिल ने भुगतान के लिए आवेदन नहीं किया है।
वेव ग्रुप की बिजनौर चीनी मिल पर पिछले साल का 26.50 करोड़ तथा चांदपुर चीनी मिल 35.63 करोड़ रुपया बकाया है। ग्रुप को सॉफ्ट लोन न मिल पाने के कारण पिछले साल का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इस साल भी किसानों का चीनी मिल पर करोड़ों रुपया बकाया हो गया है। किसान पिछले साल के अलावा नए साल का भुगतान भी मांग रहे हैं। पिछले साल के भुगतान के लिए ग्रुप अभी तक सरकार से सॉफ्ट लोन मिलने की आस लगा रहा है। नए साल के भुगतान के लिए भी ग्रुप ने उत्तर प्रदेश को आपरेटिव बैंक से सीसी लिमिट (कैश क्रेडिट लिमिट) के लिए आवेदन किया है। ग्रुप ने सीसी लिमिट के लिए बैंक से उसकी चीनी गिरवी रखकर लोन मांगा है। ग्रुप की बिजनौर चीनी मिल ने भुगतान के लिए 80 करोड़ रुपये व चांदपुर चीनी मिल ने 85 करोड़ रुपये मांगा है।
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ऐसे बनती है सीसीएल
वर्तमान में चीनी के न्यूनतम दाम 2900 रुपये प्रति क्विंटल हैं। बैंक इस मूल्य पर चीनी गिरवी रखती है और कुल कीमत का 85 प्रतिशत लोन बैंक को दे देती है। इस लोन राशि से बैंक भुगतान कर देते हैं। चीनी मिल के पास बंधक रहती है। चीनी मिल को यह चीनी बेचने का अधिकार रहता है। चीनी मिल चीनी बेचकर मिल का लोन चुकाती रहती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश सरकार गारंटर बनती है।
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27 हजार से ज्यादा किसानों को फायदा
बिजनौर चीनी मिल से नौ हजार 381 तथा चांदपुर चीनी मिल से 17 हजार 859 किसान जुड़े हैं। दोनों मिलों को कुल 27 हजार 240 किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। अगर सीसी लिमिट मंजूर हुई तो इन सब किसानों को फायदा होगा।
बिलाई मिल ने नहीं किया आवेदन
बजाज ग्रुप ने बैंकों से पहले से ही छह हजार करोड़ का लोन ले रखा है। इस वजह से सॉफ्ट लोन के समय बैंकों ने ग्रुप की बिलाई चीनी मिल को लोन देने से मना कर दिया था। चालू पेराई सत्र के भुगतान के लिए ग्रुप ने सीसी लिमिट के लिए आवेदन ही नहीं किया है। अगर मिल सीसी लिमिट के लिए आवेदन करती तो भी लोन नहीं मिलता।
जल्द सॉफ्ट लोन मिलने के आसार
वेव ग्रुप की बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल को अब तक सॉफ्ट लोन नहीं मिला है। हालांकि चीनी मिलों को सॉफ्ट लोन के लिए अब भी आस लगा रखी है। चीनी मिल के अफसरों के अनुसार एक दो दिन में ही सरकार द्वारा सॉफ्ट लोन को मंजूरी मिल सकती है।
भुगतान नहीं तो आंदोलन
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार किसानों को गन्ने का भुगतान जल्द से जल्द मिलना चाहिए। अगर किसानों को भुगतान नहीं दिया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।