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नेपालियों को फिर किया डिस्चार्ज, हिंदू संगठनों ने कराया भर्ती
Updated Wed, 08 Aug 2018 01:09 AM IST
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नेपाली नागरिकों को फिर किया डिस्चार्ज
बिजनौर। बुधवार की रात को बैराज मार्ग पर हुई सड़क दुर्घटना में घायल नेपाली नागरिकों को मंगलवार को फिर से जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने डिस्चार्ज करने का प्रयास किया। बाद में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने फिर से भर्ती कराया।
बुधवार की रात नेपाली नागरिकों से भरी एक मिनी बस दिल्ली-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क किनारे खड़े पेड़ से टकरा गई थी। इस हादसे में नेपाल के जिला रुकुम निवासी अनिल रोका, बलबहादुर, सबीन जियान की मौत हो गई थी, जबकि 14 अन्य नेपाली यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इनमें से उमेश और चंद्रप्रसाद को चिकित्सकों ने गंभीर हालत में मेरठ के लिए रेफर कर दिया था। पैसे न होने के कारण अगले ही दिन नेपाली यात्री अपने दोनों घायल साथियों को लेकर पुन: जिला अस्पताल में आ गए। तब से वे वहां पर भर्ती हैं। घायल हरिप्रसाद, उमेश, अर्जुन रोका, बलबहादुर का आरोप है कि चिकित्सकों ने उन्हें मंगलवार को जिला अस्पताल से यह कहकर बाहर कर दिया कि अब उनकी छुट्टी कर दी गई है। इसलिए अब वे जिला अस्पताल से जा सकते हैं। इस मामले की सूचना नेपालियों ने समाजसेवी चौ. शूरवीर सिंह को दी। वे जिला अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों से बात कर पुन: घायलों को भर्ती कराया।
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बिजनौर। बुधवार की रात को बैराज मार्ग पर हुई सड़क दुर्घटना में घायल नेपाली नागरिकों को मंगलवार को फिर से जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने डिस्चार्ज करने का प्रयास किया। बाद में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने फिर से भर्ती कराया।
बुधवार की रात नेपाली नागरिकों से भरी एक मिनी बस दिल्ली-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क किनारे खड़े पेड़ से टकरा गई थी। इस हादसे में नेपाल के जिला रुकुम निवासी अनिल रोका, बलबहादुर, सबीन जियान की मौत हो गई थी, जबकि 14 अन्य नेपाली यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इनमें से उमेश और चंद्रप्रसाद को चिकित्सकों ने गंभीर हालत में मेरठ के लिए रेफर कर दिया था। पैसे न होने के कारण अगले ही दिन नेपाली यात्री अपने दोनों घायल साथियों को लेकर पुन: जिला अस्पताल में आ गए। तब से वे वहां पर भर्ती हैं। घायल हरिप्रसाद, उमेश, अर्जुन रोका, बलबहादुर का आरोप है कि चिकित्सकों ने उन्हें मंगलवार को जिला अस्पताल से यह कहकर बाहर कर दिया कि अब उनकी छुट्टी कर दी गई है। इसलिए अब वे जिला अस्पताल से जा सकते हैं। इस मामले की सूचना नेपालियों ने समाजसेवी चौ. शूरवीर सिंह को दी। वे जिला अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों से बात कर पुन: घायलों को भर्ती कराया।
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