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Bhadohi News: 1 करोड़ 75 लाख से पूर्ण होगा अधूरे सीएचसी का निर्माण कार्य
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दुर्गागंज। एक दशक से अधूरा पड़ा अभोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य जल्द ही शुरु होगा। निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए शासन स्तर से एक करोड़ 75 लाख रुपए बजट स्वीकृत किया गया है। सीएचसी बन कर तैयार होने के बाद क्षेत्र के करीब 10 दर्जन गांव के लाखों लोगों को बेहतर उपचार मिलेगा।
अभोली में स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण लोगों को ज्ञानपुर, सुरियावां जाना पड़ता है। इससे मरीजों को परेशानी तो होती ही है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। अभोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण की स्वीकृति 2009 में हुई थी। 2010 में निर्माण शुरू किया गया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्रा ने भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। इसके लिए 3 करोड़ 25 लाख रुपए का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन कार्यदायी संस्था और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते कार्य पूरा नहीं हो सका। सिर्फ बिल्डिंग बनकर तैयार है लेकिन प्लास्टर नहीं हुआ है। निर्माण कार्य में धांधली को लेकर तत्कालीन परियोजना प्रबंधक, एकाउटेंट को जेल भी जाना पड़ा था। इसके बाद से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। जिसे बनवाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार सांसद, विधायक से मांग किया, लेकिन वह सिर्फ एक औपचारिकता बन कर रह गया। ब्लाक में सीएचसी न होने के कारण लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा था। बेहतर उपचार के लिए मरीजों को ज्ञानपुर 25 किमी, तो सुरियावां 18 किमी जाना पड़ता था। इससे मरीज को परेशानी के साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता था। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके चक ने बताया कि कार्यदायी संस्था से बात हुई है। टेंडर हो चुका है। जिसके लिए एक करोड़ 75 लख रुपए की स्वीकृति मिली है।
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अभोली में स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण लोगों को ज्ञानपुर, सुरियावां जाना पड़ता है। इससे मरीजों को परेशानी तो होती ही है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। अभोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण की स्वीकृति 2009 में हुई थी। 2010 में निर्माण शुरू किया गया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्रा ने भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। इसके लिए 3 करोड़ 25 लाख रुपए का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन कार्यदायी संस्था और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते कार्य पूरा नहीं हो सका। सिर्फ बिल्डिंग बनकर तैयार है लेकिन प्लास्टर नहीं हुआ है। निर्माण कार्य में धांधली को लेकर तत्कालीन परियोजना प्रबंधक, एकाउटेंट को जेल भी जाना पड़ा था। इसके बाद से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। जिसे बनवाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार सांसद, विधायक से मांग किया, लेकिन वह सिर्फ एक औपचारिकता बन कर रह गया। ब्लाक में सीएचसी न होने के कारण लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा था। बेहतर उपचार के लिए मरीजों को ज्ञानपुर 25 किमी, तो सुरियावां 18 किमी जाना पड़ता था। इससे मरीज को परेशानी के साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता था। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके चक ने बताया कि कार्यदायी संस्था से बात हुई है। टेंडर हो चुका है। जिसके लिए एक करोड़ 75 लख रुपए की स्वीकृति मिली है।
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