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Bhadohi News: निजीकरण के विरोध में संघर्ष समिति ने दिनभर किया विरोध प्रदर्शन

Fri, 30 May 2025 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 30 May 2025 12:12 AM IST
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Sangharsh Samiti protested throughout the day against privatization
भदोही। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर बृहस्पतिवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय के दिनभर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने दावा किया कि निजीकरण के विरोध में हुए प्रदर्शन में आज 42 जनपदों के 27 लाख कर्मचारी शामिल रहे। इसमें बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंता रहे। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने निगमों के शीर्ष अधिकारियों के प्रति आक्रोश व्यक्त किया। यह भी दावा किया गया कि बिजली व्यवस्था बनी रहे। इसके लिए कुछ कर्मचारियों को धरने में शामिल होने से छूट दी गई थी। जिला संयोजक धीरेंद्र प्रताप कौशल ने बताया कि निजीकरण के लिए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट का शपथपत्र झूठा होने के बाद भी उसे क्लीन चिट दे गई है। इससे साफ है कि निगमों के अधिकारी निजीकरण की प्रक्रिया तेज कर रहे हैं। आरोप लगाया कि इससे लगता है कि प्रबंधन की निजी घरानों से मिलीभगत है। यही कारण है कि निधि नारंग को तीसरी बार सेवा विस्तार दिया गया है। कहा कि विद्युत वितरण निगमों को घाटे में दिखाकर निजीकरण का निर्णय लिया गया है। इससे उप्र के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। इसके विरोध में पिछले छह माह से अनवरत आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार ने एक बार भी वार्ता की आवश्यकता नहीं समझी। जिला संयोजक ने बताया कि उप्र में गलत पावर परचेज एग्रीमेंट के नाते विद्युत वितरण निगमों को निजी बिजली उत्पादन कंपनियों से बिना एक भी यूनिट बिजली खरीदे 6761 करोड़ रुपए सालाना भुगतान करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदने से लगभग दस हजार करोड प्रति वर्ष अतिरिक्त भार पड़ रहा है। इतना ही नहीं उप्र में सरकारी विभागों पर 14 हजार चार सौ करोड का बिजली बकाया है। सरकार की नीति अनुसार किसानों को मुफ्त बिजली दी जाती है। गरीबी रेखा से नीचे के बिजली उपभोक्ताओं को तीन रुपए यूनिट की दर पर बिजली दी जाती है, जबकि बिजली की खरीद ही 7.85 रुपये यूनिट पडती है। बुनकरों को सब्सिडी लगभग 22 हजार करोड़ रुपए बनता है। इसी सबको घाटा दिखा कर निजीकरण किया जा रहा है, जो हमें मान्य नहीं है। प्रदर्शन में आलोक ओझा, कपिल देव यादव, अजय शंकर सिंह, उदयभान पाल, सत्य प्रकाश मौर्य, अभिषेक प्रजापति, राजकुमार गौड़, सौरभ यादव, अभिषेक वर्मा आदि रहे।
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