{"_id":"6a70d5f432dc4405cc053c42","slug":"only-one-radiologist-out-of-six-leaving-trainees-in-charge-bhadohi-news-c-191-1-gyn1001-146743-2026-08-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: छह में से सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट, प्रशिक्षुओं के हाथों में कमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: छह में से सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट, प्रशिक्षुओं के हाथों में कमान
विज्ञापन
जिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड कक्ष। संवाद
ज्ञानपुर। जिले की 20 लाख की आबादी पर एक रेडियोलॉजिस्ट है। चार स्वास्थ्य केंद्रों पर सृजित छह पदों में केवल एक रेडियोलॉजिस्ट होने से प्रशिक्षु महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। प्रशिक्षुओं भी केवल दो ही हैं। रेडियोलॉजिस्ट की कमी होने से मरीजों को परेशानी होती है। तमाम मरीज सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न हो पाने के कारण निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों का रुख करने को विवश हैं। जिले में जिला अस्पताल, सौ शय्या के अलावा भदोही के महाराजा बलवंत राजकीय चिकित्सालय व गोपीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलती है। जिसमें जिला अस्पताल व सौ शय्या में रेडियोलॉजिस्ट के दो-दो पद सृजित हैं। वहीं अन्य दो अस्पताल में एक-एक पद हैं। रेडियोलॉजिस्ट के छह पदों में केवल एक जिला अस्पताल तैनात किया गया है। वहीं अन्य पर प्रशिक्षु इसकी कमान संभाले हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रशिक्षु यदि गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया है, तो वही कर सकता है। इसी तरह पेट वाला सिर्फ पेट कर सकता है। सिर्फ रेडियोलॉजिस्ट को अथॉरिटी है कि हर तरह से अल्ट्रासाउंड कर सकते हैं। लेकिन जिला में उल्टी गंगा बह रही है। मरीज सेंटर पर पहुंच जाए, प्रशिक्षु हर तरह के अल्ट्रासाउंड करते हैं। गलत-सही रिपोर्ट मरीज के हाथों में थमा देते हैं। दो साल पहले गोपीगंज के एक सेंटर पर प्रसव पीड़िता ने अल्ट्रासाउंड कराई थी, रिपोर्ट ऑल इज वेल रही। प्रसव के बाद बच्चे का सिर विकसित नहीं हुआ था, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने हंगामा किया, लेकिन सेंटर पर कुछ नहीं हुआ।
46 अल्ट्रासाउंड सेंटर में से केवल दो के पास रेडियोलॉजिस्ट
जिले में जो हाल सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट का है। वहीं हाल निजी अस्पतालों में भी है। गोपीगंज सीएचसी और भदोही एमबीएस में प्रशिक्षु अल्ट्रासाउंड करते हैं। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है। वहीं निजी सेंटरों पर 800 रुपये से ही अल्ट्रासाउंड शुरू होता है। जिले में कुल 46 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से सिर्फ 2 सेंटर पर ही रेडियोलॉजिस्ट मिलेंगे। बाकी 45 सेंटर की कमान प्रशिक्षुओं के भरोसे है। प्रशिक्षु मतलब ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले हैं। विभाग का तर्क है, रेडियोलॉजिस्ट की कमी है, प्रशिक्षु के भरोसे काम चल रहा है।
प्रशिक्षुओं को ट्रेनिंग दी गई है। वह अल्ट्रासाउंड करते हैं, रिक्त पड़े रेडियोलॉजिस्ट पद की सूचना शासन को दी गई है। हर तीन-तीन महीने में सेंटरों की जांच होती रहती है।-- डॉ. एसके चक, सीएमओ।
विज्ञापन
विज्ञापन
46 अल्ट्रासाउंड सेंटर में से केवल दो के पास रेडियोलॉजिस्ट
जिले में जो हाल सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट का है। वहीं हाल निजी अस्पतालों में भी है। गोपीगंज सीएचसी और भदोही एमबीएस में प्रशिक्षु अल्ट्रासाउंड करते हैं। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है। वहीं निजी सेंटरों पर 800 रुपये से ही अल्ट्रासाउंड शुरू होता है। जिले में कुल 46 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से सिर्फ 2 सेंटर पर ही रेडियोलॉजिस्ट मिलेंगे। बाकी 45 सेंटर की कमान प्रशिक्षुओं के भरोसे है। प्रशिक्षु मतलब ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले हैं। विभाग का तर्क है, रेडियोलॉजिस्ट की कमी है, प्रशिक्षु के भरोसे काम चल रहा है।
विज्ञापन
प्रशिक्षुओं को ट्रेनिंग दी गई है। वह अल्ट्रासाउंड करते हैं, रिक्त पड़े रेडियोलॉजिस्ट पद की सूचना शासन को दी गई है। हर तीन-तीन महीने में सेंटरों की जांच होती रहती है।
विज्ञापन