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लॉकडाउन: सात दिन में आठ मवेशियों की मौत
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भदोही के अभोली के मसुधी गौशाला में टहलते मवेशी।
- फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर/ दुर्गागंज। कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी और लॉकडाउन का असर अब पशु संरक्षण केंद्रों पर भी दिखने लगा है। चारा-पानी उपचार के अभाव में मवेशी दम तोड़ने लगे हैं। अभोली के मसुधी गोशाला में एक सप्ताह में आठ मवेशियों की मौत हो गई। अफसर भले ही कुछ न कहें लेकिन अन्य गौशालाओं की देखें तो यह आंकड़ा 30 से 35 तक पहुंच जाएगा।
सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिले में 20 से अधिक अस्थाई गोशालाएं संचालित की गई। पिपरिस में डेढ़ करोड़ की लागत से स्थायी गोशाला भी बनाई गई। जिसमें कुल तीन हजार से अधिक मवेशियों को संरक्षित किया गया है। जिनकी देखरेख पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किया जा रहा है। लॉकडाउन में कोरोना के डर से जिलास्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी गौ संरक्षण केंद्रों पर हकीकत देखने नहीं पहुंच रहे हैं। जिससे केंद्रों पर चारा, पानी और छांव की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। अव्यवस्थाओं के चलते अकेले मसुधी गांव में बने अस्थाई गोशाला में सात दिन के अंदर आठ पशुओं की अकाल मौत हो गई। यहां पर कुल 67 मवेशी रखे गए हैं।
लॉकडाउन का बहाना बनाकर ब्लॉक प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को भुला चुका है। ग्राम प्रधान, पशु चिकित्सक कागजी कोरम पूरा करने में कमी नहीं छोड़ रहे हैं। संरक्षण लेने वाले पशुओं का उचित देखभाल न होने के कारण अब तक धूप और गर्मी, चारा-पानी के अभाव में मरने की संख्या में दर्जन भर पार कर रही है लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं है। देखभाल कर रहे वनवासी परिवार ने बताया कि मामले की प्रधान से शिकायत की गई लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.जेपी सिंह ने कहा कि मवेशियों के मरने का मामला संज्ञान में है। निरीक्षण कर रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। कहा कि पशुपालन विभाग की ओर से ब्लॉक प्रशासन और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में पशुओं के लिए मिलने वाली धनराशि को भेजी जाती है। धनराशि मिलने के बाद सभी तरह की जिम्मेदारी बीडीओ, प्रधान पर आ जाती है। पैसा होने के बाद भी इस तरह की अनदेखी अक्षम्य है।
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सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिले में 20 से अधिक अस्थाई गोशालाएं संचालित की गई। पिपरिस में डेढ़ करोड़ की लागत से स्थायी गोशाला भी बनाई गई। जिसमें कुल तीन हजार से अधिक मवेशियों को संरक्षित किया गया है। जिनकी देखरेख पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किया जा रहा है। लॉकडाउन में कोरोना के डर से जिलास्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी गौ संरक्षण केंद्रों पर हकीकत देखने नहीं पहुंच रहे हैं। जिससे केंद्रों पर चारा, पानी और छांव की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। अव्यवस्थाओं के चलते अकेले मसुधी गांव में बने अस्थाई गोशाला में सात दिन के अंदर आठ पशुओं की अकाल मौत हो गई। यहां पर कुल 67 मवेशी रखे गए हैं।
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लॉकडाउन का बहाना बनाकर ब्लॉक प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को भुला चुका है। ग्राम प्रधान, पशु चिकित्सक कागजी कोरम पूरा करने में कमी नहीं छोड़ रहे हैं। संरक्षण लेने वाले पशुओं का उचित देखभाल न होने के कारण अब तक धूप और गर्मी, चारा-पानी के अभाव में मरने की संख्या में दर्जन भर पार कर रही है लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं है। देखभाल कर रहे वनवासी परिवार ने बताया कि मामले की प्रधान से शिकायत की गई लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.जेपी सिंह ने कहा कि मवेशियों के मरने का मामला संज्ञान में है। निरीक्षण कर रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। कहा कि पशुपालन विभाग की ओर से ब्लॉक प्रशासन और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में पशुओं के लिए मिलने वाली धनराशि को भेजी जाती है। धनराशि मिलने के बाद सभी तरह की जिम्मेदारी बीडीओ, प्रधान पर आ जाती है। पैसा होने के बाद भी इस तरह की अनदेखी अक्षम्य है।