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नवीनीकरण न होने से खराब हो रहे भूअभिलेख
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चिथड़े में तब्दील भूअभिलेख खंगालते विभाग के मुंशी। संवाद
- फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। कलेक्टेट और तहसीलों में नवीनीकरण न होने के कारण भूअभिलेख खराब होते जा रहे है। साफ-सफाई के दौरान अभिलेखीय रिकार्ड कूड़ेदान में फेंके जा रहे है। संपूर्ण रिकार्ड न मिलने से काश्तकार परेशान हैं। भूमाफिया विभागीय मिलीभगत कराकर कीमती जमीनों को अपने नाम कराने, नक्शे में फेरबदल कराकर रेलवे कॉलोनी, तालाब, चारागाह, पशु शव निस्तारण गाह, कब्रिस्तान, मंदिर, मस्जिद, सड़क तक की जमीन विवादास्पद कर दिया जा रहा है।
सुरियावां के खरगापुर निवासी रामसूरत यादव ने बताया कि एक जमीन की हकीकत देखने के लिए छह बार से चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभिलेख नहीं मिल सके। सदर ब्लॉक के अकोढ़ा निवासी अर्जुन प्रसाद ने बताया कि जमीन का नक्शा जानने के लिए आया था किसी तरह मिला है लेकिन वर्तमान परिवेश में क्या स्थिति है लेखपाल ही बता सकेंगे। भू-अभिलेखपाल मंजू श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 1321 से अब तक के रिकार्ड ठीकठाक हैं, लेकिन 1320 से पूर्व तक के रिकार्डों की हालत इतने खराब हैं कि उन्हें कपड़े की गठरी का रुप देकर संभालना पड़ता है। किसी को जरूरत पड़ने पर रिकार्ड कितने टुकड़े में हुए है गिनती और मिलान करना मुश्किल बना रहता है। नवीनीकरण के लिए जिला प्रशासन को कई बार से कहा जा चुका है।
खतौनी की तरह ऑनलाइन व्यवस्था से सुरक्षित होंगे अभिलेख
1994 में भदोही जिला बनने पर वाराणसी और कमिश्नरी मिर्जापुर से आए भूअभिलेखों की स्थिति पूर्व से दयनीय थी। तब से अब तक कंप्यूटरीकृत व्यवस्था से काश्तकारों को रिकार्ड मिलना भी शुरू हो जाता। आने वाले समय में शुल्क निर्धारित कर आनलाइन व्यवस्था से पुराने रिकार्ड प्राप्त कराए जाए। - सूर्यबली बिंद
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1321 से रिकार्ड सही होने का दावा भूअभिलेख विभाग कर रहा है लेकिन 85-86 का भी रिकार्ड मांगने पर सही तरीके से नहीं मिल पाते। रिकार्डों को प्राप्त करने की पुरानी व्यवस्था बंद कर नये सिरे से रिकार्डों का नवीनीकरण कराते हुए प्रशासन खतौनी की तरह शुल्क लेकर उपलब्ध कराया जाए। इस व्यवस्था से काश्तकारों की समस्या नहीं बढ़ेगी। - मुख्तार अली
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सुरियावां के खरगापुर निवासी रामसूरत यादव ने बताया कि एक जमीन की हकीकत देखने के लिए छह बार से चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभिलेख नहीं मिल सके। सदर ब्लॉक के अकोढ़ा निवासी अर्जुन प्रसाद ने बताया कि जमीन का नक्शा जानने के लिए आया था किसी तरह मिला है लेकिन वर्तमान परिवेश में क्या स्थिति है लेखपाल ही बता सकेंगे। भू-अभिलेखपाल मंजू श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 1321 से अब तक के रिकार्ड ठीकठाक हैं, लेकिन 1320 से पूर्व तक के रिकार्डों की हालत इतने खराब हैं कि उन्हें कपड़े की गठरी का रुप देकर संभालना पड़ता है। किसी को जरूरत पड़ने पर रिकार्ड कितने टुकड़े में हुए है गिनती और मिलान करना मुश्किल बना रहता है। नवीनीकरण के लिए जिला प्रशासन को कई बार से कहा जा चुका है।
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खतौनी की तरह ऑनलाइन व्यवस्था से सुरक्षित होंगे अभिलेख
1994 में भदोही जिला बनने पर वाराणसी और कमिश्नरी मिर्जापुर से आए भूअभिलेखों की स्थिति पूर्व से दयनीय थी। तब से अब तक कंप्यूटरीकृत व्यवस्था से काश्तकारों को रिकार्ड मिलना भी शुरू हो जाता। आने वाले समय में शुल्क निर्धारित कर आनलाइन व्यवस्था से पुराने रिकार्ड प्राप्त कराए जाए। - सूर्यबली बिंद
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1321 से रिकार्ड सही होने का दावा भूअभिलेख विभाग कर रहा है लेकिन 85-86 का भी रिकार्ड मांगने पर सही तरीके से नहीं मिल पाते। रिकार्डों को प्राप्त करने की पुरानी व्यवस्था बंद कर नये सिरे से रिकार्डों का नवीनीकरण कराते हुए प्रशासन खतौनी की तरह शुल्क लेकर उपलब्ध कराया जाए। इस व्यवस्था से काश्तकारों की समस्या नहीं बढ़ेगी। - मुख्तार अली