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पत्नी की गैर इरादतन हत्या में पति दोषी करार
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ज्ञानपुर। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक प्रथम की अदालत ने पत्नी की गैर इरादतन हत्या में पति को दोषी करार दिया। तीन साल पूर्व हुई घटना में कोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सोमवार को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी।
घटना के मुताबिक रमेश चंद्र पाठक की बहन उर्मिला का विवाह धीरेंद्र पांडेय निवासी पाली सुरियावां के साथ हुआ था। रमेश चंद्र ने आरोप लगाया था कि धीरेंद्र उसकी बहन को अक्सर मारता-पीटता और खाना भी नहीं देता। एक अगस्त 2019 को सुबह 11 बजे दिन में उसकी बहन उर्मिला को उसके पति ने लात-घूंसा और डंडे से बुरी तरह मारापीटा। जिससे उसके शरीर में काफी चोट आई और तीन अगस्त को उसकी मौत हो गई। वादी मुकदमा की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद से ही आरोपी जेल में है। मामले में पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपपत्र प्रेषित किया गया था। जहां गवाहों के बयान दर्ज किए गए और तथ्य के कुछ गवाह बयान से पलट भी गए। गवाहों ने न्यायालय के समक्ष घटना के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की।
दोषी पक्ष की तरफ से अधिवक्ता नंदलाल शुक्ला ने सीढ़ी से गिरकर मौत होने का तर्क दिया। वहीं दूसरी तरफ से शासकीय अधिवक्ता प्रवेश तिवारी ने तर्क दिया कि मृतका के शरीर पर आई चोट सीढ़ी से गिरने से नहीं आ सकती। चोट के गहरे निशान मारने-पीटने से ही आ सकते हैं। उसकी मौत ससुराल में हुई। दोनों पक्ष के तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश सुबोध सिंह की अदालत ने पति धीरेंद्र पांडेय को गैर इरादतन हत्या की धारा 304 भाग दो के तहत दोषी करार दिया। सजा की बिंदु पर सुनवाई के लिए सोमवार की तिथि मुकर्रर की गई। वहीं दूसरी ओर पत्नी की गैर इरादतन हत्या के मामले में न्यायाधीश सुबोध सिंह ने भी अहम टिप्पणी करते हुए निर्णय में लिखा कि गवाह झूठ बोल सकते हैं, लेकिन परिस्थितियां नहीं।
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घटना के मुताबिक रमेश चंद्र पाठक की बहन उर्मिला का विवाह धीरेंद्र पांडेय निवासी पाली सुरियावां के साथ हुआ था। रमेश चंद्र ने आरोप लगाया था कि धीरेंद्र उसकी बहन को अक्सर मारता-पीटता और खाना भी नहीं देता। एक अगस्त 2019 को सुबह 11 बजे दिन में उसकी बहन उर्मिला को उसके पति ने लात-घूंसा और डंडे से बुरी तरह मारापीटा। जिससे उसके शरीर में काफी चोट आई और तीन अगस्त को उसकी मौत हो गई। वादी मुकदमा की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद से ही आरोपी जेल में है। मामले में पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपपत्र प्रेषित किया गया था। जहां गवाहों के बयान दर्ज किए गए और तथ्य के कुछ गवाह बयान से पलट भी गए। गवाहों ने न्यायालय के समक्ष घटना के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की।
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दोषी पक्ष की तरफ से अधिवक्ता नंदलाल शुक्ला ने सीढ़ी से गिरकर मौत होने का तर्क दिया। वहीं दूसरी तरफ से शासकीय अधिवक्ता प्रवेश तिवारी ने तर्क दिया कि मृतका के शरीर पर आई चोट सीढ़ी से गिरने से नहीं आ सकती। चोट के गहरे निशान मारने-पीटने से ही आ सकते हैं। उसकी मौत ससुराल में हुई। दोनों पक्ष के तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश सुबोध सिंह की अदालत ने पति धीरेंद्र पांडेय को गैर इरादतन हत्या की धारा 304 भाग दो के तहत दोषी करार दिया। सजा की बिंदु पर सुनवाई के लिए सोमवार की तिथि मुकर्रर की गई। वहीं दूसरी ओर पत्नी की गैर इरादतन हत्या के मामले में न्यायाधीश सुबोध सिंह ने भी अहम टिप्पणी करते हुए निर्णय में लिखा कि गवाह झूठ बोल सकते हैं, लेकिन परिस्थितियां नहीं।
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