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Bhadohi News: प्रदेश में पहली बार गंगा की सीमाओं की होगी मैपिंग, खनन और कटान रोकने के लिए बनाए जाएंगे पिलर
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सीतामढ़ी गंगा घाट। संवाद
ज्ञानपुर। जनपद के 36 किलोमीटर के दायरे में 47 गांवों से होकर गुजरने वाली गंगा में अतिक्रमण, खनन और कटान रोकने के लिए गंगा की सीमाओं की मैपिंग की जाएगी। वन विभाग अप्रैल से मैपिंग कराने की तैयारी में जुटा है। मैपिंग के बाद सीमाओं पर कटानरोधी बांस और लिसोड़ के पौधे लगाने के साथ-साथ पिलर बनाए जाएंगे। यह कार्य प्रदेश में पहली बार भदोही में कराया जा रहा है। सीमाओं की मैपिंग के लिए कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी गई है। गंगा के कछार क्षेत्रों में खेती के नाम पर सबसे ज्यादा अतिक्रमण किया जाता है। इसके अलावा बिहरोजपुर, रामपुर, बेरासपुर और इब्राहिमपुर जैसे क्षेत्रों में खनन की लगातार शिकायत मिलती है। हर साल जुलाई, अगस्त और सितंबर में गंगा उफान पर रहती हैं। सीमांकन होने के बाद कटान संबंधी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
कछुआ सेंचुरी प्रोजेक्ट के तहत होगा काम
भदोही, प्रयागराज और मिर्जापुर जिलों में गंगा नदी के 30 किलोमीटर के तटीय क्षेत्र को कछुआ सेंचुरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। भदोही के कोनिया क्षेत्र के बारीपुर और उपवार इलाके भी शामिल हैं। यहां खनन और मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है। इसका उद्देश्य जलीय जैव विविधता की रक्षा करना है। कछुआ सेंचुरी प्रोजेक्ट के तहत ही गंगा की सीमाओं का पता लगाए जाने का काम शुरू किया गया है।
कटान रोकने के लिए रोपे जाएंगे कटानरोधी पौधे
वन विभाग इस बार मैंग्रोव, बांस, लिसोड़, अर्जुन, जामुन, इमली, पीपल, पाकड़ आदि पौधे गंगा किनारे रोपित करेगा। यह पौधे जलीय भूमि के किनारे लगाए जाते हैं। ताकि कटान रोकने में मदद मिले। बांस में कल्ले बहुत जल्द निकलते हैं। एक साल में ही बांस का जंजाल फैल जाता है।
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जिले में गंगा का दयारा
जिले में गंगा लंबाई - 36 किमी
गंगा के तटवर्ती गांव - 47
कटान प्रभावित गांव - 12 गांव
कछुआ सेंचुरी का दायरा - 30 किमी
मैपिंग के बाद क्या होंगे फायदे
- वन्य जीवों की रक्षा
- कटान से मुक्ति
- अतिक्रमण से मुक्ति
- खनन पर रोक
- जलीव जैव विधिवता का संरक्षण
गंगा के सीमाओं की मैपिंग कराई जाएगी। इससे गंगा की सीमा की पहचान होगी। निजी संस्था को नामित किया गया है। इस कार्य से कटान रोकने के साथ-साथ गंगा की जमीनों पर अतिक्रमण की समस्या भी रोकी जा सकेगी। - विवेक यादव, डीएफओ, भदोही।
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कछुआ सेंचुरी प्रोजेक्ट के तहत होगा काम
भदोही, प्रयागराज और मिर्जापुर जिलों में गंगा नदी के 30 किलोमीटर के तटीय क्षेत्र को कछुआ सेंचुरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। भदोही के कोनिया क्षेत्र के बारीपुर और उपवार इलाके भी शामिल हैं। यहां खनन और मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है। इसका उद्देश्य जलीय जैव विविधता की रक्षा करना है। कछुआ सेंचुरी प्रोजेक्ट के तहत ही गंगा की सीमाओं का पता लगाए जाने का काम शुरू किया गया है।
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कटान रोकने के लिए रोपे जाएंगे कटानरोधी पौधे
वन विभाग इस बार मैंग्रोव, बांस, लिसोड़, अर्जुन, जामुन, इमली, पीपल, पाकड़ आदि पौधे गंगा किनारे रोपित करेगा। यह पौधे जलीय भूमि के किनारे लगाए जाते हैं। ताकि कटान रोकने में मदद मिले। बांस में कल्ले बहुत जल्द निकलते हैं। एक साल में ही बांस का जंजाल फैल जाता है।
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जिले में गंगा का दयारा
जिले में गंगा लंबाई - 36 किमी
गंगा के तटवर्ती गांव - 47
कटान प्रभावित गांव - 12 गांव
कछुआ सेंचुरी का दायरा - 30 किमी
मैपिंग के बाद क्या होंगे फायदे
- वन्य जीवों की रक्षा
- कटान से मुक्ति
- अतिक्रमण से मुक्ति
- खनन पर रोक
- जलीव जैव विधिवता का संरक्षण
गंगा के सीमाओं की मैपिंग कराई जाएगी। इससे गंगा की सीमा की पहचान होगी। निजी संस्था को नामित किया गया है। इस कार्य से कटान रोकने के साथ-साथ गंगा की जमीनों पर अतिक्रमण की समस्या भी रोकी जा सकेगी। - विवेक यादव, डीएफओ, भदोही।