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कर्मचारी तैनात हों तो शुरू हो डायलिसिस सेंटर
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सौ शैय्या वाले अस्पताल में 58.36 लाख रुपये खर्च कर तैयार डायलिसिस सेंटर कर्मचारियों के अभाव में शुरू नहीं हो पा रहा है। इसके चलते मरीजों को डायलिसिस के लिए दूसरे शहरों वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज आदि की ओर रुख करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने बीते मई माह में डायलिसिस सेंटर शुरू करने का निर्देश दिया था, इसके बावजूद जिम्मेदार उदासीन बने हुए हैं।
मई के दूसरे सप्ताह में डीएम आर्यका अखौरी ने सौ शैय्या अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान तमाम कमियां मिलीं। डायलिसिस भवन देखने के बाद उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को 20 मई तक सेंटर शुरू कराने का निर्देश दिया था। इस बीच एक माह से अधिक समय बीत गया है और अब तक डायलिसिस सेंटर का संचालन शुरू नहीं हो सका हैं। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जबकि 58.36 लाख रुपये की लागत से डायलिसिस भवन बनकर तैयार है। सेंटर चालू नहीं होने के कारण किडनी के मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज आदि शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। इससे उनका अतिरिक्त पैसा भी खर्च होता है। सेंटर का संचालन शुरू हो जाए तो यहां के मरीजों को सहूलियत मिलेगी और दूसरे जिले में भी नहीं जाना पड़ेगा। डायलिसिस सेंटर के मैनेजर अमित श्रीवास्तव ने बताया कि 10 बेड का डायलिसिस सेंटर है। आइसोलेशन वार्ड, डायलिसिस वार्ड, ओपीडी वार्ड है। आरो मशीन के लिए अलग वार्ड बना है। सेंटर चालू होने के बाद किडनी के मरीजों को दूसरे जनपद में जाने की जरूरत नहीं होगी। सौ शैय्या अस्पताल के सीएमएस अनिरुद्ध सिंह का कहना है कि सेंटर में अभी पूर्ण रूप से संसाधन नहीं है। बेड और मशीनें आ चुकी हैं। स्टाफ की जरूरत है, कुछ स्टाफ और आ जाए तो सेंटर का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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मई के दूसरे सप्ताह में डीएम आर्यका अखौरी ने सौ शैय्या अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान तमाम कमियां मिलीं। डायलिसिस भवन देखने के बाद उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को 20 मई तक सेंटर शुरू कराने का निर्देश दिया था। इस बीच एक माह से अधिक समय बीत गया है और अब तक डायलिसिस सेंटर का संचालन शुरू नहीं हो सका हैं। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जबकि 58.36 लाख रुपये की लागत से डायलिसिस भवन बनकर तैयार है। सेंटर चालू नहीं होने के कारण किडनी के मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज आदि शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। इससे उनका अतिरिक्त पैसा भी खर्च होता है। सेंटर का संचालन शुरू हो जाए तो यहां के मरीजों को सहूलियत मिलेगी और दूसरे जिले में भी नहीं जाना पड़ेगा। डायलिसिस सेंटर के मैनेजर अमित श्रीवास्तव ने बताया कि 10 बेड का डायलिसिस सेंटर है। आइसोलेशन वार्ड, डायलिसिस वार्ड, ओपीडी वार्ड है। आरो मशीन के लिए अलग वार्ड बना है। सेंटर चालू होने के बाद किडनी के मरीजों को दूसरे जनपद में जाने की जरूरत नहीं होगी। सौ शैय्या अस्पताल के सीएमएस अनिरुद्ध सिंह का कहना है कि सेंटर में अभी पूर्ण रूप से संसाधन नहीं है। बेड और मशीनें आ चुकी हैं। स्टाफ की जरूरत है, कुछ स्टाफ और आ जाए तो सेंटर का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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