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संस्कृत भारतीय एकता और अखंडता की मजबूत कड़ी : डॉ. रमापति
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नगर के टेकौर स्थित भागीरथी ट्रस्ट आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में शुक्रवार को संस्कृत सप्ताह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गंगा तट पर वैदिक परंपरा के अनुसार गणस्नान से हुई। इसके बाद महाविद्यालय परिसर में ऋषि पूजन और हवन किया गया।
शिवाकांत पाठक के आचार्यत्व में प्राचार्य डॉ. रमापति त्रिपाठी, शिक्षक, छात्र और नगर के गणमान्य लोगों ने गंगा तट पर गणस्नान किया। इसके बाद सभागार में प्राचार्य की अध्यक्षता में संगोष्ठी आयोजित की गई। छात्रों ने मंगलाचरण और स्वागत गान प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रणव त्रिपाठी, अर्पित मिश्रा, रूपक पांडेय, आदित्य मिश्रा, अंकित पाठक आदि छात्रों ने संस्कृत में श्लोकों का वाचन किया। प्राचार्य डॉ. रमापति त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति की आधारभूत भाषा है। भारतीय एकता और अखंडता को बनाए रखने में संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान-विज्ञान की संवाहक है। कार्यक्रम का संचालन हिंदी के प्राध्यापक रमापति दीक्षित ने किया। इस अवसर पर विभा, प्रिंस, शशिकांत मिश्रा, वंशीधर चतुर्वेदी, कैलाशपति त्रिपाठी, सुनील दीक्षित, हिमांशु, वाचस्पति सहित अन्य मौजूद रहे।
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शिवाकांत पाठक के आचार्यत्व में प्राचार्य डॉ. रमापति त्रिपाठी, शिक्षक, छात्र और नगर के गणमान्य लोगों ने गंगा तट पर गणस्नान किया। इसके बाद सभागार में प्राचार्य की अध्यक्षता में संगोष्ठी आयोजित की गई। छात्रों ने मंगलाचरण और स्वागत गान प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रणव त्रिपाठी, अर्पित मिश्रा, रूपक पांडेय, आदित्य मिश्रा, अंकित पाठक आदि छात्रों ने संस्कृत में श्लोकों का वाचन किया। प्राचार्य डॉ. रमापति त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति की आधारभूत भाषा है। भारतीय एकता और अखंडता को बनाए रखने में संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान-विज्ञान की संवाहक है। कार्यक्रम का संचालन हिंदी के प्राध्यापक रमापति दीक्षित ने किया। इस अवसर पर विभा, प्रिंस, शशिकांत मिश्रा, वंशीधर चतुर्वेदी, कैलाशपति त्रिपाठी, सुनील दीक्षित, हिमांशु, वाचस्पति सहित अन्य मौजूद रहे।
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