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माता पिता की सेवा ही प्रभु सेवा:शास्त्री
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सीतामढ़ी। कोनिया क्षेत्र के कूड़ीखुर्द गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक हरिकृष्ण महराज ने परीक्षित और ध्रुव की कथा सुनाकर भगवत प्रेमियों को भक्तिरस के सागर में गोते लगवाए।
कहा कि भागवत की कथा उपदेश नहीं उपचार है। इसलिए हर प्राणी को कथारूपी अमृत को अपने जीवन में उतार लेना चाहिए। सांसारिक भागदौड़ से निकलकर हमें अपने प्रभु के लिए भी कुछ समय अवश्य निकालना चाहिए। उन्होंने राजा परीक्षित और ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि हमें इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। राजा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर मोक्ष की प्राप्ति की। वहीं बालक ध्रुव ने अपनी भक्ति के बल पर अमरत्व को प्राप्त किया। कहा कि मानव जीवन अच्छे कर्मों के लिए मिला है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है कि अच्छा कर्म करें। कहा कि याद रखो इस धरती पर खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाओगे। दूसरों को दु:ख देने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता। माता-पिता इस धरती पर साक्षात भगवान के रूप हैं जिसने माता-पिता की सेवा कर ली मानो भगवान की सेवा कर गंगा सागर की यात्रा कर ली। इस मौके पर कमलाशंकर मिश्रा, संगमलाल पांडेय, लालमणि पांडेय, चंद्रप्रकाश, बाबादास पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
कहा कि भागवत की कथा उपदेश नहीं उपचार है। इसलिए हर प्राणी को कथारूपी अमृत को अपने जीवन में उतार लेना चाहिए। सांसारिक भागदौड़ से निकलकर हमें अपने प्रभु के लिए भी कुछ समय अवश्य निकालना चाहिए। उन्होंने राजा परीक्षित और ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि हमें इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। राजा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर मोक्ष की प्राप्ति की। वहीं बालक ध्रुव ने अपनी भक्ति के बल पर अमरत्व को प्राप्त किया। कहा कि मानव जीवन अच्छे कर्मों के लिए मिला है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है कि अच्छा कर्म करें। कहा कि याद रखो इस धरती पर खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाओगे। दूसरों को दु:ख देने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता। माता-पिता इस धरती पर साक्षात भगवान के रूप हैं जिसने माता-पिता की सेवा कर ली मानो भगवान की सेवा कर गंगा सागर की यात्रा कर ली। इस मौके पर कमलाशंकर मिश्रा, संगमलाल पांडेय, लालमणि पांडेय, चंद्रप्रकाश, बाबादास पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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