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अपात्रों की भेंट चढ़ रही पीएम आवास योजना

Tue, 15 Jan 2019 11:46 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jan 2019 11:46 PM IST
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अपात्रों की भेंट चढ़ रही पीएम आवास योजना

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ज्ञानपुर। गरीबों को पक्की छत मुहैया कराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम में अपात्रों का चयन रोड़ा बन रहा है। 2016 से अब तक तीन वित्तीय वर्ष में करीब नौ हजार परिवारों को ही आवास मिल पाया है। वहीं 1700 से अधिक आवास अब भी निर्माणाधीन हैं। योजना में अब तक 121 करोड़ से अधिक की रकम खर्च हो चुकी है। ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की मिलीभगत से 500 अपात्रों के चयन से डेढ़ करोड़ की रिकवरी अटकी हुई है। हालांकि विभाग अपात्रों से रिकवरी की तैयारी तेज कर दी है।

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद गरीबों को पक्का छत देने की मुहीम तेज हो गई थी। जिसे पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना लागू की। 2016 से शुरू हुई प्रधानमंत्री आवास योजना में जिले के लगभग नौ हजार लोगों को पक्की छत मुहैया हो चुकी है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वित्तीय वर्ष 2016-17 में 5981 आवास लक्ष्य के मुकाबले सात हजार ने आवेदन किया है, जिसमें पांच हजार 933 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 40-40 हजार भेजा गया। उसके बाद जांच में करीब 550 लाभार्थी अपात्र मिले तो दूसरी किस्त में करीब पांच सौ कट गए और 5552 को ही धनराशि भेजी गई। तीसरी किस्त 5403 को गई, जिसमें 5402 आवास पूर्ण हुए। एक या दो आवास जमीन विवाद के चलते लटक गए। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4196 आवास लक्ष्य के मुकाबले 3864 को पहली किस्त, 3429 को दूसरी किस्त और 3347 को तीसरी किस्त जारी की गई। इसमें 3340 आवास पूर्ण हो गए। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2018-19 में 2235 आवास लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 379 पूर्ण हो चुके हैं, जबकि करीब 1700 आवास निर्माणाधीन हैं। मुख्य विकास अधिकारी हरिशंकर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास की मॉनीटरिंग प्रशासन से लेकर शासन स्तर पर हो रही है। तीन वर्षों में नौ हजार से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। 500 अपात्रों के बीच फंसी डेढ़ करोड की रिकवरी की प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जाएगी। इसी प्रकार सुरियावां नगर में आवास योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। शहरी आवास का आवंटन सूडा ने हलफनामा के आधार पर किया था। वहीं दर्जनभर आवास तालाबों पर बनाए जा रहे हैं। इस पर राजस्व विभाग भी चुप्पी साधे हुए है। सूत्रों के अनुसार नगर के दायरे में मिले कई आवासों का निर्माण नगर के बाहर कराया जा रहा है। नगर की सीमा से सटे गांव में जमीन है। उस पर नगर का आवास बनवाया जा रहा है। वहीं सूची में नाम शामिल होने के बावजूद खाते में पैसा नही पहुंच रहा है। वहीं सूडा विभाग के कुछ दलाल पैसे की मांग कर पैसा पास कराने के नाम पर घूस मांग रहे हैं। इससे केंद्र सरकार की योजना गरीबों के लिए एक सपना मात्र बनती जा रही है। उधर वेदपुर गांव के विशाल कुमार, मंगरू, कमला देवी आदि का कहना है कि उन्हें आवास आवंटित हो गया है, लेकिन जमीन नहीं मिली। दूसरी ओर रिकवरी का नोटिस भी जारी हो गया।
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