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चीनी मिल के लिए भेजा 230 करोड़ का इस्टीमेट
bhadohi news
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:32 AM IST
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चीनी मिल
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ज्ञानपुर। 10 साल से बंद पड़ी औराई चीनी मिल को चलाने के लिए शुरुआती तौर पर 230 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। जंक खा चुके मौजूदा उपकरणों के बूते अब मिल नहीं चल पाएगी। अगर मिल को दोबारा चलाना है तो नए सिरे से पहल करनी होगी। मिल के मुख्य प्लांट और पावर प्लांट को फिर से स्थापित करने के लिए 230 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। जिला प्रशासन ने इस आशय का इस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया है।
2006-07 के पेराई सत्र के बाद घाटा दिखाकर बंद की गई औराई की गोल्ड मेडलिस्ट चीनी मिल के दिन बहुरने के आसार बन गए हैं, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और कारगर प्रशासनिक प्रबंधन बेहद जरूरी माना जा रहा है। लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिल के तमाम कल पुर्जे न सिर्फ जंक खाकर बेकार हो चुके हैं, बल्कि बड़ी संख्या में मिल के उपकरणों के कानपुर और सुल्तानपुर की चीनी मिलों में चले जाने के कारण मिल को दोबारा चालू करने के लिए संसाधनों की कमी भी पड़ गई है। मिल के मौजूदा संसाधनों से इसे दोबारा चला पाना संभव नहीं है। लिहाजा जिला प्रशासन ने मिल को चालू हालत में लाने के लिए शुरुआती जरूरी बजट का आकलन कराया। औराई चीनी मिल का प्रभार संभाल रहे सुल्तानपुर चीनी मिल के जीएम पीके शुक्ला की अगुवाई में तकनीकी टीम ने मिल में मौजूद मशीनरी और संसाधनों को देखा। शुक्ला ने मिल के मुख्य प्लांट और पावर प्लांट को नए सिरे से स्थापित करने की जरूरत बताते हुए इसके लिए 230 करोड़ का इस्टीमेट बनाया। इस इस्टीमेट को जिला प्रशासन ने शासन को भेज दिया। अब उधर से संकेत मिलने का इंतजार है। जिलाधिकारी विशाख जी ने बताया कि मिल के प्रभारी मैनेजर की रिपोर्ट पर मुख्य प्लांट और पावर प्लांट को नए सिरे से स्थापित करने के लिए 230 करोड़ रुपये का इस्टीमेट शासन को भेजा गया है। आगे की कार्यवाही शासन के निर्देश के मुताबिक की जाएगी।
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इनसेट
मिल बंद होने के वर्ष नहीं खोले गए क्रय केंद्र
औराई। चीनी मिल बंद होने में बेहतर प्रबंधन का अभाव भी मुख्य वजह माना जाता है। जिस वर्ष चीनी मिल बंद हुई, उस वर्ष कहीं भी गन्ना क्रय केंद्र भी नहीं खोले गए। जबकि हर वर्ष वाराणसी, चंदौली, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर आदि जिलों में गन्ना क्रय केंद्र खोले जाते थे। ऐसे में दूर के किसानों का गन्ना मिल तक पहुंच पाना कठिन हो गया। 1991 में रिकार्ड 1.75 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन कर गुणवत्ता और ज्यादा उत्पादन के लिए प्रदेश सरकार से गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी औराई चीनी मिल के दुर्दिन 2000 के बाद शुरू हो गए थे। मिल के काउंटर से किसानों का भुगतान बंद कर बैंक से करने के चलते किसानों की गन्ने की खेती के प्रति घटती रुचि और समुचित प्रबंधन के अभाव ने मिल पर ग्रहण लगाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे घाटा दिखाकर 2006-07 के पेराई सत्र के बाद मिल को बंद कर दिया गया। 1250 क्विंटल प्रति घंटे की दर से गन्ने की पेराई करने वाली मिल के बंद होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोग बेरोजगार हो गए। मिल बंद होने के बाद टरबाइन, गन्ने को पेरने वाला रोला, क्वाड और पांच हॉर्स पावर से डेढ़ सौ हॉर्स पावर तक की सैकड़ों मोटरें यहां से कानपुर और सुल्तानपुर चीनी मिलों में ले जाकर लगा दी गईं।
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2006-07 के पेराई सत्र के बाद घाटा दिखाकर बंद की गई औराई की गोल्ड मेडलिस्ट चीनी मिल के दिन बहुरने के आसार बन गए हैं, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और कारगर प्रशासनिक प्रबंधन बेहद जरूरी माना जा रहा है। लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिल के तमाम कल पुर्जे न सिर्फ जंक खाकर बेकार हो चुके हैं, बल्कि बड़ी संख्या में मिल के उपकरणों के कानपुर और सुल्तानपुर की चीनी मिलों में चले जाने के कारण मिल को दोबारा चालू करने के लिए संसाधनों की कमी भी पड़ गई है। मिल के मौजूदा संसाधनों से इसे दोबारा चला पाना संभव नहीं है। लिहाजा जिला प्रशासन ने मिल को चालू हालत में लाने के लिए शुरुआती जरूरी बजट का आकलन कराया। औराई चीनी मिल का प्रभार संभाल रहे सुल्तानपुर चीनी मिल के जीएम पीके शुक्ला की अगुवाई में तकनीकी टीम ने मिल में मौजूद मशीनरी और संसाधनों को देखा। शुक्ला ने मिल के मुख्य प्लांट और पावर प्लांट को नए सिरे से स्थापित करने की जरूरत बताते हुए इसके लिए 230 करोड़ का इस्टीमेट बनाया। इस इस्टीमेट को जिला प्रशासन ने शासन को भेज दिया। अब उधर से संकेत मिलने का इंतजार है। जिलाधिकारी विशाख जी ने बताया कि मिल के प्रभारी मैनेजर की रिपोर्ट पर मुख्य प्लांट और पावर प्लांट को नए सिरे से स्थापित करने के लिए 230 करोड़ रुपये का इस्टीमेट शासन को भेजा गया है। आगे की कार्यवाही शासन के निर्देश के मुताबिक की जाएगी।
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मिल बंद होने के वर्ष नहीं खोले गए क्रय केंद्र
औराई। चीनी मिल बंद होने में बेहतर प्रबंधन का अभाव भी मुख्य वजह माना जाता है। जिस वर्ष चीनी मिल बंद हुई, उस वर्ष कहीं भी गन्ना क्रय केंद्र भी नहीं खोले गए। जबकि हर वर्ष वाराणसी, चंदौली, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर आदि जिलों में गन्ना क्रय केंद्र खोले जाते थे। ऐसे में दूर के किसानों का गन्ना मिल तक पहुंच पाना कठिन हो गया। 1991 में रिकार्ड 1.75 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन कर गुणवत्ता और ज्यादा उत्पादन के लिए प्रदेश सरकार से गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी औराई चीनी मिल के दुर्दिन 2000 के बाद शुरू हो गए थे। मिल के काउंटर से किसानों का भुगतान बंद कर बैंक से करने के चलते किसानों की गन्ने की खेती के प्रति घटती रुचि और समुचित प्रबंधन के अभाव ने मिल पर ग्रहण लगाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे घाटा दिखाकर 2006-07 के पेराई सत्र के बाद मिल को बंद कर दिया गया। 1250 क्विंटल प्रति घंटे की दर से गन्ने की पेराई करने वाली मिल के बंद होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोग बेरोजगार हो गए। मिल बंद होने के बाद टरबाइन, गन्ने को पेरने वाला रोला, क्वाड और पांच हॉर्स पावर से डेढ़ सौ हॉर्स पावर तक की सैकड़ों मोटरें यहां से कानपुर और सुल्तानपुर चीनी मिलों में ले जाकर लगा दी गईं।
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