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आर्सेनिक और आयरनयुक्त पानी बना अभिशाप
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सीतामढ़ी। तीन ओर से गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र के गांवों में आर्सेनिक और आयरनयुक्त पानी अभिशाप बन गया है। तकरीबन 10 साल से दर्जन भर गांवों में जहां आर्सेनिक युक्त पानी ग्रामीणों की रगों में मीठा जहर बनकर घुल रहा है, वहीं लगभग इतने ही गांवों में आयरनयुक्त पानी हैंडपंपों से निकलने के कुछ ही देर बाद पीला पड़ जाता है। आर्सेनिक और आयरनयुक्त पानी के सेवन के लिए मजबूर ग्रामीण गंभीर बीमारियों की आशंका में सहम गए हैं।
कोनिया क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या हो गई है। क्षेत्र के लगभग सभी गांव गंगा के किनारे बसे हैं। भूगर्भ जल इस तरह प्रदूषित हो चुका है कि हैंड पंपों के पानी में आर्सेनिक और अत्यधिक आयरन निकलता है। आर्से निक और आयरन युक्त पानी के सेवन से कई गंभीर बीमारियों की आशंका बनी रहती है। क्षेत्रीय लोग बताते हैं कि है हैंडपंपों से निकलने वाला पानी कुछ देर बाद पीला और दुर्गंधयुक्त हो जाता है, जो पीने लायक बिल्कुल नहीं रह जाता। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे क्षेत्रों में अत्यधिक गहरी बोरिंग वाले हैंडपंपो और सबमर्सिबल का पानी ही पीने योग्य होता है। बता दें कि कोनिया क्षेत्र में एक दशक पूर्व हैंडपंपों के पानी में आर्सेनिक की पुष्टि हुई थी, तब काफी हो हल्ला मचा था। लेकिन, इतने समय बाद भी लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कोई भी उपाय नहीं किया गया। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए स्थापित समूह पेयजल इकाइयों का बुरा हाल है। कोनिया के छेछुआ, भुर्रा, कलिक मवैया, बसगोती मवैया, कलातुलसी, धनतुलसी, हरिरामपुर आदि गांवों के हैंडपंपों से आर्सेनिक युक्त पानी निकलता है, जबकि धनतुलसी, भदरांव, शेरपुर, मवैया थान सिंह, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, इटहरा, डीघ, मनीपुर, दुगुना आदि गांवों में अत्यधिक आयरन युक्त पानी निकलता है। छेछुआ के ग्राम प्रधान जगदीश सिंह, कलिक मवैया के चंद्रबली चौबे, कलातुलसी के महेश पांडेय, इटहरा के कमलाशंकर मिश्रा, डीघ के नंघु तिवारी, अजय सिंह चौहान, बनकट के सर्वेश सिंह, नारेपार के मुन्ना सिंह आदि का कहना है कि क्षेत्र के लोग पेयजल में मीठा जहर पीने को मजबूर हैं। समस्या के समाधान के लिए शासन और जिला प्रशासन को तत्काल ठोस उपाय करना चाहिए।
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तीन साल से बंद है इटहरा समूह पेयजल योजना
सीतामढ़ी। आर्सेनिक और आयरनयुक्त पानी पीने को मजबूर कोनिया इलाके के ग्रामीणों को पेयजल इकाइयों का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। समूह पेयजल योजना इटहरा गर्दिश के दौर से गुजर रही है। कभी आधी कोनिया के ग्रामीणों की प्यास बुझाने वाली यह समूह पेयजल योजना पिछले तीन वर्षों से पूरी तरह ठप पड़ी है। हैरान करने वाली बात यह है कि योगी सरकार में भी अधिकारी कितने गैर जिम्मेदार बने हुए हैं कि पेयजल जैसी समस्या के निदान के लिए भी जहमत नहीं उठाई जाती। ग्रामीण बताते हैं कि मामूली खराबी और महज तीन जगह पाइप लाइन बर्स्ट हो जाने से 15 दिसंबर 2015 से ही समूह पेयजल योजना पूरी तरह बंद है। लाख प्रयास के बावजूद विभागीय लोग योजना को चालू करने के लिए पहल नहीं कर रहे हैं। ग्रामीण संजय सिंह, आदित्य सिंह, मनोज तिवारी, जिमदार सिंह, दीपक सिंह, आकाश सिंह, शुभम सिंह, दुर्गेश सिंह आदि का कहना है कि महज तीन जगह पाइप लाइन टूटी थी। बाद में मोटर में खराबी आने ने बाद तीन वर्ष गुजर गया, लेकिन समूह पेयजल योजना चालू नहीं हो पाई। इससे ग्रामीण हैंडपंपों का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इस बारे में जब विभागीय अधिकारियों से बात की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विभाग के अधिशासी अभियंता का कहना है कि योजना कभी-कभी चलती है। क्या समस्या है, दिखवाया जाएगा। जबकि जेई सोनू सिंह का कहना है कि मोटर खराब है। कई जगह पाइप लाइन चोक है। बिजली की भी समस्या थी। इसलिए पेयजल इकाई बंद है। वहीं योजना के ऑपरेटर और ग्रामीण कहते हैं कि पिछले तीन वर्षों से योजना पूरी तरह बंद है। 2015 के बाद कभी चली ही नही हैं।
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कोनिया क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या हो गई है। क्षेत्र के लगभग सभी गांव गंगा के किनारे बसे हैं। भूगर्भ जल इस तरह प्रदूषित हो चुका है कि हैंड पंपों के पानी में आर्सेनिक और अत्यधिक आयरन निकलता है। आर्से निक और आयरन युक्त पानी के सेवन से कई गंभीर बीमारियों की आशंका बनी रहती है। क्षेत्रीय लोग बताते हैं कि है हैंडपंपों से निकलने वाला पानी कुछ देर बाद पीला और दुर्गंधयुक्त हो जाता है, जो पीने लायक बिल्कुल नहीं रह जाता। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे क्षेत्रों में अत्यधिक गहरी बोरिंग वाले हैंडपंपो और सबमर्सिबल का पानी ही पीने योग्य होता है। बता दें कि कोनिया क्षेत्र में एक दशक पूर्व हैंडपंपों के पानी में आर्सेनिक की पुष्टि हुई थी, तब काफी हो हल्ला मचा था। लेकिन, इतने समय बाद भी लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कोई भी उपाय नहीं किया गया। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए स्थापित समूह पेयजल इकाइयों का बुरा हाल है। कोनिया के छेछुआ, भुर्रा, कलिक मवैया, बसगोती मवैया, कलातुलसी, धनतुलसी, हरिरामपुर आदि गांवों के हैंडपंपों से आर्सेनिक युक्त पानी निकलता है, जबकि धनतुलसी, भदरांव, शेरपुर, मवैया थान सिंह, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, इटहरा, डीघ, मनीपुर, दुगुना आदि गांवों में अत्यधिक आयरन युक्त पानी निकलता है। छेछुआ के ग्राम प्रधान जगदीश सिंह, कलिक मवैया के चंद्रबली चौबे, कलातुलसी के महेश पांडेय, इटहरा के कमलाशंकर मिश्रा, डीघ के नंघु तिवारी, अजय सिंह चौहान, बनकट के सर्वेश सिंह, नारेपार के मुन्ना सिंह आदि का कहना है कि क्षेत्र के लोग पेयजल में मीठा जहर पीने को मजबूर हैं। समस्या के समाधान के लिए शासन और जिला प्रशासन को तत्काल ठोस उपाय करना चाहिए।
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तीन साल से बंद है इटहरा समूह पेयजल योजना
सीतामढ़ी। आर्सेनिक और आयरनयुक्त पानी पीने को मजबूर कोनिया इलाके के ग्रामीणों को पेयजल इकाइयों का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। समूह पेयजल योजना इटहरा गर्दिश के दौर से गुजर रही है। कभी आधी कोनिया के ग्रामीणों की प्यास बुझाने वाली यह समूह पेयजल योजना पिछले तीन वर्षों से पूरी तरह ठप पड़ी है। हैरान करने वाली बात यह है कि योगी सरकार में भी अधिकारी कितने गैर जिम्मेदार बने हुए हैं कि पेयजल जैसी समस्या के निदान के लिए भी जहमत नहीं उठाई जाती। ग्रामीण बताते हैं कि मामूली खराबी और महज तीन जगह पाइप लाइन बर्स्ट हो जाने से 15 दिसंबर 2015 से ही समूह पेयजल योजना पूरी तरह बंद है। लाख प्रयास के बावजूद विभागीय लोग योजना को चालू करने के लिए पहल नहीं कर रहे हैं। ग्रामीण संजय सिंह, आदित्य सिंह, मनोज तिवारी, जिमदार सिंह, दीपक सिंह, आकाश सिंह, शुभम सिंह, दुर्गेश सिंह आदि का कहना है कि महज तीन जगह पाइप लाइन टूटी थी। बाद में मोटर में खराबी आने ने बाद तीन वर्ष गुजर गया, लेकिन समूह पेयजल योजना चालू नहीं हो पाई। इससे ग्रामीण हैंडपंपों का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इस बारे में जब विभागीय अधिकारियों से बात की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विभाग के अधिशासी अभियंता का कहना है कि योजना कभी-कभी चलती है। क्या समस्या है, दिखवाया जाएगा। जबकि जेई सोनू सिंह का कहना है कि मोटर खराब है। कई जगह पाइप लाइन चोक है। बिजली की भी समस्या थी। इसलिए पेयजल इकाई बंद है। वहीं योजना के ऑपरेटर और ग्रामीण कहते हैं कि पिछले तीन वर्षों से योजना पूरी तरह बंद है। 2015 के बाद कभी चली ही नही हैं।
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