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बदला मौसम किसानों के चेहरे खिले
Updated Thu, 22 Jun 2017 12:59 AM IST
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ज्ञानपुर(ब्यूरो)। बुधवार को जिले का मौसम अचानक बदल गया। सुबह से ही तेज हवाओं के साथ आसमान में बदली छा गई। इससे तापमान गिरने के चलते लोगों को भीषण गर्मी और उमस से तो राहत मिल गई, लेकिन दोपहर बाद तक बारिश की एक भी बूंद नहीं गिरी। हालांकि धान की खेती की तैयारी में जुटे किसान मौसम के इस रुख को मानसून की आहट मान रहे हैं।
बुधवार को सुबह हुई तो पछुवा हवाओं ने तापमान गिरा दिया था। इसके अलावा आसमान में काले बादलों की उमड़-घुमड़ शुरू हो गई थी। इससे मौसम सुहावना बन चला था। माना जा रहा था कि जल्द ही बारिश हो जाएगी, लेकिन दोपहर बाद तक आसमान में बदली तो छाई रही मगर बरसात नहीं हुई। जानकारों का कहना था कि किसी भी समय बारिश हो सकती है। इसे मानसून की आहट मानी जा रही है। उधर धान की खेती की तैयारी में जुटे किसान मौसम का मिजाज देखकर प्रसन्न हो गए। उनका कहना था कि बारिश हो गई तो धान की रोपाई भी शुरू हो जाएगी। जिनकी नर्सरी तैयार हो चुकी है, उनके लिए रोपाई करने का यह उपयुक्त समय है। अभोली के किसान मुकेश सिंह ने कहा कि इंद्रदेव की कृपा हो जाए तो किसानों को काफी राहत मिल जाएगी। धान की नर्सरी तैयार है, केवल मौसम का मिजाज भर भांपने की देर है। श्याम लाल यादव ने कहा कि बारिश सब्जी की खेती के लिए भी जरूरी है। मशीन और ट्यूबवेल के पानी में वह बात नहीं होती जो दैऊ के पानी में होती है। कृषि विशेषज्ञ एके चतुर्वेदी ने कहा कि मानसून का समय आ गया है। मौसम के मौजूदा हालात को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि किसी भी समय मानसून आ सकता है। किसानों को तैयार रहना चाहिए।
बुधवार को सुबह हुई तो पछुवा हवाओं ने तापमान गिरा दिया था। इसके अलावा आसमान में काले बादलों की उमड़-घुमड़ शुरू हो गई थी। इससे मौसम सुहावना बन चला था। माना जा रहा था कि जल्द ही बारिश हो जाएगी, लेकिन दोपहर बाद तक आसमान में बदली तो छाई रही मगर बरसात नहीं हुई। जानकारों का कहना था कि किसी भी समय बारिश हो सकती है। इसे मानसून की आहट मानी जा रही है। उधर धान की खेती की तैयारी में जुटे किसान मौसम का मिजाज देखकर प्रसन्न हो गए। उनका कहना था कि बारिश हो गई तो धान की रोपाई भी शुरू हो जाएगी। जिनकी नर्सरी तैयार हो चुकी है, उनके लिए रोपाई करने का यह उपयुक्त समय है। अभोली के किसान मुकेश सिंह ने कहा कि इंद्रदेव की कृपा हो जाए तो किसानों को काफी राहत मिल जाएगी। धान की नर्सरी तैयार है, केवल मौसम का मिजाज भर भांपने की देर है। श्याम लाल यादव ने कहा कि बारिश सब्जी की खेती के लिए भी जरूरी है। मशीन और ट्यूबवेल के पानी में वह बात नहीं होती जो दैऊ के पानी में होती है। कृषि विशेषज्ञ एके चतुर्वेदी ने कहा कि मानसून का समय आ गया है। मौसम के मौजूदा हालात को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि किसी भी समय मानसून आ सकता है। किसानों को तैयार रहना चाहिए।
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