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बुनकरों की व्यथा भी सुनिए प्रमुख सचिव जी
Updated Mon, 18 Sep 2017 12:15 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)। हुनर से भदोही के कालीन कारोबार को अंतर्राष्ट्रीय फलक तक चमकाने वाले बुनकर बदहाल हैं। आर्थिक संकट के मझधार में गोते लगा रहे बुनकरों के सामने भीषण महंगाई में परिवार का जीविकोपार्जन बड़ी चुनौती बन गया है। दिनभर कताई के धागे में आंखें गड़ाने और अंगुलियों को घंटों कालीन के ताने-बाने में उलझाने के बाद कालीन को मखमली रंगत देने वाले बुनकर आज भी डेढ़ सौ रुपये की दिहाड़ी पर काम करने को मजबूर हैं।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार का भदोही आगमन सोमवार को हो रहा है। इस दौरान वह जिले के कालीन कारोबार की हकीकत से रूबरू हों न हों, लेकिन बुनकरों की पीड़ा चीख-चीखकर सुध लेने की गुहार लगा रही है। दिन भर मेहनत करने के बाद बुनकरों का पूरा परिवार दो जून की दाल-रोटी भर ही कमा पाता है। अब भी बड़े से बड़े कारोबारी भी बुनकरों को महज 150 रुपये के आसपास ही दिहाड़ी देते हैं। उनकी मजूरी को लेकर कोई गाइडलाइन तय न होने के कारण करोड़ों के कारोबार की धुरी कहे जाने वाले इन श्रमिकों का खूब शोषण हो रहा है। अब प्रमुख सचिव के आगमन के मद्देनजर इस वर्ग की उम्मीदें बढ़ गईं हैं। बुनकरों का कहना है कि प्रमुख सचिव को उनकी माली हालत की ओर ध्यान देना चाहिए। बालीपुर के बुनकर असमत अली ने कहा कि कड़ी मेहनत करने के बाद भी काम भी अभाव में ही जिंदगी गुजर रही है। कुछ ऐसे ही हालात सगीना बानो ने भी व्यक्त किया। कहा कि इस तरफ सरकार को भी ध्यान देना चाहिए। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर कालीन के कुल लगभग 10 हजार करोड़ के कारोबार में लगभग आधा अकेले भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र की हिस्सेदारी है। इसमें भदोही के हैंडमेड कालीनों का पूरी दुनिया में कोई जोड़ नहीं है।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार का भदोही आगमन सोमवार को हो रहा है। इस दौरान वह जिले के कालीन कारोबार की हकीकत से रूबरू हों न हों, लेकिन बुनकरों की पीड़ा चीख-चीखकर सुध लेने की गुहार लगा रही है। दिन भर मेहनत करने के बाद बुनकरों का पूरा परिवार दो जून की दाल-रोटी भर ही कमा पाता है। अब भी बड़े से बड़े कारोबारी भी बुनकरों को महज 150 रुपये के आसपास ही दिहाड़ी देते हैं। उनकी मजूरी को लेकर कोई गाइडलाइन तय न होने के कारण करोड़ों के कारोबार की धुरी कहे जाने वाले इन श्रमिकों का खूब शोषण हो रहा है। अब प्रमुख सचिव के आगमन के मद्देनजर इस वर्ग की उम्मीदें बढ़ गईं हैं। बुनकरों का कहना है कि प्रमुख सचिव को उनकी माली हालत की ओर ध्यान देना चाहिए। बालीपुर के बुनकर असमत अली ने कहा कि कड़ी मेहनत करने के बाद भी काम भी अभाव में ही जिंदगी गुजर रही है। कुछ ऐसे ही हालात सगीना बानो ने भी व्यक्त किया। कहा कि इस तरफ सरकार को भी ध्यान देना चाहिए। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर कालीन के कुल लगभग 10 हजार करोड़ के कारोबार में लगभग आधा अकेले भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र की हिस्सेदारी है। इसमें भदोही के हैंडमेड कालीनों का पूरी दुनिया में कोई जोड़ नहीं है।
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