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‘वेंटीलेटर’ पर अस्पताल, मरीज बेबस
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ज्ञानपुर। डाक्टरों की उदासीनता और उपकरणों की कमी से जिला अस्पताल संग सीएचसी भी ‘वेंटीलेटर’ पर हैं। हाईवे पर स्थित सीएचसी गोपीगंज और औराई की हालत काफी खराब है। दोनों केंद्रों पर गंभीर रूप से घायल कोई मरीज पहुंचता है, तो उपचार के बजाए चिकित्सक सीधे रेफर किया जाता है। इमरजेंसी केस को भर्ती करने से पहले ही हाथ खड़े कर देते हैं। दोनों ही जगह हड्डी रोग विशेषज्ञ और सर्जन नहीं हैं। रेडियोलॉजिस्ट के न होने से ज्ञानपुर जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष जहां दो साल से बंद है वहीं ईसीजी भी नहीं किया जाता। सुरियावां में एक्सरे मशीन दो साल से धूल फांक रही है।
ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में कहने के लिए वैसे तो आठ चिकित्सक जरूरत के अनुसार हैं, लेकिन गंभीर रूप से पीड़ितों को उपचार करने की जहमत कोई उठाना नहीं चाहता। सीएचसी और पीएचसी से रेफर होकर आए मरीजों को यहां से भी रेफर की पर्ची दे दी जाती है। वाराणसी और इलाहाबाद पहुंचने से पूर्व 50 फीसदी से अधिक लोगों की जान चली जाती है। अति संवेदनशील हाईवे पर स्थित सीएचसी गोपीगंज और औराई की हालत तो अति दयनीय है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीज एंबुलेंस से सीएचसी गोपीगंज पहुंचते हैं लेकिन यहां भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है, लेकिन विशेषज्ञ के न होने से अक्सर वह कक्ष बंद रहता है, जबकि सीएचसी में यह सुविधा अब तक नहीं हो सकी। सुरियावां सीएचसी में दो वर्ष पूर्व एक्सरे मशीन आई लेकिन विशेषज्ञ के न होने से वह धूल फांक रही है। स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी व्यवस्था सुधर नहीं रही है। जिसके चलते गांव-गिरांव से सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों का आर्थिक शोषण होता है। निजी पैथॉलाजी में जांच कराने पर उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।
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ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में कहने के लिए वैसे तो आठ चिकित्सक जरूरत के अनुसार हैं, लेकिन गंभीर रूप से पीड़ितों को उपचार करने की जहमत कोई उठाना नहीं चाहता। सीएचसी और पीएचसी से रेफर होकर आए मरीजों को यहां से भी रेफर की पर्ची दे दी जाती है। वाराणसी और इलाहाबाद पहुंचने से पूर्व 50 फीसदी से अधिक लोगों की जान चली जाती है। अति संवेदनशील हाईवे पर स्थित सीएचसी गोपीगंज और औराई की हालत तो अति दयनीय है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीज एंबुलेंस से सीएचसी गोपीगंज पहुंचते हैं लेकिन यहां भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है, लेकिन विशेषज्ञ के न होने से अक्सर वह कक्ष बंद रहता है, जबकि सीएचसी में यह सुविधा अब तक नहीं हो सकी। सुरियावां सीएचसी में दो वर्ष पूर्व एक्सरे मशीन आई लेकिन विशेषज्ञ के न होने से वह धूल फांक रही है। स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी व्यवस्था सुधर नहीं रही है। जिसके चलते गांव-गिरांव से सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों का आर्थिक शोषण होता है। निजी पैथॉलाजी में जांच कराने पर उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।
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