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राम के वन जाते ही दशरथ ने देह त्यागा
Updated Tue, 16 Oct 2018 12:30 AM IST
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ज्ञानपुर। जिले में जगह-जगह चल रही रामलीला में रविवार की रात कलाकारों ने अलग-अलग लीलाओं का मंचन किया। औराई के अमीरपट्टी और सुरियावां में दशरथ मरण जबकि ज्ञानपुर की रामलीला में राम वन गमन पर मंचन किया गया। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में रामलीला मैदान पर चल रही रामलीला में रविवार की रात राम वन गमन मंचन किया गया। जनकपुरी में शादी होने के बाद श्रीराम अयोध्या आए तो यहां मंथरा के बकहावे में आकर कैकेयी ने दो वचन राजा दशरथ से मांग लिए। पहला राम को 14 वर्ष वनवास और भरत को अयोध्या की राजगद्दी। पिता के वचनों को निभाने के लिए राम, लक्ष्मण और सीता वनवास चल दिए। सुरियावां संवाददाता के अनुसार, रामलीला मैदान मे वृंदावन से आए कलाकारों ने दशरथ मरण, चित्रकूट में भरत मिलन का मंचन किया। वन जाने पर प्रभु श्रीराम ने मंत्री सुमंत को अयोध्या वापस भेज दिया। सरयू पार करने के लिए भगवान राम को केवट की सहायता लेनी पड़ीं, केवट और भगवान राम के संवाद का सुंदर चित्रण दर्शाया गया। उधर अयोध्या में सुमंत को खाली हाथ लौटा देख राजा दशरथ ने पुत्र वियोग मे प्राण त्याग दिया। भरत जब अयोध्या पहुचे तो राम को वनवास से वापस लाने के लिए चल दिए। श्री राम ने पिता के वचनों की खातिर अयोध्या जाने से इंकार कर दिया तो भरत उनके खड़ाऊं को लेकर अयोध्या वापस लौटे। औराई संवाददाता के अनुसार, अमीरपट्टी की रामलीला में भी दशरथ मरण, भरत- राम मिलन पर कलाकारों ने मंचन किया। पिता के वचनों को निभाने के लिए प्रभु राम जब वन चले जाते हैं तो पुत्र वियोग में दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं।
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