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सावन के पहले सोमवार के लिए सजे शिवालय
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:50 AM IST
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शिवधामों की ओर रवाना हो गए
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ज्ञानपुर। शिव आराधना का पवित्र महीना सावन सोमवार से आरंभ हो रहा है। इसके निमित्त जिले के शिवालय सजकर तैयार हो गए हैं। सावन की शुरुआत सोमवार के साथ होने के संयोग ने इस बार सावन को विशेष बना दिया है। इस बार सावन में पांच सोमवार पड़ेंगे। इसको लेकर सावन में पांच सोमवार का व्रत रखने वाली महिलाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक करने के लिए रविवार को कांवरियों के कई जत्थे शिवधामों की ओर रवाना हो गए।
सोमवार से सावन का शुभारंभ हो रहा है। इसको लेकर समूचा जिला शिवमय हो चला है। ज्योतिषीय जानकारों के मुताबिक, इस बार सावन विशेष संयोग के साथ आया है। डुहियां के पं. दीनानाथ शुक्ल के मुताबिक सावन के महीने से देवाधिदेव महादेव शिव का प्राकृतिक संबंध है। उन्होंने कहा कि काशी से प्रकाशित ऋषिकेश पंचांग के अनुसार इस बार सावन मास का शुभारंभ सोमवार को होगा और समापन भी सोमवार को ही होगा। यह शिवभक्तों के लिए सबसे प्रिय और कल्याणकारी माह माना जाता है। इस महीने में गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना श्रेयस्कर रहता है। बेलपत्र, मदार का फूल और भांग की पत्ती अर्पित करने से भूत भावन भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन महीने में पांच सोमवार पड़ना दुर्लभ संयोग है। सावन में पांच सोमवार का व्रत करने के उद्देश्य से कन्याएं प्राय: आषाढ़ के एक सोमवार का व्रत करने के साथ सावन के चार सोमवार का व्रत करती थीं, लेकिन इस बार सावन माह पांच सोमवार से परिपूर्ण है। यह संयोग व्यापारियों, किसानों और राजकीय कार्यों के लिए मंगलकारी है। अंतिम सोमवार को पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पवित्र पर्व है। इस दिन चंद्रग्रहण भी लग रहा है, जिसका स्पर्श रात्रि 10.53 बजे और मोक्ष रात्रि 12.48 बजे होगा। दूसरी ओर सावन के लिए जिले के शिवालय सजकर तैयार हो गए हैं। सिद्धपीठ हरिहरनाथ धाम, स्वयंभू सेमराधनाथ, तिलेश्वरनाथ, बड़े शिव समेत जिले भर के तमाम शिवालयों में सावन भर भारी भीड़ उमड़ती है। सावन के पहले सोमवार को भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए रविवार को बड़ी संख्या में कांवरियों का जत्था रवाना हुआ। ज्ञानपुर नगर की दुर्गागंज त्रिमुहानी से कांवरियों का एक जत्था जल उठाने के लिए प्रयागराज गया। वहां से कांवरिया काशी विश्वनाथ जाएंगे।
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सोमवार से सावन का शुभारंभ हो रहा है। इसको लेकर समूचा जिला शिवमय हो चला है। ज्योतिषीय जानकारों के मुताबिक, इस बार सावन विशेष संयोग के साथ आया है। डुहियां के पं. दीनानाथ शुक्ल के मुताबिक सावन के महीने से देवाधिदेव महादेव शिव का प्राकृतिक संबंध है। उन्होंने कहा कि काशी से प्रकाशित ऋषिकेश पंचांग के अनुसार इस बार सावन मास का शुभारंभ सोमवार को होगा और समापन भी सोमवार को ही होगा। यह शिवभक्तों के लिए सबसे प्रिय और कल्याणकारी माह माना जाता है। इस महीने में गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना श्रेयस्कर रहता है। बेलपत्र, मदार का फूल और भांग की पत्ती अर्पित करने से भूत भावन भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन महीने में पांच सोमवार पड़ना दुर्लभ संयोग है। सावन में पांच सोमवार का व्रत करने के उद्देश्य से कन्याएं प्राय: आषाढ़ के एक सोमवार का व्रत करने के साथ सावन के चार सोमवार का व्रत करती थीं, लेकिन इस बार सावन माह पांच सोमवार से परिपूर्ण है। यह संयोग व्यापारियों, किसानों और राजकीय कार्यों के लिए मंगलकारी है। अंतिम सोमवार को पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पवित्र पर्व है। इस दिन चंद्रग्रहण भी लग रहा है, जिसका स्पर्श रात्रि 10.53 बजे और मोक्ष रात्रि 12.48 बजे होगा। दूसरी ओर सावन के लिए जिले के शिवालय सजकर तैयार हो गए हैं। सिद्धपीठ हरिहरनाथ धाम, स्वयंभू सेमराधनाथ, तिलेश्वरनाथ, बड़े शिव समेत जिले भर के तमाम शिवालयों में सावन भर भारी भीड़ उमड़ती है। सावन के पहले सोमवार को भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए रविवार को बड़ी संख्या में कांवरियों का जत्था रवाना हुआ। ज्ञानपुर नगर की दुर्गागंज त्रिमुहानी से कांवरियों का एक जत्था जल उठाने के लिए प्रयागराज गया। वहां से कांवरिया काशी विश्वनाथ जाएंगे।
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