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भदोही। मलिहाओं की मेधा
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ज्ञानपुर/भदोही। आधी आबादी किसी क्षेत्र में पीछे नहीं है। जहां मौका मिला, अपनी कूव्वत को साबित कर दिखाया। भदोही जिले में भी युवतियों ने विभिन्न क्षेत्रों में परचम फहराया है। ऐसी बहादुर बेटियों को एक सैल्यूट तो बनता है।
सुरियावां की धावक ज्योति सिंह ने विपरीत परिस्थितियों से जूझकर खुद का मुकाम बनाया। पिता रामआसरे सिंह किसान हैं। वह नेशनल स्तर के खिलाड़ी थे, लेकिन सपोर्ट नहीं मिला, इसलिए बेटी को बेहतर एथलीट बनाने की ठान ली। ज्योति ने 2016 में इंदिरा मैराथन इलाहाबाद में प्रथम रहीं। जबकि 2017 में दूसरे स्थान पर रही। उसका सपना खेल में और आगे बढ़ने का है। ज्योति की उपलब्धि पर पूरा जिला गदगद है।
भदोही नगर के चकइनायत निवासी अनीता गुप्ता महिला सेवा मंच के माध्यम से 11 वर्ष से समाज के दबे कुचलों और गरीबों की सेवा कर रही हैं। उनका संगठन समाज के अति पिछडों के बीच जाकर न केवल उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित कर रहा है, बल्कि उन्हें आगे आने के लिए विकल्प प्रदान करता है। वे कहती हैं कि सेवा का कार्य ना तो बड़ा-छोटा होता है ना ही इसका कोई स्वरूप होता है। कहा कि घरों में झगड़ों को खत्म कराना, बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना, उनके विवाह में किसी भी तरह से योगदान कर देना भी सेवा ही है।
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भदोही नगर के रजपुरा बीडा कालोनी की स्नेहलता श्रीवास्तव वर्ष 2000 से कालोनी में शुल्कमुक्त संस्कारशाला चला रही हैं। यहां कक्षा एक से चौथी तक 60 गरीब बच्चों को वे प्राथमिक शिक्षा दे रही हैं। खास बात यह है कि बच्चों से कोई शुल्क नहीं, लेतीं जबकि उन्हें कपड़े, जूते, मोजे, किताब कापियां आदि नि:शुल्क उपलब्ध कराती हैं। वे बताती हैं कि उन्होंने बच्चों के लिए जीवन समर्पित कर दिया है। विद्यालय का पंजिकरण भी करा रखा है, जिससे बच्चों को अन्यत्र प्रवेश मिल जाता है। कहा कि वे आभारी हैं ऐसे दानदाताओं का जो नाम किए बगैर विद्यालय चलाने में सहयोग करते हैं।
सुरियावां की धावक ज्योति सिंह ने विपरीत परिस्थितियों से जूझकर खुद का मुकाम बनाया। पिता रामआसरे सिंह किसान हैं। वह नेशनल स्तर के खिलाड़ी थे, लेकिन सपोर्ट नहीं मिला, इसलिए बेटी को बेहतर एथलीट बनाने की ठान ली। ज्योति ने 2016 में इंदिरा मैराथन इलाहाबाद में प्रथम रहीं। जबकि 2017 में दूसरे स्थान पर रही। उसका सपना खेल में और आगे बढ़ने का है। ज्योति की उपलब्धि पर पूरा जिला गदगद है।
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भदोही नगर के चकइनायत निवासी अनीता गुप्ता महिला सेवा मंच के माध्यम से 11 वर्ष से समाज के दबे कुचलों और गरीबों की सेवा कर रही हैं। उनका संगठन समाज के अति पिछडों के बीच जाकर न केवल उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित कर रहा है, बल्कि उन्हें आगे आने के लिए विकल्प प्रदान करता है। वे कहती हैं कि सेवा का कार्य ना तो बड़ा-छोटा होता है ना ही इसका कोई स्वरूप होता है। कहा कि घरों में झगड़ों को खत्म कराना, बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना, उनके विवाह में किसी भी तरह से योगदान कर देना भी सेवा ही है।
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भदोही नगर के रजपुरा बीडा कालोनी की स्नेहलता श्रीवास्तव वर्ष 2000 से कालोनी में शुल्कमुक्त संस्कारशाला चला रही हैं। यहां कक्षा एक से चौथी तक 60 गरीब बच्चों को वे प्राथमिक शिक्षा दे रही हैं। खास बात यह है कि बच्चों से कोई शुल्क नहीं, लेतीं जबकि उन्हें कपड़े, जूते, मोजे, किताब कापियां आदि नि:शुल्क उपलब्ध कराती हैं। वे बताती हैं कि उन्होंने बच्चों के लिए जीवन समर्पित कर दिया है। विद्यालय का पंजिकरण भी करा रखा है, जिससे बच्चों को अन्यत्र प्रवेश मिल जाता है। कहा कि वे आभारी हैं ऐसे दानदाताओं का जो नाम किए बगैर विद्यालय चलाने में सहयोग करते हैं।