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Basti News: अभिभावकों की डांट से नाराज होकर घर छोड़ रहे किशोर

Sat, 16 Mar 2024 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 16 Mar 2024 01:04 AM IST
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Teenagers leaving home after getting angry due to scolding from their parents
आठ महीने में 22 किशोर छोड़ चुके हैं घर, मशक्कत के बाद लौटे
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अभिभावक, शिक्षक, मनोविज्ञानी व समाजशास्त्री भी हैरान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। छोटी-छोटी बातों पर बच्चे घर छोड़कर भाग रहे हैं। इस वर्ष के ढाई माह में पांच किशोरों ने फटकार व पिटाई से नाराज होकर घर छोड़ दिया। नाराज बच्चों की तलाश में अभिभावक को दर-दर भटकना पड़ रहा है। पुलिस भी ऐसे बच्चों की तलाश में हलाकान हो रही है। बच्चों के इस हरकतों से अभिभावक, शिक्षक, मनोविज्ञानी व समाजशास्त्री भी हैरान हैं।
पिछले आठ माह में 22 बच्चों को जिले की पुलिस तलाश कर परिजनों को सौंप चुकी है। कुछ बच्चे चार-छह दिन में खुद वापस चले आए। जबकि दो बच्चे दिल्ली भाग गए, जिन्हें लाने के लिए परिवार को काफी पापड़ बेलना पड़ा। जानकर बताते हैं कि बच्चों को सीधे फटकार लगाने व पिटाई करने के बजाय उनसे खुलकर बात करने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के मन की बात सुननी चाहिए। उनसे दोस्ताना रिश्ते रखने की आवश्यकता है।
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समाजशास्त्री बताते हैं कि पांच वर्ष की उम्र के बाद बच्चे के व्यवहार और मन:स्थिति में परिवर्तन होने लगता है। इस दौरान स्कूल में उनका नए दोस्तों से मेलजोल बढ़ता है। उनके व्यवहार और गतिविधियों में भी बदलाव दिखता है। इन पर अभिभावकों की रोकटोक बच्चों को बंदिश सी लगने लगती हैं। टोकने से वह चिढ़चिढ़े हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनसे दूरी बनाने के बजाय खुलकर बातचीत करना और दोस्ताना रवैया ही ठीक है। उनसे बात करने पर ही मन:स्थिति को समझा जा सकता है। उसी अनुसार अपना व्यवहार किया जाना जरूरी है।
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समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय का कहना है कि सजा और इनाम की तरकीब काफी कारगर है। घर में ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें अच्छे बर्ताव के लिए इनाम और गलत व्यवहार के लिए सजा की गुंजाइश हो। सजा सिर्फ शारीरिक यातना नहीं, बल्कि उनकी छूट व सुविधा में कटौती करना भी है।

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केस एक

चाचा ने थप्पड़ मारा तो छोड़ दिया घर
शहर के एक व्यवसायी के 13 वर्षीय बेटे को उसके चाचा अक्सर टोकते रहते थे। यह बात बच्चे को नागवार लगता था, मगर माता-पिता से संकोच वश नहीं बोल पाता था। एक प्रदर्शनी से घूमकर आने के बाद चाचा ने उसे थप्पड़ मार दिया। यह बात उसे नागवार गुजरी। वह चुपचाप घर से निकल गया। दो दिन ढूंढने के बाद लखनऊ में मिला।

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केस दो
शिक्षक के थप्पड़ मारने पर भाग गया दिल्ली

परशुरामपुर क्षेत्र के एक शिक्षक ने सबके सामने एक छात्र को थप्पड़ मार दिया था। इससे नाराज होकर वह अपने दोस्त के हाथ एक चिट्ठी लिखकर पिता के पास भेज दिया कि वह मरने जा रहा है। इसके बाद वह लापता हो गया। बाद में पुलिस उसे ढूंढकर दिल्ली से लेकर आई।


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बच्चों का घर छोड़ना चिंता का विषय

आईजी आरके भारद्वाज कहते हैं कि बच्चों, किशोरों के नाराज होकर घर छोड़कर भागने की घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें पुलिस से ज्यादा परिवार वालों की जिम्मेदारी होती है। बच्चों से संवादहीनता की स्थिति नहीं बनने देना चाहिए। उनसे लगातार बातचीत ही ऐसी स्थिति से बचने का उपाय है।
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