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पूर्वजों की थाती सहेजने में जुटे सूरीनाम के पूर्व मंत्री
basti
Updated Wed, 10 Jan 2018 11:14 PM IST
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सूरीनाम के पूर्व मंत्री प्रो मॉरिस हसन।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती।
वर्षों पूर्व गिरमिटिया मजदूर के रूप में तत्कालीन बस्ती से तमाम भारतीयों को विभिन्न देशों में भेज दिया गया। इसी में एक नाम बस्ती, अब सिद्धार्थनगर के देवरी गांव निवासी सुकुरुल्लाह का परिवार है। सुकुरुल्लाह को दक्षिणी अमेरिका के देश सूरीनाम भेजा गया था। अब उनकी बेटी के बेटे सूरीनाम के पूर्व मंत्री प्रो. मॉरिस हसन खान अपने नाना की थाती सहेजने के प्रयास में जुटे हैं। तीसरी पीढ़ी अब तक यहां का तीन बार भ्रमण कर चुकी है। सूरीनाम के पूर्व मंत्री के गांव को ढूंढने में अब केंद्र और प्रदेश सरकार भी लग गई है। इसे लेकर बस्ती तथा सिद्धार्थनगर के डीएम को विदेश मंत्रालय ने पत्र भेजा है।
अंग्रेजों की ओर से 1862 से 1916 तक गिरमिटिया मजदूर के रूप में विभिन्न देशों में भेजे गए भारतीयों में प्रो. मॉरिस हसन खान के नाना भी शामिल थे। हालांकि, प्रोफेसर के परिवार के लोग मध्य प्रदेश के रहने वाले थे, मगर विस्थापन के दौरान यह परिवार बिछुड़ गया। यूं तो दूसरी पीढ़ी ने ही अपने पूर्वजों की थाती को सहेजने की पहल 1920 में की थी। प्रोफेसर के नाना के भाई हुब्बा अपने गांव गए और वहां लोगों से मिल कर लौट गए। उनकी मौत के बाद बस्ती से इस परिवार का नाता टूट गया। हालांकि, यहां की माटी की महक प्रो. मॉरिस हसन खान के दिल में जिंदा रही। ऐसे में वर्ष 2010-11 में इलाहाबाद में पंत संस्थान द्वारा आयोजित काहे गइले विदेश प्रोजेक्ट में प्रो. मॉरिस हसन खान शामिल हुए। यहीं, उनकी मुलाकात अपने गांव के बगल स्थित ग्राम डुमरिया बुजुर्ग निवासी सुशांत कुमार पांडेय से हुई। सुशांत से बातचीत में प्रोफेसर को यह पता चला कि वह बस्ती के हैं और उनके गांव के पास ही ननिहाल है तो वे बेहद करीब आ गए। प्रो. मॉरिस हसन खान ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को पत्र लिख कर नाना से संबंधित दस्तावेज और वंशावली के बारे में जनपद बस्ती और सिद्धार्थनगर के प्रशासनिक और शासकीय पदाधिकारियों से सहायता मांगी है। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव को सूूरीनाम में भारत के राजदूत सतेंद्र कुमार ने पत्र लिखा है कि भारतीयों के इन वंशजों की सच्ची भावनाओं की कद्र करते हुए उनके पूर्वजों तथा वर्तमान संबंधियों के बारे में जानकारी दी जाए।
इस संबंध में डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि विदेश मंत्रालय का पत्र मिला है। बताया कि यह गांव बस्ती में नहीं बल्कि सिद्धार्थनगर में है। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय को भेजी जा रही है।
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वर्षों पूर्व गिरमिटिया मजदूर के रूप में तत्कालीन बस्ती से तमाम भारतीयों को विभिन्न देशों में भेज दिया गया। इसी में एक नाम बस्ती, अब सिद्धार्थनगर के देवरी गांव निवासी सुकुरुल्लाह का परिवार है। सुकुरुल्लाह को दक्षिणी अमेरिका के देश सूरीनाम भेजा गया था। अब उनकी बेटी के बेटे सूरीनाम के पूर्व मंत्री प्रो. मॉरिस हसन खान अपने नाना की थाती सहेजने के प्रयास में जुटे हैं। तीसरी पीढ़ी अब तक यहां का तीन बार भ्रमण कर चुकी है। सूरीनाम के पूर्व मंत्री के गांव को ढूंढने में अब केंद्र और प्रदेश सरकार भी लग गई है। इसे लेकर बस्ती तथा सिद्धार्थनगर के डीएम को विदेश मंत्रालय ने पत्र भेजा है।
अंग्रेजों की ओर से 1862 से 1916 तक गिरमिटिया मजदूर के रूप में विभिन्न देशों में भेजे गए भारतीयों में प्रो. मॉरिस हसन खान के नाना भी शामिल थे। हालांकि, प्रोफेसर के परिवार के लोग मध्य प्रदेश के रहने वाले थे, मगर विस्थापन के दौरान यह परिवार बिछुड़ गया। यूं तो दूसरी पीढ़ी ने ही अपने पूर्वजों की थाती को सहेजने की पहल 1920 में की थी। प्रोफेसर के नाना के भाई हुब्बा अपने गांव गए और वहां लोगों से मिल कर लौट गए। उनकी मौत के बाद बस्ती से इस परिवार का नाता टूट गया। हालांकि, यहां की माटी की महक प्रो. मॉरिस हसन खान के दिल में जिंदा रही। ऐसे में वर्ष 2010-11 में इलाहाबाद में पंत संस्थान द्वारा आयोजित काहे गइले विदेश प्रोजेक्ट में प्रो. मॉरिस हसन खान शामिल हुए। यहीं, उनकी मुलाकात अपने गांव के बगल स्थित ग्राम डुमरिया बुजुर्ग निवासी सुशांत कुमार पांडेय से हुई। सुशांत से बातचीत में प्रोफेसर को यह पता चला कि वह बस्ती के हैं और उनके गांव के पास ही ननिहाल है तो वे बेहद करीब आ गए। प्रो. मॉरिस हसन खान ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को पत्र लिख कर नाना से संबंधित दस्तावेज और वंशावली के बारे में जनपद बस्ती और सिद्धार्थनगर के प्रशासनिक और शासकीय पदाधिकारियों से सहायता मांगी है। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव को सूूरीनाम में भारत के राजदूत सतेंद्र कुमार ने पत्र लिखा है कि भारतीयों के इन वंशजों की सच्ची भावनाओं की कद्र करते हुए उनके पूर्वजों तथा वर्तमान संबंधियों के बारे में जानकारी दी जाए।
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इस संबंध में डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि विदेश मंत्रालय का पत्र मिला है। बताया कि यह गांव बस्ती में नहीं बल्कि सिद्धार्थनगर में है। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय को भेजी जा रही है।
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