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कोरे कागज पर छात्राओं ने उकेरी आधी आबादी की हकीकत
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कोरे कागज पर छात्राओं ने उकेरी आधी आबादी की हकीकत
बस्ती। जिले के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज व बेगम खैर गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्राओं ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह के क्रम में पेंटिंग्स के जरिए कोरे कागज पर आधी आबादी की महत्ता और उनकी उपलब्धियों को रेखांकित किया। छात्राओं ने हाथों में स्लोगन लेकर लैंगिक समानता का शपथ भी ली।
विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली, युवा विकास समिति व रुद्र रक्षा फाउंडेशन की ओर से सोमवार को लैंगिक समानता के मुद्दे पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लिया जिसमें दोनों स्कूलों के 300 छात्राओं ने प्रतियोगिता में भाग लेकर समाज में महिलाओं की महत्ता और उनके अधिकार के लिए एक से बढ़कर एक पेंटिंग बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने पेंटिंग के जरिए समाज में स्त्रियों का हाल बयां किया। बेगम खैर की छात्रा स्मृति, रुपाली आर्या, सना, गीता श्रीवास्तव, गायत्री ने पेटिंग के जरिए समाज में हो रहे लिंग भेद को रेखांकित करते हुए बेटे और बेटियों को एक तराजू के जरिए दिखाया। जीजीआईसी की छात्राओं ने पेंटिंग के साथ आकर्षक स्लोगन भी कोरे कागज पर उकेरा। छात्राओं ने ‘मां चाहिए, बहन चाहिए, पत्नी चाहिए तो बेटियों को अधिकार दो’ स्लोगन के जरिए समाज को संदेश देने की कोशिश की। बच्चियों ने ‘जब है नारी में शक्ति सारी, तो फिर क्यों डरे बेचारी’ स्लोगन के जरिए नारी शक्ति के अलग-अलग स्वरूपों को पेश किया।
मुख्य वक्ता डॉ. नवीन सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन होने से बच्चों के मानसिक पटल पर बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव जगने के साथ उनकी महत्ता समझ में आएगी। कहा कि लैंगिक समानता को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बेगम खैर गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य मुस्लिमा खातून ने कहा कि लड़कियों के लिए सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक क्षेत्र में लैंगिक समानता से ही बदलाव संभव है। शुभ्रा सिंह ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं, सरकारी संस्थाओं, कर्मचारियों और सभी संबंधित लोगों को लैंगिक संवेदनशीलता और महिलाओं के सम्मान के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
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इस मौके पर कहकशा बानो, नुसरत फातमा, हेमलता यादव, रीता मौर्य, सावित्री उपाध्याय, अलका पांडेय, नजमा नजीर अब्बासी, जीनत जहां, सईस्ता अफरोज, अपर्णा, पूर्णिमा श्रीवास्तव, सावित्री, रीता मौर्य आदि मौजूद रहीं।
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बस्ती। जिले के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज व बेगम खैर गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्राओं ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह के क्रम में पेंटिंग्स के जरिए कोरे कागज पर आधी आबादी की महत्ता और उनकी उपलब्धियों को रेखांकित किया। छात्राओं ने हाथों में स्लोगन लेकर लैंगिक समानता का शपथ भी ली।
विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली, युवा विकास समिति व रुद्र रक्षा फाउंडेशन की ओर से सोमवार को लैंगिक समानता के मुद्दे पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लिया जिसमें दोनों स्कूलों के 300 छात्राओं ने प्रतियोगिता में भाग लेकर समाज में महिलाओं की महत्ता और उनके अधिकार के लिए एक से बढ़कर एक पेंटिंग बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने पेंटिंग के जरिए समाज में स्त्रियों का हाल बयां किया। बेगम खैर की छात्रा स्मृति, रुपाली आर्या, सना, गीता श्रीवास्तव, गायत्री ने पेटिंग के जरिए समाज में हो रहे लिंग भेद को रेखांकित करते हुए बेटे और बेटियों को एक तराजू के जरिए दिखाया। जीजीआईसी की छात्राओं ने पेंटिंग के साथ आकर्षक स्लोगन भी कोरे कागज पर उकेरा। छात्राओं ने ‘मां चाहिए, बहन चाहिए, पत्नी चाहिए तो बेटियों को अधिकार दो’ स्लोगन के जरिए समाज को संदेश देने की कोशिश की। बच्चियों ने ‘जब है नारी में शक्ति सारी, तो फिर क्यों डरे बेचारी’ स्लोगन के जरिए नारी शक्ति के अलग-अलग स्वरूपों को पेश किया।
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मुख्य वक्ता डॉ. नवीन सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन होने से बच्चों के मानसिक पटल पर बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव जगने के साथ उनकी महत्ता समझ में आएगी। कहा कि लैंगिक समानता को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बेगम खैर गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य मुस्लिमा खातून ने कहा कि लड़कियों के लिए सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक क्षेत्र में लैंगिक समानता से ही बदलाव संभव है। शुभ्रा सिंह ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं, सरकारी संस्थाओं, कर्मचारियों और सभी संबंधित लोगों को लैंगिक संवेदनशीलता और महिलाओं के सम्मान के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
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इस मौके पर कहकशा बानो, नुसरत फातमा, हेमलता यादव, रीता मौर्य, सावित्री उपाध्याय, अलका पांडेय, नजमा नजीर अब्बासी, जीनत जहां, सईस्ता अफरोज, अपर्णा, पूर्णिमा श्रीवास्तव, सावित्री, रीता मौर्य आदि मौजूद रहीं।