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एसआईआर : अक्षर या नंबर में अंतर पर डाटा नहीं हो पा रहा अपलोड
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बस्ती। एसआईआर प्रक्रिया एडवांस साफ्टवेयर के चलते उलझ गई है। मतदाताओं को जोड़ने को लिए बीएलओ और अन्य तकनीकी जानकार भी परेशान हैं। आयोग के पोर्टल पर तमाम नो-मैपिंग वाले मतदाता और नए मतदाताओं का फार्म छह, सात और आठ अपलोड नहीं हो पा रहा है। इसमें आईडी प्रपत्र और वोटर लिस्ट में दर्ज नाम में अक्षर या आईडी नंबर का कोई अंक मिस मैच होते ही फार्म रिजेक्ट हो जा रहे हैं। इसके बाद मतदाताओं की परेशानी बढ़ जा रही है। उन्हें नए सिरे प्रपत्र जुटाने के लिए भागदौड़ करनी पड़ रही है।
मतदाता सूची और साक्ष्य प्रपत्रों में हल्की त्रुटियां भी भारी पड़ रही है। साफ्टवेयर प्रस्तुत पहचान प्रपत्र से मतदाताओं का मिलान नहीं कर पा रहा है। यहीं वजह है कि नो-मैपिंग वाले 1, 13,353 मतदाताओं में से चार दिनों के भीतर केवल 10 हजार लोग ही साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत हो पाए हैं। इसमें भी सभी मतदाताओं का साक्ष्य स्वीकार योग्य नहीं पाया गया है। बूथ, ब्लॉक, तहसील स्तर पर डॉटा फीडिंग का कार्य लगातार चल रहा है। तकनीकी जानकारों का कहना है कि कुछ जगहों से साक्ष्यों का सत्यापन भी ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। सुनवाई के लिए एईआरओ नियुक्त किए गए हैं।
बावजूद इसके मतदाता सूची के सापेक्ष दूसरे जगह की आईडी या अन्य साक्ष्य कई मतदाताओं ने प्रस्तुत किए हैं। जिससे उनका मैपिंग नहीं हो पा रहा है। कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र के मतदाता राम प्रकाश बताते हैं कि वह अपने पूरे परिवार का नाम दूसरे विधानसभा के मूल पते पर शिफ्ट कराना चाहते हैं। इसके लिए फार्म आठ भरने का सुझाव दिया गया। लेकिन, आधार और वोटर लिस्ट में दर्ज नाम का मिलान न होने से उनका आवेदन पोर्टल पर रिजेक्ट हो जा रहा है।
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तकनीकी जानकारों का कहना है कि वर्ष 2005 की मतदाता सूची के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया कराई जा रही है। अभी तक अमूमन मतदाताओं का केवल नाम ही सूची में दर्ज होता रहा है। जबकि आधार, पैन, पासबुक, परिवार रजिस्टर के नकल आदि में सर नेम सहित नाम अंकित पाया जा रहा है। इसके अलावा सूची में दर्ज नाम के लिखावट और साक्ष्य में प्रस्तुत किए जा रहे प्रपत्रों की लिखावट में स्पेलिंग का भी अंतर मिल रहा है। इस वजह से साफ्टवेयर अंतर पाने पर आवेदन रिजेक्ट कर दे रहा है। बैरियहवां मोहल्ले के अमित कुमार ने बताया कि उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के प्रथम चरण में ही सभी आवश्यक प्रपत्र दे दिए थे। मतदाता सूची में उनका केवल अमित लिखा है और आधार में अमित कुमार दर्ज हैं। जबकि पिता का नाम सूची में केशव प्रसाद है और आधार एवं अन्य प्रपत्र में केशव प्रसाद है। इस वजह से उनके नाम का मिलान एसआईआर में नहीं हो पा रहा है।
उनका कहना है कि पुनरीक्षण कार्य में पहले मतदाताओं के सत्यापन के दौरान उनका नाम उनके आईडी प्रपत्र के अनुसार संशोधित करना था। ऐसा नहीं होने से समस्या बढ़ गई है। कुछ जगहों पर बताया जा रहा है कि सूची के अनुरूप आईडी में नाम का संशोधन कराया जाए। जबकि यह काफी कठिन है। क्योंकि आईडी के आधार पर ही बैंक पासबुक, मार्कशीट, नौकरी, व्यवसाय से जुड़े अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए हैं।
नए मतदाताओं और बहुओं को भी हो रही कठिनाई : एसआईआर सूची में शामिल होने के लिए नए मतदाताओं को साक्ष्य के तौर पर अपना आधार, अभिभावक का आधार के साथ अभिभावक के मतदाता सूची का विवरण भी देना पड़ रहा है। यदि साक्ष्यों के मिलान में अभिभावक का नाम मिस मैच होने पर साफ्ट वेयर में फार्म छह अपलोड नहीं हो रहा है। इसी तरह शादी के बाद ससुराल रह रही महिलाओं के एसआईआर प्रक्रिया में भी दिक्कत आ रही है। रुधौली तहसील में आए विशुनपुरवा के अनूप कुमार का कहना है कि मतदाता सूची को पहचान पत्र के आधार पर नहीं बनी है। डिजिटिलाइज्ड प्रक्रिया में साफ्टवेयर एक-एक अक्षर का मिलान करता है। सबकुछ सही होने के बाद मतदाता अनावश्यक परेशान हो रहे हैं। सुनवाई करने वाले अधिकारी और फीडिंग कर रहे तकनीकी जानकार भी मदद करने में विवश दिख रहे हैं।
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मतदाता सूची और साक्ष्य प्रपत्रों में हल्की त्रुटियां भी भारी पड़ रही है। साफ्टवेयर प्रस्तुत पहचान प्रपत्र से मतदाताओं का मिलान नहीं कर पा रहा है। यहीं वजह है कि नो-मैपिंग वाले 1, 13,353 मतदाताओं में से चार दिनों के भीतर केवल 10 हजार लोग ही साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत हो पाए हैं। इसमें भी सभी मतदाताओं का साक्ष्य स्वीकार योग्य नहीं पाया गया है। बूथ, ब्लॉक, तहसील स्तर पर डॉटा फीडिंग का कार्य लगातार चल रहा है। तकनीकी जानकारों का कहना है कि कुछ जगहों से साक्ष्यों का सत्यापन भी ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। सुनवाई के लिए एईआरओ नियुक्त किए गए हैं।
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बावजूद इसके मतदाता सूची के सापेक्ष दूसरे जगह की आईडी या अन्य साक्ष्य कई मतदाताओं ने प्रस्तुत किए हैं। जिससे उनका मैपिंग नहीं हो पा रहा है। कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र के मतदाता राम प्रकाश बताते हैं कि वह अपने पूरे परिवार का नाम दूसरे विधानसभा के मूल पते पर शिफ्ट कराना चाहते हैं। इसके लिए फार्म आठ भरने का सुझाव दिया गया। लेकिन, आधार और वोटर लिस्ट में दर्ज नाम का मिलान न होने से उनका आवेदन पोर्टल पर रिजेक्ट हो जा रहा है।
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तकनीकी जानकारों का कहना है कि वर्ष 2005 की मतदाता सूची के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया कराई जा रही है। अभी तक अमूमन मतदाताओं का केवल नाम ही सूची में दर्ज होता रहा है। जबकि आधार, पैन, पासबुक, परिवार रजिस्टर के नकल आदि में सर नेम सहित नाम अंकित पाया जा रहा है। इसके अलावा सूची में दर्ज नाम के लिखावट और साक्ष्य में प्रस्तुत किए जा रहे प्रपत्रों की लिखावट में स्पेलिंग का भी अंतर मिल रहा है। इस वजह से साफ्टवेयर अंतर पाने पर आवेदन रिजेक्ट कर दे रहा है। बैरियहवां मोहल्ले के अमित कुमार ने बताया कि उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के प्रथम चरण में ही सभी आवश्यक प्रपत्र दे दिए थे। मतदाता सूची में उनका केवल अमित लिखा है और आधार में अमित कुमार दर्ज हैं। जबकि पिता का नाम सूची में केशव प्रसाद है और आधार एवं अन्य प्रपत्र में केशव प्रसाद है। इस वजह से उनके नाम का मिलान एसआईआर में नहीं हो पा रहा है।
उनका कहना है कि पुनरीक्षण कार्य में पहले मतदाताओं के सत्यापन के दौरान उनका नाम उनके आईडी प्रपत्र के अनुसार संशोधित करना था। ऐसा नहीं होने से समस्या बढ़ गई है। कुछ जगहों पर बताया जा रहा है कि सूची के अनुरूप आईडी में नाम का संशोधन कराया जाए। जबकि यह काफी कठिन है। क्योंकि आईडी के आधार पर ही बैंक पासबुक, मार्कशीट, नौकरी, व्यवसाय से जुड़े अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए हैं।
नए मतदाताओं और बहुओं को भी हो रही कठिनाई : एसआईआर सूची में शामिल होने के लिए नए मतदाताओं को साक्ष्य के तौर पर अपना आधार, अभिभावक का आधार के साथ अभिभावक के मतदाता सूची का विवरण भी देना पड़ रहा है। यदि साक्ष्यों के मिलान में अभिभावक का नाम मिस मैच होने पर साफ्ट वेयर में फार्म छह अपलोड नहीं हो रहा है। इसी तरह शादी के बाद ससुराल रह रही महिलाओं के एसआईआर प्रक्रिया में भी दिक्कत आ रही है। रुधौली तहसील में आए विशुनपुरवा के अनूप कुमार का कहना है कि मतदाता सूची को पहचान पत्र के आधार पर नहीं बनी है। डिजिटिलाइज्ड प्रक्रिया में साफ्टवेयर एक-एक अक्षर का मिलान करता है। सबकुछ सही होने के बाद मतदाता अनावश्यक परेशान हो रहे हैं। सुनवाई करने वाले अधिकारी और फीडिंग कर रहे तकनीकी जानकार भी मदद करने में विवश दिख रहे हैं।