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यहां सड़क के पटरियों की लगती है बोली
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जीआईसी के सामने पटरी पर लगी दुकानें।
- फोटो : BASTI
यहां सड़क के पटरियों की लगती है बोली
बस्ती। नगर पालिका क्षेत्र में पैदल चलने वालों के लिए बनी सड़क की पटरियों की रोज बोली लगाई जा रही है। खरीदार पथ व पटरी विक्रेता होते हैं। बड़े दुकानदार इनसे ठेला व पटरी पर सामने बेचने के बदले दो सौ से चार सौ रुपये ले रहे हैं।
शहर के गांधीनगर स्थित कुछ बड़ी दुकानों के सामने यदि कोई ठेला या पटरी विक्रेता अपनी दुकानें लगाने की सोचता है तो सबसे पहले उसे संबंधित दुकानदार से अनुमति लेनी पड़ती है। इसके बदले में दुकानदार को रुपये देने पड़ते हैं। यदि वह तय रेट नहीं देता है तो उसे दुकान लगाने की अनुमति नहीं दी जाती है। यही हाल रोडवेज, मालवीय रोड, पुरानी बस्ती, मंगलबाजार सहित अन्य स्थानों का है। इतना ही नहीं, रुपये की लेनदेन में अक्सर बड़े दुकानदारों से पथ विक्रेताओं की तकरार होती रहती हैं, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ ठेला दुकानदारों ने बताया कि कभी-कभी अच्छी कमाई नहीं होती है, इसके बावजूद तय रुपये संबंधित दुकानदार को देने होते हैं, उन पर मिन्नतों का भी असर नहीं होता है। ईओ नगर पालिका परिषद अखिलेश त्रिपाठी कहते हैं कि पालिका क्षेत्र में 15 वेडिंग जोन बनाए गए हैं। पथ विक्रेताओं की संख्या अधिक होने के चलते उनका रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। यदि कोई बड़ा दुकानदार इनसे वसूली करता है तो वह अवैध है। इसकी जांच कराई जाएगी।
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बस्ती। नगर पालिका क्षेत्र में पैदल चलने वालों के लिए बनी सड़क की पटरियों की रोज बोली लगाई जा रही है। खरीदार पथ व पटरी विक्रेता होते हैं। बड़े दुकानदार इनसे ठेला व पटरी पर सामने बेचने के बदले दो सौ से चार सौ रुपये ले रहे हैं।
शहर के गांधीनगर स्थित कुछ बड़ी दुकानों के सामने यदि कोई ठेला या पटरी विक्रेता अपनी दुकानें लगाने की सोचता है तो सबसे पहले उसे संबंधित दुकानदार से अनुमति लेनी पड़ती है। इसके बदले में दुकानदार को रुपये देने पड़ते हैं। यदि वह तय रेट नहीं देता है तो उसे दुकान लगाने की अनुमति नहीं दी जाती है। यही हाल रोडवेज, मालवीय रोड, पुरानी बस्ती, मंगलबाजार सहित अन्य स्थानों का है। इतना ही नहीं, रुपये की लेनदेन में अक्सर बड़े दुकानदारों से पथ विक्रेताओं की तकरार होती रहती हैं, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ ठेला दुकानदारों ने बताया कि कभी-कभी अच्छी कमाई नहीं होती है, इसके बावजूद तय रुपये संबंधित दुकानदार को देने होते हैं, उन पर मिन्नतों का भी असर नहीं होता है। ईओ नगर पालिका परिषद अखिलेश त्रिपाठी कहते हैं कि पालिका क्षेत्र में 15 वेडिंग जोन बनाए गए हैं। पथ विक्रेताओं की संख्या अधिक होने के चलते उनका रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। यदि कोई बड़ा दुकानदार इनसे वसूली करता है तो वह अवैध है। इसकी जांच कराई जाएगी।
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