बस्ती। पैगंबर-ए-इस्लाम के उत्तराधिकारी मौला अली अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में बुधवार देर रात गांधी नगर में मातमी जुलूस निकाला गया। इमामबाड़ा शाबान मंजिल व लाडली मंजिल में मजलिस का आयोजन हुआ। इमामबाड़ा लाडली मंजिल से मातमी जुलूस निकाला गया। अकीदतमंदों ने प्रतीक के तौर पर ताबूत व अलम उठा रखा था। मौला अली की याद में नौहा पढ़कर मातम कर रहे थे। जुलूस यहां से निकलकर ईदगाह गांधी नगर स्थित खुर्शेद मंजिल पहुंचा। वापस शाबान मंजिल पहुंचकर समाप्त हुआ। सुहेल बस्तवी, सोनू, मोहम्मद रफीक व अन्य ने सलाम व नौहा पढ़ा। मौलाना हैदर मेंहदी ने इमामबाड़े में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि पैगम्बर ने आखिरी हज से लौटते समय मौला अली को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। साजिश के तहत उन्हें इससे वंचित रखा गया। हजरत उस्मान के कत्ल के बाद जब लोगों ने मौला अली को हुकूमत संभालने के लिए मजबूर किया तो आपने इसे मंजूर करते हुए हुकूमत का मुख्यालय इराक का शहर कूफा बनाया। मौला अली के हुकुमत संभालते ही माविया ने बगावत कर दी। मौला अली को कई जंगे लड़ने पर मजबूर कर दिया गया। जंग के मैदान से हारे विरोधियों ने आप को एक साजिश के तहत उस समय कत्ल करा दिया जब आप कूफा की मस्जिद में नमाज पढ़ा रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह कर्बला के गुनहगारों को बेनकाब किया जा चुका है, उसी तरह मौला अली के कत्ल की साजिश में शामिल लोगों को बेनकाब करने की अब जरूरत है। मौलाना अली हसन, जीशान रिजवी, सफदर रजा, जैन, अन्नू, शम्स आबिद, तकी हैदर, फहीम हैदर, जावेद, मोहम्मद, आले हसन, आबिद अरशद आदि मौजूद रहे।